मिसाल: बिहार के इस गांव में हिंदू मनाते हैं मुहर्रम, 100 साल से निभा रहे पूर्वजों का किया वादा

News18 Bihar
Updated: September 10, 2019, 8:05 AM IST
मिसाल:  बिहार के इस गांव में हिंदू मनाते हैं मुहर्रम, 100 साल से निभा रहे पूर्वजों का किया वादा
बिहार के कटिहार जिले के एक गांव महमदिया हरिपुर में हिंदू सजाते मुहर्रम का अखाड़ा, सौ वर्षों से कायम है यह परंपरा.

मुहर्रम (Muharram) के दौरान हिंदू समुदाय के लोग झरनी गाते हैं और मजार पर चादरपोशी भी करते हैं. हिंदु बहुल महमदिया हरिपुर (Mahmadia Haripur) गांव की महिलाएं भी इसमें शामिल होती हैं.

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कटिहार. यहां के हसनगंज प्रखंड (Hasanganj Block) के जगरनाथपुर पंचायत का हरिपुर गांव साम्प्रदायिक सौहार्द (Communal Harmony) की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है. अपने पूर्वजों द्वारा किए गए वादे को निभाने के लिए आज भी हसनगंज के महमदिया हरिपुर में हिंदू समुदाय (Hindu Community) के लोग मुहर्रम (Muharram ) मनाते हैं. इसको लेकर करीब 1200 की हिंदू आबादी वाला यह गांव आज भी सुर्खियों में है.बताया जाता है कि इस गांव का हिंदू समुदाय सौ वर्षों से भी अधिक समय से नियम और निष्ठा के साथ मुहर्रम मनाते आ रहे हैं. मुहर्रम को लेकर सभी रीति और परंपराओं का भी बखूबी पालन किया जाता है.

100 सालों से कायम है परम्परा
इमाम हुसैन का जयकारा और निशान खड़ा करने के साथ फातिहा भी पढ़ा जाता है. इस दौरान हिंदू समुदाय के लोग झरनी गाते हैं और मजार पर चादरपोशी भी करते हैं. सबसे खास कि मुहर्रम में बड़ी संख्या में हिंदू महिलाएं भी शामिल होती हैं. बता दें कि महमदिया हरिपुर गांव में स्थित स्व. छेदी साह का मजार है. इस गांव में तकरीबन सौ वर्षों से मुहर्रम मनाने की परंपरा चली आ रही है.

Katihar Muharram
पूर्वजों द्वारा किए गए वादे को निभाने के लिए हिंदू समुदाय के लोग वर्षों से मुहर्रम मनाते आ रहे हैं.


पूर्वजों ने वकील मियां से किया था वादा
स्थानीय ग्रामीण मनोज मंडल कहते हैं कि वकील मियां नाम के शख्‍स इस गांव में रहते थे. उनके पुत्र की किसी बीमारी से मौत हो गई थी. इससे दुखी होकर उन्होंने गांव ही छोड़ दिया, जाते वक्त उन्होंने छेदी साह को इस वादे के साथ अपनी जमीन दे दी थी कि उनके चले जाने के बाद भी ग्रामीण मुहर्रम मानते रहेंगे. मनोज की मानें तो पूर्वजों द्वारा किए गए इस वादे को निभाने के लिए हिंदू समुदाय के लोग मुहर्रम मनाते आ रहे हैं.

मुहर्रम से गांव में सुख-समृद्धि
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लगभग 100 सालों से भी अधिक समय से यह परंपरा बदस्तूर जारी है. ग्रामीण कहते हैं कि यह परंपरा आगे भी जारी रखेंगे. गांव के एक अन्‍य निवासी शंकर लाल साह कहते हैं कि पूर्वजों द्वारा किए गए वादे को निभाते हुए मुहर्रम मनाने से इस गांव में सुख, शांति और समृद्धि है.

पूरे गांव में घुमाया जाता है ताजिया
ग्रामीण अर्जुन साह ने बताया कि मुहर्रम से जुड़ी रीतियों के बारे में बताते हुए कहा कि सप्तमी के दिन यहां उत्‍सव का माहौल होता है. फिर निशान खड़ा किया जाता है, उसके बाद फातिहा पढ़ने के साथ चार दिनों तक पूजा करते हुए ताजिया निशान को गांव में घुमाया जाता है.

Katihar Muharram
आसपास के कई गांवों में मुस्लिम आबादी नहीं है.


आसपास कोई मुस्लिम गांव नहीं
बता दें कि करीब 1200 आबादी वाले हिन्‍दू बहुल गांव और इसके आसपास कई किलोमीटर तक कोई भी मुस्लिम परिवार नहीं है, लेकिन पूर्वजों द्वारा किया गए वादे को निभाते हुए मुहर्रम मनाने की यह परंपरा आज भी जारी है. स

(कटिहार से सुब्रत गुहा की रिपोर्ट)

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First published: September 10, 2019, 7:39 AM IST
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