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जमुईः बच्चों को संस्कृत में पिछड़ता देख युवा ने उठाया जिम्मा, खेल-खेल में दे रहा मुफ्त शिक्षा

KC Kundan | News18 Bihar
Updated: November 16, 2019, 8:13 PM IST
जमुईः बच्चों को संस्कृत में पिछड़ता देख युवा ने उठाया जिम्मा, खेल-खेल में दे रहा मुफ्त शिक्षा
जमुई में संस्कृत शिक्षा की अलख जगा रहे रवि मिश्रा.

जमुई (Jamui) के गांवों में संस्कृत शिक्षा (Sanskrit education) की अलख जगा रहा है विज्ञान (Science) और पत्रकारिता (Journalism) की पढ़ाई करने वाला रवि मिश्रा. बच्चों को खूब पसंद आ रहा है खेल-खेल (Learning with Fun) में संस्कृति सिखाने का तरीका.

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जमुई. इंसान अगर ठान ले तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है. ऐसे ही जिद और जुनून का नाम है रवि कुमार मिश्रा, जिसे आजकल जमुई (Jamui) के लोग संस्कृत की मुफ्त शिक्षा (Sanskrit education) देने वाले के रूप में जानने-पहचानने लगे हैं. रवि ने खुद विज्ञान (Science) और पत्रकारिता (Journalism) की पढ़ाई की है, लेकिन अपने गांव के बच्चों को संस्कृत विषय में पिछड़ता देख उन्होंने इस विषय को आसान बनाने की ठान ली. अपनी लगन और मेहनत के दम पर बिना किसी औपचारिक डिग्री के रवि ने खेल-खेल में संस्कृत शिक्षा देने का तरीका ढूंढ निकाला. आज वह जमुई जिले के विठलपुर गांव के बच्चों को संस्कृत की मुफ्त शिक्षा देते हैं. रवि की वजह से ही अब छात्रों को परीक्षा में अच्छे अंक भी आने लगे हैं.

गांव से लगाव ही बनी मुफ्त शिक्षा की वजह
विठलपुर गांव के 28 साल के रवि मिश्रा को अपने गांव से लगाव है. साधारण परिवार से आने वाले रवि ने महानगर में रहकर उच्च शिक्षा हासिल की है. लेकिन गांव की संस्कृति से मोह ने उन्हें शहर में नहीं रहने दिया. इसलिए विज्ञान की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की डिग्री हासिल कर भी वह लौटकर अपने गांव आ गए. गांव आने के बाद उन्हें यहां के बच्चों को संस्कृत में पिछड़ने और इसकी पढ़ाई न होने के बारे में पता चला, तो रवि ने खुद बच्चों को पढ़ाने का फैसला किया. आज रवि के घर के बरामदे में संस्कृत की पढ़ाई होती है. इस कक्षा में सिर्फ रवि के गांव के ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के बच्चे भी शामिल होते हैं. पढ़ाई मुफ्त है, लेकिन अगर कोई शुल्क देना चाहे तो कुछ भी दे सकता है.

गीत-संगीत के साथ पढ़ाते हैं संस्कृत

रवि कुमार मिश्रा ने बताया कि हमारे देश की संस्कृति को जानने-समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान जरूरी है. इसलिए मैंने ये राह चुनी है. ग्रामीण इलाकों के बच्चों को रवि खेल-खेल में संस्कृत का ज्ञान देते हैं. वे गीत-संगीत के साथ संस्कृत के श्लोक या व्याकरण के नियम याद रखने की ट्रिक बताते हैं, जिससे बच्चों के लिए इस विषय की पढ़ाई आसान हो जाती है. रवि की कक्षा में पढ़ने वाली नेहा कहती है कि पहले उसे यह विषय समझ में नहीं आता था. परीक्षा में नंबर भी कम आते थे. लेकिन रवि मिश्रा की शिक्षा के बाद अब संस्कृत अच्छा लगता है और परीक्षा में नंबर भी अच्छे आए हैं. कुछ ऐसी ही राय छात्र प्रियांशु की भी है, जिन्हें अब संस्कृत पढ़ना अच्छा लगता है.

गांव के लोग कर रहे तारीफ
जमुई जिले में संस्कृत शिक्षा के इस अनोखे पहल की स्थानीय लोग तारीफ कर रहे हैं. गांव के सरकारी स्कूल में शिक्षक मो. जावेद का कहना है कि रवि मिश्रा की पहल से बच्चों की न सिर्फ पढ़ाई आसान हो गई है, बल्कि गरीब तबके के छात्रों को इसके लिए अलग से पैसे भी खर्च नहीं करने पड़ रहे हैं. गांव में मेडिकल स्टोर चलाने वाले हिमांशु प्रवीण ने कहा कि रवि की कक्षा में सुबह-शाम दर्जनों बच्चे पहुंचते हैं. इस कक्षा की बदौलत ही गांव के बच्चों को अब संस्कृत की परीक्षा में अच्छे नंबर आने लगे हैं.
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First published: November 16, 2019, 8:13 PM IST
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