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शराबबंदी कानून में पहली सजा पाने वाले बिहार के दो महादलित भाईयों के परिवार की पढ़ें कहानी

Ragib ahasan | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: August 3, 2017, 7:10 PM IST
शराबबंदी कानून में पहली सजा पाने वाले बिहार के दो महादलित भाईयों के परिवार की पढ़ें कहानी
पीड़ित परिवार

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ज़िन्दगी तूने मौत से कम दी है ज़मी, पांव फैलाऊ तो दीवार से भी सिर लगता है, कुछ यही हाल है बिहार में शराबबंदी कानून के तहत पहली सजा पाने वाले दो भाईयों के परिवार की कहानी.

जहानाबाद जिले के महादलित परिवार से आने वाले जिन दो भाइयो को सरकार की नीति के तहत सजा मिली है उनका परिवार भूखमरी का शिकार हो रहा है. भले ही शराब के नशे में इन दोनों भाइयो को पांच वर्ष और एक लाख रूपये के जुर्माना की सज़ा सुनाई गयी है लेकिन खामियाजा इनके परिवार को भी भुगतना पड़ रहा है.

शराब पी कर सजा पाए दोनों भाइयो के परिजनों के समक्ष यह समस्या उत्पन्न हो गयी है को वो अपने पेट की आग बुझायें या सजा पाने वाले परिवार के दो सदस्यों को जुर्माना दे कर छुड़ायें.

जहानाबाद नगर थाना क्षेत्र के ऊंटा मोहल्ला के रहने वाले दो भाई पेंटर मांझी और मस्तान मांझी को शराब पीने के जुर्म में मई माह में पुलिस ने गिरफ्तार किया था. दोनों शराबंदी कानून के तहत सजा पाने वाले पहले शख्स बने जिन्हें दस जून को कोर्ट ने सजा सुनाई .

दोनों भाइयो को अदालत ने पांच पांच साल क़ैद और एक लाख रूपये की सजा सुनायी. इस सजा के बाद मानो परिवार वालो पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा, ऐसे में उन्हें समझ में नही आ रहा है की वो कमाने वाले के जेल चले जाने के बाद बच्चों की परवरिश करेें या उनकी जेल से रिहाई के लिय पैसों का जुगाड़ करें.

पेंटर की पत्नी क्रांति और मस्तान की पत्नी सियामनी की मानें तो दोनों भाईयो का परिवार दो जून की रोटी को मोहताज हो चुका है. इस मामले में भाकपा माले ने राज्य सरकार की शराब विरोधी नीति पर निशाना साधते हुए कहा की सूबे में तकरीबन शराब पीने और बेचने के पैंतालीस हज़ार मामले लंबित पड़े हैं.

माले नेता रामबली यादव ने कहा कि जहानाबाद का यह मामला सरकार की गरीब विरोधी नीति को दर्शाता है. सूबे की सरकार इस तरह के अध्यादेश ला कर गरीबो पर दमनचक्र चला रही है.

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First published: August 3, 2017, 6:07 PM IST
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