पुलिस जवान ने उठाया तीन माह की बच्ची की परवरिश का जिम्मा
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पुलिस जवान ने उठाया तीन माह की बच्ची की परवरिश का जिम्मा
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बिहार पुलिस के इस जवान की आज हर कोई प्रशंसा कर रहा है. जिले भर में मनीष के इस सामाजिक पहल की चर्चा हो रही है.

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बेटी बचाओ अभियान पर सही मायने में पहल तो कैमूर पुलिस के इस जवान ने किया है. जवान ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र अधौरा के दुग्धा गांव में तीन माह की बच्ची की मां की मौत हो जाने के बाद उसकी परवरिश की जिम्मेदारी ली है. बच्ची के परिवार की आर्थिक स्थिती ठीक नहीं होने से वह इस बच्ची को पालना नहीं चाहते थे. पुलिस जवान मनीष को जब इस बात की जानकारी मिती तो उन्होंने उस बच्ची की पढ़ाई से लेकर शादी तक की जिम्मेदारी दे ली.

मनीष कैमूर के नक्सल अभियान एएसपी का बॉडीगार्ड है, जो अपनी ड्यूटी के बाद अक्सर सामाजिक कार्य करता है और असहायों की मदद करता है. आज कैमूर जिले में मनीष के इस पहल के लिए पुलिस के सभी जवान भी खुश हैं और उसे बधाई दे रहे हैं.

कैमूर जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. पुलिस जवान के इस पहल की आज हर तरफ चर्चा हो रही है. बच्ची के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण मनीष ने बच्ची के परवरिश की जिम्मेदारी उठा ली. मनीष के दोस्तों का भी कहना है कि वह अक्सर सामाजिक कार्य करता है और असहायों की मदद करता है. मनीष का यह सराहनीय प्रयास है.



पुलिस और नस्सलियों के बीच छत्तीस का आंकड़ रहता है. उस नक्सल क्षेत्र में जाकर वनवासियों की बच्ची की परवरिश की जिम्मेदारी लेना अपने आप में काबिले तारीफ है. मनीष के सामाजिक कार्य करने के जज्बे ने ना सिर्फ एक बच्ची को नई जिंदगी दी है, बल्कि समाज को एक संदेश भी दिया है.
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