Lockdown: 30 मजदूरों ने 2.10 लाख चंदा जुटाया और चेन्नई से बस लेकर पहुंच गए बिहार, खाया भरपेट खाना
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Lockdown: 30 मजदूरों ने 2.10 लाख चंदा जुटाया और चेन्नई से बस लेकर पहुंच गए बिहार, खाया भरपेट खाना
चंदा जुटाकर चेन्नई से कैमूर पहुंचे मजदूरों को जिला प्रशासन ने उनकेृ गृह प्रखंड पहुंचवाया.

कैमूर जिले के अधौरा प्रखंड (Adhara block of Kaimur district) के रहने वाले प्रवासी मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन (Lockdown) में काम बंद हो जाने के कारण खाना खाने में काफी परेशानी होती थी, पैसे भी खत्म होने लगे थे.

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कैमूर. लॉकडाउन (Lockdown) में बिहार के बाहर फंसे प्रवासी मजदूरों (migrant workers) का आना लगातार जारी है. कोई पैदल तो कोई वाहन से पहुंच रहे हैं. इसी क्रम में 30 मजदूर चेन्नई से कैमूर (Chrnnai To Kaimur) पहुंचे तो उन्होंने अपनी आपबीती न्यूज 18 को बताई.  इन्होंने अपनी बेबसी बताते हुए कहा कि जब कोई रास्ता नहीं मिला तो हमने मिलकर 2.10 लाख रुपये में किराये पर बस लिया फिर अपने घर पहुंच सके. मजदूरों ने बताया कि आज अपने जिले में पहुंचकर सुकून महसूस हो रहा है क्योंकि भभुआ पहुंचते ही समाजसेवियों ने खाना खिलाया और प्रशासन भभुआ से अधौरा तक बस से भिजवाने का इंतजाम भी किया.

मंत्री-सांसद ने नहीं की कोई मदद
कैमूर जिले के अधौरा प्रखंड के रहने वाले प्रवासी  मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन में काम बंद हो जाने के कारण खाना खाने में काफी परेशानी होती थी, पैसे भी खत्म होने लगे थे. इस दौरान बिहार सरकार से लेकर अपने क्षेत्र के मंत्री बृज किशोर बिंद, सांसद छेदी पासवान से भी गुहार लगाई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. ये भी नहीं बताया गया कि वहां से बिहार वापस कैसे आया जाए. कई बार बिहार आने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया गया पर कोई सूचना नहीं मिली तो हमने किराये पर बस लेने का फैसला किया.

सात हजार कर्ज लेकर पहुंच सके घर



मजदूरों ने बताया कि पहले तो बसवाले से बात कर किराया तय किया फिर बसवाले ने बिहार आने के लिए पास बनवाया. एक मजदूर रामचन्द्र सिंह का कहना कि पैसे खत्म हो गए थे, घर आना भी था, ऐसे में कुछ समझ में नहीं आता था कि क्या किया जाये. अपने साथ काम करनेवाले दोस्त से 7 हजार रुपया मदद लेकर बस भाड़ा दिये जिससे घर पहुंच पाए हैं. अब घर पर ही सात हजार रुपये वापस करना होगा.



बंद हो गया था सारा काम-काज
वहीं,गोपाल सिंह नाम के मजदूर का कहना है कि लॉकडाउन लगते ही काम बंद हो गया. काम बंद होने से पैसे भी नहीं मिल रहे थे. कमाई का जो पैसे बचे थे उसी से खाना पानी का जुगाड़ होता था. अपने जिले के 30 की संख्या में मजदूर चेन्नई में थे. आपस में बात किये कि सबने चंदा किया.

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