गौशाला में बदल गया बिहार का पहला अक्षय ऊर्जा सोलर माइक्रो ​ग्रिड, जानिए कैसे ध्वस्त हुआ नीतीश का ड्रीम प्रोजेक्ट

बर्बाद हुआ बिहार का पहला अक्षय ऊर्जा सोलर माइक्रो​ ग्रिड, जहां से रोशन होते थे गांव वहां अब जानवरों का बसेरा

जहानाबाद जिले में मखदूमपुर प्रखंड का धरनई गांव को जगमग करने वाला सूबे का पहला अक्षय ऊर्जा सोलर माइक्रो ग्रिड अब इतिहास के पन्नो में दर्ज होता जा रहा है.पिछले कई वर्षों से बंद पड़े सोलर ग्रिड अब पशुओं को बांधने वाली गौशाला बन चुका है.

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जहानाबाद. कभी सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत जहानाबाद (jehanabad) जिला का मखदूमपुर प्रखंड के धरनई गांव सौर ऊर्जा से जगमग होता था, परंतु सही रख रखाव न होने से सूबे का पहला अक्षय ऊर्जा सोलर माइक्रो ग्रिड अब इतिहास के पन्नो में दर्ज होता जा रहा है. हालात यह हैं की पिछले कई वर्षों से बंद पड़े सोलर ग्रिड अब पशुओं को बांधने वाली गौशाला बन चुका है.

जहानाबाद और गया ज़िला की सीमा पर बसे धरनई गांव में बिजली न रहने पर ग्रीन पीस संस्था द्वारा सन 2013 में सोलर पावर ग्रिड की स्थापना की गई थी. जिसके तहत गांव के कई सरकारी भवन और स्कूल की छतों पर सोलर प्लेट के माध्यम से ग्रिड में रखी बैटरी को चार्ज किया जाता था. इसके बाद धरनई पंचायत के विशुनपुरा, धरनई और झिटकोरिया गांव के लगभग 450 घरों में बिजली सप्लाई के साथ साथ हर गली और चौराहों पर स्ट्रीट पोस्ट लगा कर रोशन किया जाता था. वर्ष 2013 में इस सोलर पावर ग्रिड का उद्घाटन करने आये सीएम नीतीश कुमार ने इस मॉडल की तारीफ करते हुए इसे वरदान बताया था.

अपने स्थापना काल के बाद लगातार तीन वर्षों तक बेहतर काम करने के बाद वर्ष 2017 से इस ग्रिड की स्थिति खराब होती गयी. अंततः रख रखाव न होने और गांव में बिजली आ जाने की वजह से सूबे के इस पहले सोलर ग्रिड जो गांव के हर घर और गलियों को रोशन करता था अब गौशाला में बदल गया है.

यहां पहुंचने पर हर गली में खराब हो चुकी सोलर स्ट्रीट पोस्ट और ग्रिड से घरों तक आपूर्ति के लिए लगाए गए तार अभी भी टंगे हुए हैं, परंतु यह सब भी सिर्फ उन दिनों की याद ताजा करते है. जब गांव में बिजली नहीं पहुंची थी परंतु यह पूरा इलाका सौर ऊर्जा से जगमग होता था. ग्रामीणों ने बताया कि इस ग्रिड से मात्र दो रुपये यूनिट उन्हें बिजली मिल जाया करती थी और गांव में इन्वर्टर का भी कोई काम नहीं पड़ता था.

बताते चले की सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में लगाये गए इस अक्षय ऊर्जा माइक्रो ग्रिड में 280 सोलर प्लेट से 315 से 385 यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाता था. जिसको स्टोर करने के लिए 224 बैटरी का इस्तेमाल किया जाता था. परंतु वर्ष 2018 के बाद सही रख रखाव न होने और ग्रीन पीस संस्था के उदासीन हो जाने से यह कभी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना यह सोलर ग्रिड तबेला और गाड़ियों के कबाड़ रखने की जगह बन गया है.

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