महीने में बस 3 से 4 दिन खुलता है यह स्कूल, दानदाता ने कहा जमीन वापस करे सरकार

News18 Bihar
Updated: September 6, 2019, 11:10 PM IST
महीने में बस 3 से 4 दिन खुलता है यह स्कूल, दानदाता ने कहा जमीन वापस करे सरकार
जमुई जिले के बरहट प्रखंड के डाढा पंचायत का प्राथमिक विद्यालय धुनियामारन, जहां गांव के लगभग दो सौ बच्चो का नामांकन है, लेकिन इन गरीब परिवार से आने वाले बच्चो को यहां शिक्षा नहीं मिल पाती.

जमुई जिले के बरहट प्रखंड के डाढा पंचायत का प्राथमिक विद्यालय धुनियामारन, जहां गांव के लगभग दो सौ बच्चो का नामांकन है, लेकिन इन गरीब परिवार से आने वाले बच्चो को यहां शिक्षा नहीं मिल पाती.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 6, 2019, 11:10 PM IST
  • Share this:
जमुई. एक तरफ जहां सरकारी तौर पर दावे किए जाते हैं कि सरकारी स्कूलों में बेहतर पढ़ाई और स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए स्कूल के बच्चों को मिड-डे-मील दिया जा रहा है. वहीं ऐसे में अगर कोई स्कूल बीते एक साल से सरकारी स्कूल नहीं बल्कि स्कूल के प्रभारी का निजी दालान जैसा हो जाए तो क्या होगा? दरअसल यहां स्कूल के प्रभारी का जब मन हुआ स्कूल आए जब मन नहीं हुआ नहीं आए. जमुई जिले का यह स्कूल सूबे का शायद एक मात्र स्कूल होगा जो महीने में मात्र तीन से चार दिन ही खुलता है.

स्कूल में हर दिन मिड-डे-मील बनाने वाली रसोइया आती है. वहीं स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी हर दिन तैयार होकर आते हैं, लेकिन स्कूल खुले इसका इंतजार घंटो कर वापस लौट जातें हैं. हैरानी की बात है कि कई बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब तो स्कूल बनने की जमीन दान में देने वाले कह रहें हैं जब स्कूल नहीं चलता तो सरकार जमीन लौटा दे.

जमीन दान करने वाले को मलाल
जमुई जिले के एक गांव की रहने वाली महिला अलसी देवी को मलाल है कि उनके घर वालों ने जो जमीन स्कूल को दान दी थी उस स्कूल मे अब पढ़ाई नहीं होती. उनका कहना है कि जब स्कूल में पढ़ाई ही नहीं होती तो जमीन सरकार वापस कर दें. अलसी देवी का कहना है कि अगर कुछ दिन बाद भी यही हालात रहे तो स्कूल को दोनों गोतनी बांट लेंगी और परिवार के साथ उसी में रहेगी.

गांव के इस परिवार को मलाल है कि उन्होंने यह जमीन इसलिए दान में दी कि वहां के बच्चों को पढ़ने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. जिससे गांव और समाज का विकास होगा. लेकिन बीते एक साल से एक महीने में मात्र तीन या चार ही दिन स्कूल खुलता है. या कह सकते हैं कि बीते एक साल से स्कूल एक तरह से बंद है.

स्कूल में गांव के लगभग दो सौ बच्चो का नामांकन
स्कूल में ना तो मिड-डे-मील बनता है ना ही स्कूल के कमरे का ताला खुलता है और ना ही पढ़ाई होती है. जमुई जिले के बरहट प्रखंड के डाढा पंचायत का प्राथमिक विद्यालय धुनियामारन, जहां गांव के लगभग दो सौ बच्चो का नामांकन है, लेकिन इन गरीब परिवार से आने वाले बच्चो को यहां शिक्षा नहीं मिल पाती. जिस कारण गांव के लोग परेशान है. दरअसल इस स्कूल में धर्मेन्द्र सिंह नाम के एक मात्र शिक्षक की तैनाती है. जोकि एक दूसरे स्कूल के भी प्रभार में है. शिक्षक इस स्कूल में महीने में मात्र तीन से चार दिन ही आते हैं. गांव वालों का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई जिससे वह हैरान हैं कि आखिर विभाग के अधिकारी इस मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं.
Loading...

ये भी पढ़ें:

लड़की को घर में अकेला देख युवक ने किया दुष्कर्म, मामला दर्ज

दसवीं के छात्रों ने बनाई स्टार्टअप कंपनी, IIT और Amazon से मिला पुरस्कार

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जमुई से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 6, 2019, 11:10 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...