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कोरोना पेशेंट की मौत के बाद न PPE किट मिला न एम्बुलेंस, ठेले पर शव ले गए घरवाले

कोरोना पेशेंट की मौत के बाद न PPE किट मिला न एम्बुलेंस, ठेले पर शव ले गए घरवाले

बिहार के जमुई में शव को ठेले से ले जाते परिजन

बिहार के जमुई में शव को ठेले से ले जाते परिजन

Jamui News: बिहार के जमुई में हुई इस घटना ने सिस्टम पर बड़े सवाल कर दिए हैं. हद तो तब हो गई जब गांव जाने पर भी कोई मृतक के अंतिम संस्कार में शामिल होने इस वजह से नहीं आया कि शव को पीपीई किट नहीं पहनाया गया था.

जमुई. एक तरफ बिहार में जहां कोरोना (Bihar Corona Crisis) तांडव मचा रहा है, लोगों की जानें जा रही है वहीं कोरोना के भय से मानवता भी शर्मसार हो रही है. ऐसा ही एक मामला जमुई (Jamui) जिले के चकाई इलाके से आया है जहां कोरोना मरीज (Corona Patient) की मौत के बाद निजी अस्पताल वालों ने डेड बॉडी को बाहर निकाल दिया. परिजन रात भर एम्बुलेंस और पीपीई किट (PPE Kit) मांगते रहें लेकिन निजी अस्पताल वालो ने नहीं सुना. किसी तरह परिजन शव को लेकर अपने घर गए तब वहां किसी गांव वालों ने संक्रमण फैलने के भय से साथ नहीं दिया. अंत में मृतक का बुजुर्ग पिता और छोटा भाई शव को ठेले पर रखकर अंतिम संस्कार के लिए लेकर गए.

बताया जा रहा है कि जमुई जिले के सदर अनुमंडल के चकाई प्रखंड के नगरी गांव के कारू वर्मा कि तबीयत तीन दिन पहले खराब हो गई थी. वो राजमिस्त्री का काम करता था. जानकारी के अनुसार एक सप्ताह पहले उसने कोरोना की जांच करायी थी, जिसमें वह पॉजिटिव निकला था. इसके बाद वह होम आइसोलेशन में था. शुक्रवार को जब उसकी तबीयत खराब हुई तो उसे परिजनों ने चकाई के एक निजी क्लिनिक में उसे भर्ती कराया था जहां उसकी मौत हो गई थी.

मृतक के पिता बेलो महतो ने बताया कि उसके बेटे की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे चकाई के निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया था जहां उसकी मौत रात को हो गई, फिर अस्पताल वालों ने उसके बेटे के शव को बाहर निकाल दिया. शव को ढंकने के लिए न तो उसे प्लास्टिक दिया गया और न ही घर जाने के लिए कोई वाहन. किसी तरह वह खाट पर डेड बॉडी को लेकर घर पहुंचा. खुले में डेड बॉडी ले जाने के कारण गांव वालों ने भी साथ नहीं दिया कि इससे संक्रमण फैल जाएगा. ऐसे में अंत में अंतिम संस्कार के लिए ठेला पर ही शव को ले जाना पड़ा.

मामले में चकाई रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ सुशील कुमार ने बताया कि उन्हें न तो निजी क्लिनिक और न ही परिवार वालों ने इस बारे में सूचना दी कि किसी कोरोना मरीज की मौत हुई है. सूचना रहती तो शव ले जाने के लिए परिवार वालों को पीपीई किट उपलब्ध कराया जाता. खुले में डेड बॉडी ले जाने से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक रहती है.

Tags: Bihar News, Corona case in Bihar, Jamui news

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