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'ठाकुरबाड़ी' का डर बना पूरे गांव का प्‍याज से दूरी का कारण, 40 साल पहले हुआ था ऐसा

Ragib ahasan | News18 Bihar
Updated: November 12, 2019, 6:11 PM IST
'ठाकुरबाड़ी' का डर बना पूरे गांव का प्‍याज से दूरी का कारण, 40 साल पहले हुआ था ऐसा
40 साल से किसी नहीं खाया प्‍याज-लहसुन.

भले ही प्याज (Onion) की बढ़ती कीमत ने देशभर में हाहाकार मचा दिया हो, लेकिन जहानाबाद (Jehanabad) के हुलासगंज प्रखंड के त्रिलोकी बिगहा (Triloki Bigha) गांव के लोगों पर इसका कोई असर नहीं है. जानिए क्‍यों?

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जहानाबाद. भले ही प्याज (Onion) की बढ़ती कीमत ने लोगों के आंसू निकाल दिए हों, लेकिन बिहार के जहानाबाद (Jehanabad) का एक ऐसा गांव है जहां प्याज की कीमत बे-मानी है. जी हां, हुलासगंज प्रखंड के त्रिलोकी बिगहा (Triloki Bigha) गांव के लोगों का प्याज और लहसुन से कोई मतलब नहीं है. साफ है कि वो ना तो प्याज-लहसुन खरीदते हैं और ना ही गांव में लेकर आते हैं. यकीनन इस गांव के लोगों पर प्‍याज-लहसुन की महंगाई का कोई असर नहीं है.

खास पहचान रखता है ये गांव
जहानाबाद के हुलासगंज प्रखंड के त्रिलोकी बिगहा गांव के लोग प्याज और लहसुन से उतनी ही दूरी बनाए रखते हैं, जैसे यह आजकल आम लोगों की रसोई से महंगाई के कारण दूर होती जा रही है. 25 घरों की आबादी वाले इस गांव को यादवों का टोला के रूप में भी जाना जाता है. इस गांव में कोई भी ऐसा घर नहीं हैं, जहां प्याज और लहसुन की खरीदारी की जाती है. हैरानी की बात ये है कि इस गांव के लोग बाहर जा कर भी लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करते हैं.

गांव की सुबरती देवी ने बताया कि उनकी खुद की उम्र 75 वर्ष से ज्‍यादा हो चुकी है, उस वक़्त से आज तक गांव के लोग प्याज और लहसुन के साथ-साथ मांस मदिरा से भी दूर रहते हैं.

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जहानाबाद के त्रिलोकी बिगहा गांव में कोई नहीं खाता प्‍याज.


प्‍याज और लहसुन से दूरी का ये है कारण
गांव में प्याज और लहसुन पर अघोषित प्रतिबंध के पीछे का भी एक कारण है. ग्रामीणों के अनुसार उनके गांव में एक ठाकुर जी का मंदिर है. उसकी आस्था और गांव में प्याज खा कर हुई दुर्घटना से ग्रामीणों ने प्याज से तौबा कर ली. ग्रामीणों के अनुसार पुरखों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को आज से 40 वर्ष पूर्व कुछ लोगों ने तोड़ने की कोशिश भी की थी, लेकिन उनके साथ हुए हादसों ने सभी ग्रामीणों की हिम्मत तोड़ दी.
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इसे ग्रामीणों की अपने ठाकुरबाड़ी में आस्था है या अंधविश्वास. परंतु कई पीढ़ी से गांव में प्याज सहित मांस मदिरा पर लगाया गया अघोषित प्रतिबंध का ग्रामीण आज भी पालन कर रहे हैं.

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First published: November 12, 2019, 6:09 PM IST
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