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 4 महीने के बच्चे की मौत के बाद परिजनों का रेफरल अस्पताल में हंगामा, गलत टीका लगाने का आरोप

News18 Bihar
Updated: November 14, 2019, 3:43 PM IST
 4 महीने के बच्चे की मौत के बाद परिजनों का रेफरल अस्पताल में हंगामा, गलत टीका लगाने का आरोप
जमुई के चकाई रेफलर अस्पताल में एक बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया.

परिजनों का कहना है कि टीका लगने के बाद बच्चे की तबीयत देर शाम बिगड़ गई, फिर जब उसे अस्पताल लाया गया तो चकाई रेफरल अस्पताल में बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया.

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जमुई . चार महीने के बच्चे की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने चकाई रेफरल अस्पताल (Chakai Referal Hospital) में जमकर हंगामा किया. इस दौरान परिजनों ने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की और सामान भी फेंक दिए. आक्रोशित परिजनों ने फेंके गए सामान में आग लगाने की कोशिश भी की, लेकिन मौके पर पहुंची चकाई पुलिस के अधिकारी किसी तरह चकाई रेफरल अस्पताल के सामान को नष्ट होने से बचाया.

हंगामा कर रहे परिजनों का आरोप था कि उसके चार माह के बच्चा को गलत टीका लगाया गया, जिसके कारण उसकी तबीयत बिगड़ी और फिर उसकी मौत हो गई. हंगामा और आरोप को देखते हुए चिकित्सा पदाधिकारी ने मामले का जांच कराने का आश्वासन परिजनों को दिया है.

जानकारी के अनुसार चकाई थाना इलाके के ठाकुरसेर गांव के संतोष कुमार नाम के शख्स के चार महीने के बेटे को बुधवार दिन में सरकारी एएनएम उत्तरा रानी पाल द्वारा टीका लगाया गया था. बच्चे को एएनएम ने पेंटा वाइलेड, बीसीजी, आइसीजी, पीसीवी का इंजेक्शन, रौटा वाइरस और पोलियो की खुराक पिलाई थी.

परिजनों का कहना है कि टीका लगने के बाद बच्चे की तबीयत देर शाम बिगड़ गई, फिर जब उसे अस्पताल लाया गया तो चकाई रेफरल अस्पताल में बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया. उनका आरोप है कि एएनएम उत्तरा रानी पाल ने जो टीका लगाया था, इसी के कारण उसकी मौत हुई है.

परिजनों का आरोप है कि बच्चे को गलत टीका लगाया गया जिससे उसकी मौत हो गई.


बताया जा रहा है कि जमुई जिले के चकाई थाना इलाके के ठाकुर शेर गांव के संतोष कुमार और उसके घर वाले कर्ज और जमीन बेचकर निजी नर्सिंग होम में अपने बच्चे की जान बचाई थी, लेकिन महज 4 महीने की उम्र में ही उनके घर का लाल की मौत हो गई.

परिजन इस बात से नाराज थे कि लाखों रुपए खर्च कर निजी नर्सिंग होम में इलाज करा कर बच्चे को बचाया गया था, लेकिन टीका के बाद उसकी मौत हो गई. बच्चे के पिता संतोष कुमार ने बताया कि जन्म के बाद बच्चे के इलाज में लगभग 3 लाख रुपया की राशि खर्च हो चुका है.
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उनका कहना है कि गरीबी की हालत में भी उसने 2 लाख रुपया सूद पर महाजन से कर्ज लिया था, जबकि 5 कट्ठा जमीन बेचकर 1 लाख खरीदार से लिया था. बच्चे के इलाज में इतनी राशि खर्च करने के बाद बच्चे की स्थिति ठीक भी हो गई थी. बच्चा स्वस्थ था, लेकिन टीका लगने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और मौत हो गई.

परिजनों के आरोप पर अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ रमेश कुमार ने कहा कि परिजन आरोपों पर एनएम से पूछताछ की जा रही है. साथ ही उस रजिस्टर को भी खंगाला जा रहा है कि बच्चे को कौन-कौन सी इंजेक्शन और टीका लगे थे. मामले की जांच के बाद अगर कोई दोषी पाया जाएगा तो कार्रवाई होगी.

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First published: November 14, 2019, 3:43 PM IST
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