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25 साल पहले 'लापता' हुआ था पति, अब इस वजह से चर्चा में है ये महिला

KC Kundan | News18 Bihar
Updated: January 21, 2020, 8:03 PM IST
25 साल पहले 'लापता' हुआ था पति, अब इस वजह से चर्चा में है ये महिला
गांव की महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा के लिए मदद भी करती हैं शारदा.

जमुई जिले (Jamui District) के एक गांव में रहने वाली शारदा देवी (Sharda Devi) अपने पति के लापता होने के बाद 25 साल से विधवा की जिंदगी जी रही हैं. इसके बावजूद वह आजकल महिलाओं की मदद के लिए भी आगे रहती हैं.

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जमुई. सच ही कहा गया है कि अगर इंसान में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो वह संघर्ष और मेहनत के दम पर सफलता पा ही लेता है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जमुई जिले (Jamui District) के एक गांव में रहने वाली शारदा देवी (Sharda Devi) ने. पति के लापता होने के बाद 25 साल से विधवा की जिंदगी जी रही इस महिला ने मिसाल पेश की है. वह बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी के साथ-साथ समाज सेवा की भावना और फिर अब रोजी रोटी के लिए कर्ज लेकर तालाब का निर्माण करवाकर मछली पालन करने का रोजगार कर रही हैं. जिंदगी के तमाम झंझावात को झेलने के बाद कभी ना हार मानने वाली शारदा का कहना है कि इंसान भले ही मजबूर हो लेकिन संघर्ष के बल पर सफलता पाई जा सकती है.

ऐसी जिंदगी रही है शारदा की
जिला मुख्यालय के विठलपुर गांव की 41 वर्षीय शारदा देवी का जीवन संघर्ष से भरा रहा है. कम उम्र में ही मां बाप का साया उठ गया और फिर जीवन साथी के रूप में जो शख्स शारदा के जिंदगी में आया वह दिमागी तौर पर कमजोर था. आज से लगभग 25 साल पहले शारदा देवी का पति कैलाश झा अचानक एक दिन लापता हो गया. फिर विधवा की जिंदगी जी रही शारदा देवी के सामने अपने बच्चों का पालन पोषण करना और अपनी जिंदगी को जीना एक चुनौती बन गई, लेकिन फिर भी उसने हार नहीं मानी. गांव में जहां महिलाओं को घर से निकलना मुश्किल होता था तब इस महिला ने बतौर निजी शिक्षक एक स्कूल में पढ़ाना शुरू किया.

उसके बाद समाज सेवा की भावना के साथ 2006 से आशा कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही है. गांव की महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना उनका मकसद रहता है. यही नहीं, वह गांव में बीमार लोगों को इंजेक्शन देने का काम करती है. हालांकि जब जरूरतें बढ़ीं और आर्थिक कमजोरी को दूर करने की चाह हुई तो, उन्‍होंने अपने जमीन पर एक तालाब का निर्माण करवा दिया. इस महिला ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर डेढ़ लाख रुपए में मछली पालन के लिए तालाब का निर्माण करवाया है.

शारदा देवी ने कही ये बात
शारदा देवी की मानें तो वह बीते 25 साल से विधवा की जिंदगी जी रही हैं. मानसिक रूप से बीमार पति उसे छोड़कर चला गया, लेकिन फिर भी हार नहीं मानी. जबकि बेटा बड़ा होने और घर की जरूरत बढ़ने पर उन्‍होंने नये रोजगार को अपनाया है. यही नहीं, शारदा देवी के संघर्ष और मेहनत का लोहा पूरा गांव मानता है. गांव के सिंटू सिंह हो या फिर कुंदन मिश्रा या फिर शारदा देवी का अपना छोटा भाई मनोज कुमार राज हंस सब का यही मानना है कि कर्ज लेकर तालाब का निर्माण कराना और फिर उसमें मछली पालन कर रोजगार की सोच से गांव के और भी लोगों पर असर पड़ा है. खासकर युवा पर जो बेरोजगार हैं, उनके लिए शारदा देवी ने रास्ता खोल दिया है. इन लोगों का मानना है कि यह महिला प्रेरणास्रोत बन गई है.

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First published: January 21, 2020, 7:53 PM IST
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