दिल्ली से कोलकाता को जोड़ने वाले NH 2 पर कभी भी लग सकता है ब्रेक, जानें वजह

बिहार के कर्मनाशा नदी पर बना पुल

NH-2: पूरा मामला बड़े वाहनों से जारी ओवरलोडिंग से जुड़ा हुआ है. पुल के टूटने के बाद एनएचएआई ने मरम्मती कराने के साथ ही तीन जिलों के डीएम को इस समस्या को दूर करवाने के लिए पत्र लिखा है.

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कैमूर. दिल्ली से कोलकाता को जोड़ने वाले एनएच 2 (NH-2) पर कभी भी ब्रेक लग सकता है. दरअसल कैमूर के एनएच 2 कर्मनासा नदी पर बना अस्थायी स्टील ब्रिज जर्जर हो गया है जो कभी भी टूट सकता है. नदी पर बने पुल को दुरुस्त तो कर लिया गया है लेकिन एनएचएआई ने वाहनों को चलाने से रोक लगा दिया है.

तीन जिलों के डीएम को लिखा पत्र

अधिकारियों का कहना है कि पहले प्रशासन ओवर लोडिंग बालू पर रोक लगाए तभी हम गाड़ियों को जाने देंगे. एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने इसको लेकर कैमूर रोहतास और औरंगाबाद डीएम को पत्र भेजकर फिर एक बार आगाह किया कि जब तक ओवर लोडिंग वाहन नहीं रुकेगा तो पुल डैमेज होते रहेगा.

एक साल पहले भी आया था दरार

बता दें कि एक साल पहले एनएच2 कर्मनासा नदी पर बना पुल का एक पाया में दरार आने से तत्काल वाहनों को पुल से पार करने पर रोक लगा दिया था, जिससे दो माह तक बिहार उत्तर प्रदेश से सम्पर्क टूट गया था फिर पुल का दो ओर डायवर्सन बना गया गया जिसमें 16 करोड़ का लागत लगा. इसके बाद स्टील ब्रिज बनाया गया जिसमें 8 करोड़ का खर्च आया.

ओवर लोडिंग है मुख्य वजह

स्टील ब्रिज बनने के साथ एनएचएआई ने बिहार और उत्तर प्रदेश सरकार को आगाह किया कि आप ओवर लोडिंग बालू वाले ट्रक पर रोक लगाए क्योंकि स्टील ब्रिज की क्षमता 50 से 60 टन का भार सहन कर सकता है उसके बाद भी लगातार ओवर लोडिंग वाहन चलते रहे जिससे 6 माह में ही स्टील ब्रिज कई जगह टूट गया उसी पर वाहन जा रहा कभी भी बड़ा हादसा होने की सम्भावना बनी है.

कांग्रेस ने उठाए सवाल

दूसरी तरफ मामला यह भी है 2010 में करोड़ो के लागत से बना नदी पर पुल 9 साल में कैसे टूटा तो वही एनएचएआई ने ओवर लोडिंग का हवाला देते हुए मात्र एक साल में नदी पर पुल और मरमती, स्टील ब्रिज, डायवर्सन पर 34 करोड़ खर्च कर डाला. इस समस्या को लेकर अब बिहार सरकार के खिलाफ राजनीति भी गर्म होने लगी है. कैमूर जिले के कोंग्रेस नेताओं ने डीएम ,एनएचएआई, बिहार सरकार से जल्द ओवर लीडिंग पर रोक लगाने और परिचालन बहाल करने को कहते हुए ऐसा नहीं होने पर एनएच 2 पर आंदोलन की धमकी दे डाली है.

क्या कहते है एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर

एनएचएआई के योगेश गढ़वाल का कहना है कि जो पुल डैमेज हुआ था उसको नए सिरे से बनाया गया जिसमें 6 माह का समय लगा अभी पुल पर क्षमता के अनुसार वाहन जा सकता है पर प्रशासन को ओवर लोडिंग पर रोक लगाना होगा नहीं तो हम पुराने पुल जिसकी मरमती कराई गई है उस पर वाहन चलाने नहीं देंगे. एनएचएआई ने पहले भी बिहार और उत्तर प्रदेश सरकार की आगाह किया था कि बालू वाहन के ओवर लीडिंग रोकी जाए पर एनएच 2 पर कई विभाग बालू माफियाओं से मिलकर बालू पार कराते रहे जिससे सरकार को करोड़ो का नुकसान होता है.

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