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सरकारी दावों की पोल खोल रही है श्रीकृष्ण गौशाला, इस वजह से 2 दिन भूखे रहते हैं पशु

Ragib ahasan | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 15, 2019, 4:45 PM IST
सरकारी दावों की पोल खोल रही है श्रीकृष्ण गौशाला, इस वजह से 2 दिन भूखे रहते हैं पशु
चंदे के सहारे चल रही है जहानाबाद की श्रीकृष्ण गौशाला. (सांकेतिक फोटो)

नीतीश सरकार सूबे की सभी गौशालाओं (Gaushalas) के बेहतर रख रखाव का दावा करती है, लेकिन करीब 100 वर्ष से संचालित जहानाबाद (Jehanabad) की श्रीकृष्ण गौशाला (Shri Krishna Gaushala) सिर्फ चंदे के बल पर चल रही है.

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जहानाबाद. राज्य सरकार सूबे की सभी गौशालाओं (Gaushalas) के बेहतर रख रखाव का दावा करती है, लेकिन 100 वर्ष पूर्व से संचालित जहानाबाद (Jehanabad) की श्रीकृष्ण गौशाला (Shri Krishna Gaushala) सरकारी दावों से अलग है. यह गौशाला में खुद स्थानीय लोगों द्वारा दिये गए दान और इकट्ठे किये गए चंदे से संचालित हो रही है. पिछले वर्ष तकरीबन 35 गौवंश की मौत की गवाह बनी इस गौशाला में कभी-कभी चंदे की राशि इकट्ठी न होने या फिर दान न मिलने से गायों (Cows) को भी दो-दो दिनों तक भूखा रहना पड़ता है.

ऐसी है श्रीकृष्‍ण गौशाला
जहानाबाद का श्री कृष्ण गौशाला दो एकड़ में फैली हुई है, जिसमें तकरीबन 90 की संख्या में गाय, बैल और भैंस मौजूद हैं, लेकिन इतनी संख्या में पशुओं को रखने के लिए यहां व्यवस्था मौजूद नहीं है. फिलहाल पूरी तरह से आम लोगों द्वारा चंदे की रकम से यहां रहने वाले पशुओं के खाने और रहने का इंतजाम किया जाता है. गौशाला के व्यवस्थापक मयंक मौलेश्वर (उपाध्यक्ष, श्रीकृष्ण गौशाला) ने बताया कि सरकार द्वारा गौशाला के विकास के लिए तकरीबन 20 लाख रुपये दिए गए हैं, लेकिन इन पैसे का उपयोग सिर्फ विकास कार्यों में करना है ना कि मवेशियों के रख रखाव पर.

गौशाल सचिव ने कही ये बात

इस संबंध में गौशाला के सचिव प्रकाश मिश्रा ने बताया कि मवेशियों की संख्या के मुताबिक शेड की संख्या कम है, वहीं कुछ समस्या मवेशियों के रोज के खर्च पर है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गौशाला के विकास के लिए कुछ पैसे भी दिए गए हैं, लेकिन वो पैसो मवेशियों के चारे और उनके रहने पर खर्च नहीं किये जा सकते हैं. ऊपर से पहले जो गल्ला व्यवसायी गौशाला के नाम पर टैक्स देते थे, अब उनकी भी संख्या कम होती जा रही है और इससे गौशाला के लिए कलेक्शन कम होता जा रहा है. उन्होंने बताया कि स्थानीय विधायक और विभाग द्वारा मदद किये जाने से गौशाला में बहुत बदलाव आया है. हालांकि गायों के रख रखाव की समस्या वैसी की वैसी ही है.

जबकि इस गौशाला में कार्य करने वाले श्रीकांत ने बताया कि गौशाला की आर्थिक स्थिति के कारण उनका मानदेय भी चार से पांच महीनों तक बाकी रहता है.

अब सुधरेगी हालत
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बहरहाल, गौशाला की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए एल्केम फार्मा की ओर से गौशाला की ज़मीन पर मार्केट बना कर उसको आत्म निर्भर बनाने की कोशिश की गई है. संभव है कि आने वाले समय में ये मार्केट गौशाला के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी.

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First published: November 15, 2019, 4:45 PM IST
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