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पटना में पूर्व मंत्री की दही-चूड़ा पार्टी में जुटे जेडीयू के बागी नेता, जल्द कर सकते हैं घर वापसी

पटना में जेडीयू नेता की दही-चूड़ा पार्टी में जुटे बागी नेता.
पटना में जेडीयू नेता की दही-चूड़ा पार्टी में जुटे बागी नेता.

विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में जेडीयू (JDU) से बगावत करने वाले नेता पूर्व मंत्री जय कुमार सिंह के आवास पर दही-चूड़ा पार्टी में जुटे. इनमें से कुछ नेताओं ने जेडीयू (JDU) में वापस आने की इच्छा जाहिर की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 14, 2021, 8:30 PM IST
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पटना. बिहार (Bihar) में दही चूड़ा के मौके पर पॉलिटिक्स (Politics) हमेशा से चर्चा में रहती आई है. पिछले साल तक JDU के पूर्व अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के आवास पर दही चूड़ा का आयोजन होता था और हर बार कोई ना कोई सियासी खिचड़ी ज़रूर पकती थी, लेकिन इस बार कोरोना की वजह से आयोजन नहीं हो सका. इस बार ये ज़िम्मा उठाया है जेडीयू (JDU) के पूर्व मंत्री जय कुमार सिंह ने, जिनके आवास पर दही- चूड़ा का आयोजन हुआ तो यहां भी नई सियासी खिचड़ी पकती दिखी.

यहां पर दही-चूड़ा के मौके पर यह देखने को मिला कि जेडीयू के जिन नेताओं ने टिकट नहीं मिलने पर जेडीयूसे बगावत कर दी थी, उनका लगाव फिर से जेडीयू की तरफ होने लगा है. ऐसे कई नेता इस दही-चूड़ा पार्टी में पहुंचे थे. यहां पर इन नेताओं ने जेडीयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जेडीयू के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष से मुकालात की.

इस बार विधानसभा चुनाव में जेडीयू से बगावत कर रणविजय शाही गोह से RLSP के टिकट पर चुनाव लड़े थे. वहीं मंजीत सिंह बैकुंठपुर से निर्दलीय चुनाव लड़े थे. तरैया से शैलेंद्र प्रताप निर्दलीय से चुनाव लड़े थे. इनकी मुलाक़ात जब वशिष्ठ नारायण सिंह से हुई तो आपसी प्रेम छलक पड़ा और उनकी आपसी बातचीत ऐसे माहौल में हुई मानो कभी अलग हुए ही नहीं.



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मुलाक़ात हुई तो बात भी हुई और ख़बर है कि ऐसे कई और नेता हैं जो चुनाव के वक़्त बाग़ी हुए थे, लेकिन अब उनकी घर वापसी की इच्छा जग गई है. मंजीत सिंह और रणविजय सिंह ने इसका इशारा भी कर दिया है. मंजीत सिंह ने कहा की नीतीश कुमार मेरे राजनीतिक पिता जैसे हैं और चुनाव के वक़्त कुछ ऐसी परिस्थितियां हुई थीं, जिसकी वजह से मुझे यह कदम उठाना पड़ा, लेकिन राजनीति में कुछ भी सम्भव है. वहीं रण विजय सिंह जो गोह से RLSP के टिकट पर चुनाव लड़े थे, कहते हैं मेरा टिकट काटा गया था, जिससे थोड़ी नाराज़गी थी, लेकिन राजनीतिक सम्भावनाओं का खेल हैं कुछ भी असम्भव नहीं है.

वहीं इस दही चूड़ा पार्टी का आयोजन करने वाले जय कुमार सिंह भी बेहद उत्साहित दिखे और कहा कि खरमास ख़त्म हो गया है तो राजनिति तो होगी ही. जो पुराने साथी थे अब वापस आने लगे हैं तो हर्ज़ क्या है. वहीं JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी इशारा किया कि अगर ऐसे नेता प्रायश्चित करते हैं तो वापसी के लिए सोचा जा सकता है. बहरहाल मकर संक्रांति के बाद बिहार की सियासत में कई बदलाव देखे जा सकते हैं. इसका इशारा मिलना अभी से शुरू हो गया है.
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