लाइव टीवी

दो कमरों के स्कूल में चार सौ बच्चे, क्लास रूम के लिए करना होता है छुट्टी का इंतजार

KC Kundan | News18 Bihar
Updated: October 20, 2019, 2:43 PM IST
दो कमरों के स्कूल में चार सौ बच्चे, क्लास रूम के लिए करना होता है छुट्टी का इंतजार
जमुई का वो स्कूल जहां दो कमरों में पढ़ाई होती है

जमुई स्थित इस स्कूल का उदघाटन पूर्व शिक्षा मंत्री और स्थानीय नेता जय प्रकाश यादव ने किया था लेकिन उदघाटन के कई दशक बाद भी इस स्कूल की बिल्डिंग सही नहीं हो सकी है.

  • Share this:
जमुई. बिहार की सरकार और शिक्षा विभाग (Education Department) भले ही सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा देने की बात करे लेकिन स्कूल में अभी भी कमरों और भवन का अभाव है. पूर्व शिक्षा मंत्री जय प्रकाश नारायण यादव और उनके छोटे भाई वर्तमान जमुई विधायक (MLA) विजय प्रकाश के पैतृक गांव से मात्र कुछ ही दूरी पर स्थित भलुका का मध्य विद्यालय संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है. जमुई जिले के बरहट प्रखंड के भलुका मध्य विद्यालय (Middle School) में मात्र दो कमरे हैं. इस स्कूल में वर्ग एक से आठ तक पढाई होती है.

400 बच्चे 90 फीसदी उपस्थिति

स्कूल में नामांकित बच्चे लगभग 4 सौ है और बच्चों की उपस्थिति भी हर दिन लगभग नब्बे फीसदी होती है लेकिन पढने-पढाने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है. इसका परिणाम है कि बच्चे या तो पेड़ के नीचे नहीं तो बरामदे मे पढते हैं. पचास साल पहले स्थापित इस स्कूल मे पर्याप्त कमरे बने इसकी मांग कई बार हुई लेकिन मिला तो सिर्फ आश्वासन. सूबे के पूर्व शिक्षा मंत्री जो कि केंद्र में भी मंत्री रह चुके जयप्रकाश नारायण यादव और वर्तमान में जमुई से विधायक विजय प्रकाश के पैतृक घर बरहट से मात्र कुछ ही दूरी पर स्थित है.

पेड़ के नीचे और बरामदे में भी चलती है क्लास

दरअसल इस स्कूल में वर्ग 1 से 8 तक पढाई होती है. इस स्कूल में पेड़ के नीचे या फिर स्कूल के बरामदे में क्लास लगती है. भलुका गांव के इस स्कूल में मात्र दो कमरे ही हैं और इस स्कूल में आठवीं तक पढाई होती है. स्कूल में बच्चो का नामांकन लगभगग 400 है. स्कूल में हर दिन नब्बे फीसदी बच्चों की उपस्थिति भी होती है नतीजन कमरे के अभाव में क्लास लगे तो कहां. दो कमरे ही हैं फिर क्या. एक कमरे में दो वर्ग और दूसरे कमरे में दो वर्ग.

बरामदे में ही बनता है मिड डे मील

स्कूल परिसर के पेड़ के नीचे वर्ग 1 और 2 के बच्चे पढ़ते हैं. एक बरामदे में जहां मध्यान्ह भोजन बनता है वहीं एक वर्ग के तीन के बच्चे और दूसरे बरामदे मे वर्ग के चार के बच्चे जमीन पर बैठ कर शिक्षा लेते हैं. स्कूल में मिड डे मील बनाने के लिए गैस कनेक्शन तो है लेकिन किचन शेड नहीं है, स्कूल के एक पुराने जर्जर हो चुके कमरे में एमडीएम बनता है जहां दो तीन बार सांप भी निकल चुके है एमडीएम बनाने वाली महिला उमा देवी की माने तो दो बार हमने सांप को मारा है
Loading...

50 साल पुराना है स्कूल

लगभग 50 साल से चले आ रहे इस स्कूल का बड़ा भवन नहीं बन सका है. स्कूल के जमीन पर भी अतिक्रमण है जाहिर है पढ़ने और पढ़ाने वालों को परेशानी होगी ही. स्कूल की शिक्षिका स्नेहा कुमारी की माने तो बरसात और गर्मी में बच्चों को परेशानी होती ही है पढ़ाने में शिक्षकों को भी परेशान होना पड़ता है.स्कूल के जिन दो कमरे में दो-दो वर्गों की पढ़ाई होती है वहां छात्रों को परेशानी होती है, क्योकिं अगर सातवीं की पढाई होती है तो आठवीं के छात्र बैठे रहते हैं और अगर आठवीं की होती है तो सातवीं के छात्र बैठे रहते हैं. कमरे के अभाव में बच्चो को पढानें में शिक्षक और स्कूल प्रबंधन को भी परेशानी होती है.

हेडमास्टर बोले

इस मामले में जब हमने स्कूल के हेडमास्टर से बात की तो चंद्रशेखर प्रसाद ने बताया कि परेशानी बहुत है. हमने कई बार अधिकारी से मांग भी की लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला. जिला शिक्षा पदाधिकारी विजय कुमार हिमांशु भी इस बारे में कहते हैं कि कमरों का अभाव है राशि उपलब्ध होने के बाद निर्माण करवाया जाएगा और स्कूल के जमीन पर अतिक्रमण को भी हटवाने का काम होगा. इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी का कहना है कि बीते 4 साल से भवन निर्माण को लेकर राशि का आवंटन नहीं हुआ है अगर राशि मिलेगी इन स्कूलों में भवन बनाए जाएंगे.

ये भी पढ़ें- BJP प्रदेश अध्यक्ष बोले- वोटिंग वाले दिन अपने कर्मचारियों को दें 500-500 रुपए

ये भी पढ़ें- पुलिसवाले के बेटे की सरेआम हत्या, अपराधियों ने दागी 7 गोलियां

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जमुई से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 20, 2019, 2:32 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...