Bihar Assembly Election 2020: ग्रामीणों ने गांव के बाहर लगाया बोर्ड, लिखा- गांव में नेताओं का आना मना है

ग्रामीणों के द्वारा गांव के बाहर चुनाव बहिष्कार का लगाया गया बोर्ड.
ग्रामीणों के द्वारा गांव के बाहर चुनाव बहिष्कार का लगाया गया बोर्ड.

जिले के बसंतपुर हड़हड़ और विशुनपुर हड़हड़ जो कभी बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) के क्षेत्र में पड़ते थे. यहां के लोगों ने गांव में नेताओं (Leaders) के प्रवेश पर रोक लगा दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 17, 2020, 3:26 PM IST
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जहानाबाद. नेताओं (Leaders) की वादाखिलाफी और गांव में बिजली, पानी व सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के ना होने से परेशान ग्रामीणों (Villagers) ने इस बार के चुनाव में नेताओं को सबक सिखाने का मन बना लिया है. नेताओं की वादाखिलाफी से नाराज ग्रामीणों ने अपने गांव में नेताओं की इंट्री बैन कर दी है. इसके लिए ग्रामीणों ने बकायदा गांव के मुख्य मार्ग पर एक बोर्ड लगा दिया है, जिसमें चुनाव बहिष्कार (Election Boycott) के साथ ही लिखा है कि गांव में नेताओं का प्रवेश मना है.      

जहानाबाद जिला मुख्यालय से महज सात किलोमीटर दूर स्थित काको प्रखंड क्षेत्र के पिंजौरा पंचायत का बसंतपुर हड़हड़ और विशुनपुर हड़हड़ जो कभी बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के क्षेत्र में पड़ता था. इन दोनों गांव के लोगों ने अपने गांव में सड़क न बनने से नाराज होकर नेताओं के गांव में आने पर रोक लगा दी है. दोनों गांव के दर्जनों की संख्या में लोगों ने हाथों में बैनर-तख्ती लिए रोड नहीं तो वोट नहीं और नेताओं के गांव में ना आने का नारा लगाया.

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ग्रामीणों ने इस दौरान सरकार विरोधी नारे भी लगाए. उन्होंने बताया कि गांव से मुख्य सड़क जिसकी दूरी तकरीबन दो किलोमीटर है वो सड़क कच्ची है, जिससे ग्रामीणों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है. लोगों ने बताया कि सड़क के पक्कीकरण किये जाने के लिए बार-बार स्थानीय प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई. स्थिति यह है कि लोगों का सड़क पर पैदल चलना मुश्किल हो गया है. बरसात के दिनों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है. ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के सात दशक के बाद भी गांव में आज तक न तो किसी अधिकारी और न ही किसी जनप्रतिनिधि की नजर गई है. इसके कारण आक्रोशित ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव में वोट बहिष्कार और नेताओं के गांव ना आने देने का निर्णय लिया है.
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