बिहार: सालों बाद भी पूरी नहीं हुई मोरहर नदी पर बांध बनाने की मांग, किसानों का जल सत्याग्रह शुरू

किसानों सालों से बांध की मांग कर रहे थे.
किसानों सालों से बांध की मांग कर रहे थे.

मोरहर नदी में बांध निर्माण की मांग को लेकर जल सत्याग्रह (Jal Satyagraha) किसानों ने बताया कि एक तरफ नदी में पानी है. वहीं नदी के आस-पास के खेत बिन पानी के सूखते जा रहे है.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 17, 2020, 6:51 PM IST
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जहानाबाद. बिहार के जहानाबाद (Jehanabad)- गया सीमा पर स्थित मखदुमपुर प्रखंड के मंझोस सहित लगभग 5 दर्जन गांव के ग्रामीण नदी में पानी रहते हुए भी सिंचाई के बिना फसलों को सूखते देख आंसू बहाने को मजबूर हैं. पिछले दो सालों से सिंचाई की समस्या को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने थक हार कर पास से गुज़र रही मोरहर नदी के बीच जल सत्यग्रह (Jal Satyagraha) करना शुरू कर दिया है. मोरहर नदी में बांध निर्माण की मांग को लेकर नदी के जल में बैठे किसानों ने बताया कि एक तरफ नदी में पानी है. वहीं नदी के आस-पास के खेत बिन पानी के सूखते जा रहे है.

किसानों का कहना है कि इस साल अच्छी बारिश होने से मंझौस पंचायत के तकरीबन आधा दर्जन गांव के किसानों ने धान की फसल तो लगा दी, लेकिन जब खेत में सिंचाई की जरूरत है तो बांध नहीं होने से नदी का पानी उनके खेतो में नहीं पहुंच रहा है. सत्यग्रह कर रहे किसानों ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों और नेताओं द्वारा उन्हें पिछले कई सालों से घेजन-मंझौस बियर बांध के निर्माण का टेंडर होने और उसके निष्पादन जल्द होने का सब्ज़बाग दिखाया जाता रहा है.

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कई सालों से किसान कर रहे थे मांग
पीड़ित किसानों ने बताया कि मोरहर नदी गया ज़िला से निकल कर जहानाबाद के मंझौस होते हुए पटना ज़िला के कई सौ एक्कड़ खेतों को सिंचित करती है. इस नदी पर काफी सालों से कच्चा बांध का निर्माण किया जाता था लेकिन पक्के बांध की मांग कई वर्षों से की जा रही है. लेकिन कई सालों की मांग के बावजूद सरकार और अधिकारियों की कान पर जूं भी नही रेंग रही है. बताते चले की कभी राज्य के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी इस इलाके से चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए थे. लेकिन खुद पूर्व मुख्यमंत्री के क्षेत्र के अन्नदाता पास से गुज़र रही नदी पर मात्र एक बांध के लिए जल सत्याग्रह करने को मजबूर हैं.
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