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जहानाबाद लोकसभा सीट: रालोसपा से अलग हुए अरुण कुमार कितने प्रभावी होंगे

News18 Bihar
Updated: May 3, 2019, 3:08 PM IST
जहानाबाद लोकसभा सीट: रालोसपा से अलग हुए अरुण कुमार कितने प्रभावी होंगे
चुनाव प्रचार के दौरान वर्तमान सांसद अरुण कुमार

बिहार की जहानाबाद सीट पर इस बार समीकरण 2014 से बिल्कुल उलट हो गए हैं.

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बिहार की जहानाबाद सीट पर इस बार समीकरण 2014 से बिल्कुल उलट हो गए हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के तले राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के टिकट पर जीत हासिल करने वाले डॉ. अरुण कुमार इस बार अपनी पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में हैं. बीते लोकसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा से अनबन हो गई. उपेंद्र कुशवाह खुद भी अपनी पार्टी सहित खेमा बदल चुके हैं. अब वो आरेजडी की अगुवाई वाले विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हैं.

इस बार के चुनाव में एनडीए गठबंधन के तहत यह सीट जेडीयू के खाते में आई है. जेडीयू ने यहां इस बार एक नया प्रयोग किया है. सामान्य तौर पर यहां पर पार्टियां दो मजबूत जातियों, भूमिहार और यादव, के प्रत्याशियों को ही टिकट देती थीं. जेडीयू ने इस बार अतिपिछड़ा वर्ग से आने वाले चंदेश्वर कुमार चंद्रवंशी को टिकट दिया है. वहीं आरजेडी की तरफ से सुरेंद्र यादव को खड़ा किया गया है. पूरी लड़ाई को त्रिकोणीय बना रहे हैं डॉ. अरुण कुमार.

कौन हैं प्रत्याशी

एनडीए की तरफ से जेडीयू प्रत्याशी चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी पटना के रहने वाले हैं. पूर्व विधानपार्षद हैं. चंद्रवंशी पेशे से व्यापारी हैं और अतिपिछड़ा वर्ग से आते हैं. कहा जा रहा है कि जेडीयू की तरफ से चंद्रवंशी को खड़ा किए जाने की वजह से यहां बड़ी संख्या में मौजूद भूमिहार समुदाय में नाराजगी भी है. वहीं आरजेडी ने अपने पुराने चेहरे पर ही भरोसा जताया है. सुरेंद्र यादव यहां से पहले भी सांसद रह चुके हैं और लालू यादव के बेहद करीबियों में गिने जाते हैं. सुरेंद्र यादव गया जिले के रहने वाले हैं. और लालू सरकार में मंत्री भी थे. वहीं अरुण कुमार भूमिहार जाति से आते हैं और जिले में अपना अच्छा-खासा प्रभाव भी रखते हैं. इस वजह से यहां लड़ाई त्रिकोणीय होती दिख रही है.

आरजेडी प्रत्याशी सुरेंद्र यादव


सीट का इतिहास

इस सीट पर पहली बार हुए 1957 के चुनाव में सत्यभामा देवी चुनाव जीती थीं. 1962 के चुनाव में भी सत्यभामा देवी ही यहां से जीतकर संसद पहुंची थीं. उसके बाद 1977 के लोकसभा चुनाव में यहां से जनता पार्टी के हरि लाल प्रसाद सिन्हा जीते थे. 1980 के चुनाव में महेंद्र प्रसाद कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे. महेंद्र प्रसाद पेशे से कारोबारी हैं और वर्तमान समय में उन्हें देश के सबसे अमीर नेताओं में शुमार किया जाता है. वो दवा कंपनियों के मालिक हैं.1984 के चुनाव में जब इंदिरा गांधी की हत्या की वजह से पूरे देश में कांग्रेस की लहर चल रही थी उस चुनाव में जहानाबाद सीट पर कम्यनिस्ट पार्टी के रामाश्रय प्रसाद सिंह चुनाव जीते थे. रामाश्रय सिंह ने इस का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया. बेहद जमीनी तौर लोगों से जुड़ने के कारण लोगों ने उन्हें कई बार लोकसभा भेजा. रामाश्रय सिंह इस सीट पर लगातार 1984 से 1996 चार बार चुनाव जीते थे. 1998 के चुनाव में यहां पहली बार सुरेंद्र प्रसाद यादव चुनाव जीते थे. 1999 डॉ. अरुण कुमार जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीते थे. 2004 में आरजेडी के गणेश सिंह जीते तो 2009 में जेडीयू के जगदीश शर्मा सांसद बने. 2014 के चुनाव में डॉ. अरुण कुमार फिर सांसद बने थे.

जेडीयू के उम्मीदवार चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी


2014 के नतीजे

2014 के लोकसभा चुनाव में यहां आरजेडी के टिकट पर सुरेंद्र यादव खड़े थे. वो करीब 2 लाख 80 हजार वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे. आरएलएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अरुण कुमार 3,22,647 वोट लेकर चुनाव जीते थे. कुल वोट 811516 पड़े थे. कुल मतदान 57 प्रतिशत हुआ था.

सामाजिक समीकरण

यहां पर भूमिहार और यादव जाति की निर्णायक जनसंख्या है. जहानाबाद संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- अरवल, कुरथा, जहानाबाद, घोसी, अतरी और मकदूमपुर. करीब ढाई लाख भूमिहारों और करीब 3 लाख यादवों वाली इस लोकसभा में मुख्य रूप से इन्ही दो जातियों का प्रभाव रहता है. जहानाबाद बिहार के उन जिलों में गिना जाता है जहां 90 के दशक में जातीय हिंसा बड़ा प्रभाव था.

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First published: May 2, 2019, 8:44 PM IST
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