10 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारने वाले नक्सली सिद्धू कोड़ा की पुलिस कस्‍टडी में मौत

अस्पताल में सिद्धू कोड़ा की जांच करते डॉक्टर
अस्पताल में सिद्धू कोड़ा की जांच करते डॉक्टर

जमुई जिले के खैरा के जंगलों में रहने वाला सिद्धू कोड़ा नक्सली दस्ते में 1998 से ही सक्रिय रहा था जिसमे मुख्य कांड शामिल है. जोनल कमांडेंट सिद्धू कोड़ा पर खैरा थाना में कई नक्सलवाद की घटनाओं का अंजाम देने का प्राथमिकी दर्ज है

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जमुई. झारखण्ड के दुमका से जमुई पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए नक्सली नेता सिद्धू कोड़ा की मौत पुलिस अभिरक्षा में हो गई है. गिरफ्तारी के बाद छापेमारी के दौरान सिद्धू कोड़ा को पेट और सीने में दर्द  हुआ. तबियत बिगड़ते ही उसे एसटीएफ की टीम सदर अस्पताल ले आई लेकिन शनिवार की देर रात डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया.

दुमका से हुई थी गिरफ्तारी

जमुई एसपी की सूचना पर एसटीएफ ने इनामी नक्सली सिद्धू कोड़ा को झारखंड के दुमका से गिरफ्तार किया था. इस दौरान गिरफ्तार नक्सली के पास से एक एके-47 भी बरामद हुआ था. उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने निशानदेही पर कार्रवाई करते हुए दो और नक्सली इलियास हेंब्रम और सुशील हांसदा को चकाई थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया था जहां से पुलिस ने लगभग 100 की संख्या में कारतूस और एक इंसास और एक राइफल को बरामद किया था.



सर्च ऑपरेशन के दौरान बिगड़ी तबीयत
सिद्धू कोड़ा की गिरफ्तारी और फिर उसकी मौत के बारे में जमुई पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए यह बताया है कि 22 फरवरी को सिद्धू कोड़ा को झारखंड के दुमका से गिरफ्तार किया गया था जिसके बाद एएसपी अभियान और एसटीएफ के द्वारा सर्च अभियान चलाया गया. गिरफ्तार नक्सली के निशानदेही पर दो सक्रिय सदस्य इलियास हेम्बरम और सुशील हांसदा को गिरफ्तार किया गया. फिर उनके पास एके-47 और इंसास राइफल और हैंड ग्रेनेड की बरामदगी की गई. गिरफ्तारी के दौरान नक्सली सिद्धू कोड़ा के द्वारा यह बताया गया कि माओवादी द्वारा पुलिस का लूटा हुआ जो राइफल इंसास और विस्फोटक और अन्य सामग्री जो राष्ट्र विरोधी गतिविधि में उपयोग किया जाता है उसे बरामद कराया जाएगा.

डीआईजी कर रहे मामले की निगरानी

एसटीएफ के पदाधिकारी के अनुसार छापेमारी के क्रम में गिरफ्तार नक्सली सिद्धू कोड़ा द्वारा जंगल में पेट और छाती में दर्द की शिकायत की गई जिसके बाद तत्काल एसटीएफ द्वारा उसे अस्पताल भेजा गया जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया गया. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार कार्रवाई और जांच की जा रही है. गिरफ्तार नक्सली नेता सिद्धू कोड़ा की मौत के बाद मुंगेर डीआईजी मनु महाराज जमुई में कैम्प कर पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं.

70 से अधिक केस थे दर्ज

झाझा एसडीपीओ भास्कर रंजन ने बताया कि कोड़ा के खिलाफ लगभग 70 से भी अधिक केस विभिन्न थानों में दर्ज थे. इस नक्सली की गिरफ्तारी दुमका से हुई थी जो दुमका में भी नक्सली वारदात को अंजाम देने वाला था. गिरफ्तार नक्सली जिसकी मौत पुलिस अभिरक्षा में तबियत बिगड़ने से बताई जा रही है उस पर जमुई और झारखंड के थानों में कई केस दर्ज हैं.

दो दशक से था सक्रिय

जमुई जिले के खैरा के जंगलों में रहने वाला सिद्धू कोड़ा नक्सली दस्ते में 1998 से ही सक्रिय रहा था जिसमे मुख्य कांड शामिल है. जोनल कमांडेंट सिद्धू कोड़ा पर खैरा थाना में कई नक्सलवाद की घटनाओं का अंजाम देने का प्राथमिकी दर्ज है. 1998 में खैरा थाना के दीपकरहर में बारूदी सुरंग विस्फोट कर एक पेट्रोलिंग मजिस्ट्रेट सहित दो लोगों की हत्या कर दी थी तथा 3 जवानों की बंदूकें लूट ली गईं थीं. साल 2003 के अगस्त माह में हरखार मुखिया गोपाल साव हत्याकांड, अगस्त 2003 डीएम-एसपी के काफिले पर हमला जिसमे एक पुलिस इंस्पेक्टर की शहीद हुए थे और 5 सरकारी वाहनों में आग लगाई गई. 24 अप्रैल 2005 में एकतरवा गांव में दो लोगों की नृश़ंस हत्या, 5 जून 2007 को नक्सलियों ने गरही स्थित सिंचाई विभाग के निरीक्षण भवन को डायनामाइट से बम विस्फोट कर उड़ा दिया था जिसमें सिद्धू कोड़ा को अभियुक्त बनाया गया था.

पुलिस बल पर हमले में था माहिर

कोड़ा ने 9 फरवरी 2009 को संत रैदास के मंदिर प्रांगण में पुलिस बल पर हमला किया था जिसमें नवादा जिले के कौवाकोल थानाध्यक्ष समेत 10 जवान शहीद हो गए थे. 2 मार्च 2011 को गरही में सिंचाई भवन एवं आइबी एवं अन्य सरकारी भवन को जेसीबी से क्षतिग्रस्त करने में, खलारी गांव निवासी रीतलाल यादव की हत्या ,खैरा ब्लॉक एवं खैरा पावर सबस्टेशन डायनामाइट से उड़ा कर ध्वस्त कर दिया था. इसी दौरान नक्सली बंदी के दौरान गिदेश्वर बालू घाट पर 12 ट्रकों को आग के हवाले कर दिया था. खैरा थाना पुलिस की गश्ती गाड़ी को गिद्धेश्वर जंगल में हमला जिसमें अवर निरीक्षक जेके सिंह की मौत घटनास्थल पर हो गई थी इसमें एक अवर निरीक्षक कमलेश कुमार गंभीर रूप से घायल भी हुए थे. लखारी गांव में मुठभेड़ के दौरान सीआरपीएफ कमांडेंट हीर झा शहीद हुए थे. कोड़ा ने 26 जनवरी 2013 को बादल डीह पुल पर निर्माण कर रहे मजदूरों को अगवा कर 3 दिन के बाद संवेदक से लेवी लेकर रिहा किया था एवं
20 सितंबर 2013 को पुलिस बल पर हमला कर एसटीएफ के एक जवान की हत्या परासी में निर्माणाधीन सामुदायिक भवन को डायनामाइट से विस्फोट कर उड़ा दिया था.
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