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20 साल तक 'आतंक' फैलाने वाले नक्‍सली बजरंगी की मौत, सरेंडर के बाद 11 साल लड़ी ये लड़ाई

KC Kundan | News18 Bihar
Updated: November 27, 2019, 5:09 PM IST
20 साल तक 'आतंक' फैलाने वाले नक्‍सली बजरंगी की मौत, सरेंडर के बाद 11 साल लड़ी ये लड़ाई
2008 में मुख्यधारा में लौटा था बजरंगी.

पुलिस के सामने 11 साल पहले आत्मसमर्पण (Surrender) करने वाले पूर्व नक्सली बजरंगी साव (Bajrangi Sav) की मौत हो गई है. हैरानी की बात है कि 11 साल तक सरकार की पुनर्वास योजना (Rehabilitation Scheme) का लाभ लेने के लिए उसे लड़ाई लड़नी पड़ी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. जबकि आज उसका परिवार आर्थिक बदहाली से गुजर रहा है.

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जमुई. बिहार पुलिस के समक्ष 11 साल पहले आत्मसमर्पण (Surrender) करने वाले पूर्व नक्सली बजरंगी साव (Bajrangi Sav) को पुनर्वास योजना (Rehabilitation Scheme) का लाभ मौत आने तक नहीं मिला. जबकि योजना के लाभ के लिए वह डीएम और एसपी समेत कई अधिकारियों के चक्कर लगा चुका था. इससे नक्‍सलियों के पुनर्वास के सरकारी दावे की भी पोल खुल गई है. 2008 में पुलिस के सामने सरेंडर कर मुख्यधारा में लौटा बजरंगी केस लड़ने और अपने इलाज में कर्ज लेकर लाखों रुपए खर्च कर चुका है, लेकिन तमाम कवायद के बाद भी उसे योजना का लाभ नहीं मिला. जबकि उसके बेटे की मानें तो उनके पास श्राद्ध के लिए भी रुपए नहीं हैं.

20 साल तक दहशत फैलाने के बाद...
लगातार 20 सालों तक नक्सली संगठन का सक्रिय सदस्य रहने वाला बजरंगी साव उर्फ बहादुर दा ने 2008 में जमुई के तत्कालीन एसपी विनय कुमार (SP Vinay Kumar) के समक्ष आत्मसमर्पण किया था. उस समय बजरंगी को बताया गया था कि उसे पुनर्वास योजना के तहत कई योजना का लाभ मिलेगा, जिसमें तीन हजार रुपए प्रति महीना, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था, रोजगार की व्यवस्था और साथ ही मुकदमा लड़ने के लिए भी आर्थिक मदद मिलेगी, लेकिन आत्मसमर्पण करने के बाद 11 साल तक पुनर्वास योजना के लाभ के इंतजार में जिले के अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद भी उसे कोई लाभ नहीं मिला. जबकि सोमवार की रात उसकी हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई. वह जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड के अमरवा गांव का रहने वाला था.

नक्‍सली की विधवा ने कही ये बात

बजरंगी विधवा लालपरी देवी कहती हैं कि 18 हजार तभी मिले थे, जब उन्‍होंने सरेंडर किया था. इलाज कराने और बच्चों को पालने में लगभग साढ़े तीन लाख का कर्ज हो चुका है. पुनर्वास योजना के लाभ नहीं मिलने से वे चिंतित थे और उनकी मौत हो गई. अब तो सरकार रहम कर दे. जबकि मृतक बजरंगी के बेटे जितेंद्र की मानें तो उसके पिता योजना के लाभ के इंतजार में चल बसे, भारी कर्ज है, अब तो श्राद्ध के लिए भी पैसा नहीं है. श्राद्ध कर्म कैसे होगा कहीं, अब तो लोग कर्ज भी नहीं दे रहे हैं. अगर सरकार उन्हें पुनर्वास योजना का लाभ दे देती तो उनका भविष्य सुधर जाता.

आपको बता दें कि जमुई जिले में अब तक 5 नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे हैं, लेकिन अभी तक किसी को भी पुनर्वास योजना का लाभ नहीं दिया जा सका है. जबकि ये लोग कई बार जिला प्रशासन से मांग कर चुके हैं. इस मामले पर जिले के अधिकारी कहते हैं कि विभाग और सरकार को इस बारे में पत्र भेजा गया है.

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First published: November 27, 2019, 4:59 PM IST
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