बिहार चुनाव 2020: चार जेनरेशन बीत गए पर नकटी नदी पर नहीं बना पुल, जान जाखिम में डाल नदी पार करते हैं लोग
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बिहार चुनाव 2020: चार जेनरेशन बीत गए पर नकटी नदी पर नहीं बना पुल, जान जाखिम में डाल नदी पार करते हैं लोग
जमुई में नकटी नदी पर पुल की मांग कई दशक पुरानी है.

पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक विजय प्रकाश (MLA Vijay Prakash) ने कहा कि नकटी नदी पर डाढ़ा पूल निर्माण बेहद जरूरी है, इसको लेकर विधानसभा में भी सवाल उठा चुके हैं.

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जमुई. कई दशक बीत गए, कई चुनाव बीत गए, लेकिन हजारों की आबादी सात दशकों से आवागमन की सुविधा के लिए भी तरस रही है. जमुई जिले (Jamui district) के बरहट प्रखंड के डाढ़ा गांव के लोग हों या फिर उस गांव को होते हुए जिला मुख्यालय आने वाले बरहट और लक्ष्मीपुर प्रखंड (Barhat and Laxmipur Block) इलाके की जनता, उनकी परेशानी खत्म होते नहीं दिख रही है. डाढ़ा गांव से सट कर गुजरने वाली नकटी नदी पर पुल (Bridge over Nakti River) का निर्माण की मांग दशकों से हो रही रही है. चुनाव आता है तो पुल को मुद्दा बनाया जाता है, लेकिन उसके निर्माण की गति ये है कि सिर्फ डीपीआर (DPR) के नाम पर लोगों के आक्रोश को शांत करवा दिया जाता है.

बता दें कि जमुई जिले के बरहट प्रखंड से गुजरने वाली नगटी नदी के डाढा घाट पर पुल का निर्माण की मांग आजादी के बाद से ही हो रही है. बरहट के डाढा, सुदामापुर और तेतरिया होते हुए बांका जाने वाले इस सडक मार्ग पर लोगो को जमुई जाने और आने में सहूलियत हो इसलिए पुल की मांग लोग दशकों के करते आ रहें हैं. कई चुनाव बीत गए, कई विधायक बने, सांसद बने लेकिन ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं हुई.

वैसे तो साल भर लोग पुल निर्माण नहीं होने से दूसरे रास्ते जिला मुख्यालय जानें में 20 किलोमीटर की अधिक दूरी तय करनी पड़ती है. वहीं बरसात के दिनों मे लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करने के मजबूर हैं. बीमार को जल्द अस्पताल ले जाने के लिए लोग नदी का रास्ता ही चुनते हैं, स्कूल-कॉलेज जानें में जहां छात्रों को परेशानी उठानी पड़ती है. वहीं किसानों को खेती का सामान खरीदने के लिए इसी नदी के पानी में घुसकर जाना पड़ता है.



डाढा पंचायत के स्थानीय किसान ज्ञानेंद्र सिंह , हरेराम कुमार यादव जैसे कई लोगों का कहना है कि पुल के लिए ये लोग सभी विधायकोँ और सांसदों के पास गए, लेकिन अबतक सिर्फ आश्वासन ही मिला. चुनाव के समय लोग वादे करते हैं और बाद में भूल जाते हैं. कई लोग तो ये कहें कि पुल का डीपीआर तैयार हो रहा है, लेकिन हैरानी की बात है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी डीपीआर तैयार नहीं हुआ.
धुनियामारण गांव के युवा राजकुमार यादव, सोना मणि सिंह कह रहे हैं कि हमारे बुजुर्ग भी पुल के लिए संघर्ष करते रहे. सुनते हैं कि परदादा के जमाने से ही इसकी मांग की जा रही है. हमने भी बचपन से ही देखा है कि पुल के लिए हमारे बड़े किस तरह नेताओं से गुहार लगाते रहे हैं. अब हम भी युवा हो गए लेकिन हालात नहीं बदले.

पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक राजद नेता विजय प्रकाश ने कहा कि नकटी नदी पर डाढ़ा पूल निर्माण बेहद जरूरी है, जिसको लेकर वो विधानसभा में भी सवाल उठा चुके हैं. उनकी जानकारी के अनुसार उस पुल के निर्माण के लिए राशि भी जिला भेजी गई थी जो बगैर उपयोग किये वापस लौट गई.
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