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Balrampur Election Results 2020: बलरामपुर से CPI-ML के महबूब आलम जीते

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election Result 2020) में बलरामपुर विधानसभा सीट (Balrampur Assembly seat) पर सीपीआई-एमएल के उम्मीदवार महबूब आलम ने जीत दर्ज की. उन्होंने विकासशील इंसान पार्टी के उम्मीदवार बरुण कुमार झा को 53597 मतों से हराया.

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कटिहार. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election Result 2020) में बलरामपुर विधानसभा सीट (Balrampur Assembly seat) पर सीपीआई-एमएल के उम्मीदवार महबूब आलम ने जीत दर्ज की. उन्होंने विकासशील इंसान पार्टी के उम्मीदवार बरुण कुमार झा को 53597 मतों से हराया.

कटिहार लोकसभा क्षेत्र की सातों विधानसभा सीटों में जिला मुख्यालय से सबसे दूरी पर बंगाल से सटा बलरामपुर विधानसभा है. परिसीमन से पहले इस विधानसभा की पहचान बारसोई विधानसभा के रूप में हुआ करती थी, पर अब यह बलरामपुर विधानसभा के नाम से जाना जाता है. ताज़ा आंकड़ों के आधार पर यहां की कुल जनसंख्या 6 लाख 99 हजार 375 है, जिसमें पुरुषों की संख्या 3 लाख 53 हजार 106 और महिला की संख्या 3 लाख 46 हजार 269 है. वहीं मतदाताओं की अगर बात करें तो कुल मतदाता की संख्या 3 लाख 18 हजार 681 है.

यह भी पढ़ें: बिहार चुनाव नतीजे LIVE: रुझानों में BJP सबसे बड़ी पार्टी, NDA बहुमत के पार

बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र में पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 लाख 69 हजार 126 है. जबकि महिला वोटर्स की संख्या 1 लाख 49 हजार 547 है. बिहार विधानसभा के इस सीट पर अक्सर भाकपा माले का दबदबा रहा है और महबूब आलम यहां से तीन बार जबकि महबूब आलम के भाई मुनाफ आलम एक बार भाकपा माले के टिकट पर ही इस सीट से विधायक बन चुके हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव में भी भाकपा माले के महबूब आलम अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के वरुण झा को 20 हजार 419(10.51 प्रतिशत) वोटों से पराजित किया था. महबूब आलम को कुल 62513 जबकी बरुण झा को 42094 वोट मिला था. वोटिंग प्रतिशत के मामले में भी साल 2015 में यहां 66.24 मतदान हुआ था.

जातिगत समीकरण
जातिगत आंकड़ों की अगर बात करें तो ये विधानसभा बिहार के सबसे अधिक अल्पसंख्यक में मुस्लिम बहुल मतदाता के लिए पहचान रखती है. यहां अल्पसंख्यकों की आबादी लगभग 72% से भी अधिक होने की दावा किया जाता है. बंगाल से सटे होने के कारण इस विधानसभा में बंगाली संस्कृति की प्रभाव देखा जाता है और तीन से चार प्रतिशत बंगाली समुदाय के लोग आज भी इस विधानसभा में हैं.

विकास का इंतजार
महानंदा नदी के कारण कुछ इलाकों में बाढ़ के समस्या के साथ-साथ, नगर पंचायत घोषित होने के बाद भी अब तक उस तरह का विकास बलरामपुर में हो नहीं पाया है. इसके साथ ही शिक्षा के मामले में भी अब भी यही इलाका बेहद पिछड़ेपन का शिकार है. जिला मुख्यालय से लंबी दूरी के साथ-साथ मुख्यालय से सड़क संपर्क अब भी बेहतर नहीं हो पाया है, इसीलिए बाजार के मामले में अधिकतर लोग आज भी बंगाल पर ही आश्रित होते हैं. वहीं रेल संपर्क के मामले में दिल्ली-गुवाहाटी और गुवाहाटी-कोलकाता रूट रेल रूट के प्रमुख स्टेशनों में बारसोई स्टेशन की पहचान है. स्थानीय लोग कहते हैं की पूरा इलाका कृषि पर आश्रित है, मगर अब तक न तो कृषि व्यवस्था इस इलाके में आधुनिक हो पाई है और ना ही सड़क संपर्क विकसित हो पाया है. जिस कारण आज भी बड़े पैमाने पर मजदूर अन्य प्रदेशों से काम के लिए यहां से बाहर जाते हैं.

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