बिहार चुनाव 2020: कटिहार में BJP को चौका लगाने का इंतजार, यहां किसकी बनेगी 'सरकार'?

कटिहार सीट से बीजेपी को लगातार जीत मिल रही है.
कटिहार सीट से बीजेपी को लगातार जीत मिल रही है.

कभी पूर्णिया प्रमंडल के हिस्सा रहे कटिहार (Katihar) में पुराने दिन से ही रेल सेवा काफी विकसित रही है. कटिहार रेल मंडल को उत्तर भारत (North India) का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 20, 2020, 12:18 PM IST
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कटिहार. बिहार चुनाव (Bihar Assembly) में कटिहार (Katihar) की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है. कटिहार लोकसभा क्षेत्र में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं. इसमें कटिहार नगर, कदवा, बलरामपुर, कोढ़ा, मनिहारी, प्राणपुर और बरारी है. बात कटिहार नगर के विधानसभा की करें तो राजनीति के साथ ही इस सीट का इतिहास भी रोचक है. इस जिला के नामकरण का इतिहास रोचक है. कटिहार जिले के नामकरण के पीछे भी कई दिलचस्प कहानियां हैं. बताया जाता है जब मां पार्वती (सती) को शंकर भगवान कंधे पर लेकर जा रहे थे, तब माता की कमर का हार इसी शहर में गिरा था. तब से इस जिला के नाम कटिहार है.

कभी पूर्णिया प्रमंडल के हिस्सा रहे कटिहार (Katihar) में पुराने दिन से ही रेल सेवा काफी विकसित रही है. कटिहार रेल मंडल को उत्तर भारत (India) का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है, मगर बंगाल से सटे इस जिले का जो विकास होना चाहिए था, वह शायद अब तक नहीं हो पाया है. खासकर नगर क्षेत्र में इसे लेकर लोगों के बीच कुछ मुद्दे पर नाराजगी भी है. बिहार में कटिहार विधानसभा के साल 2015 के चुनावी आंकड़ों पर ध्यान दें तो पोलिंग के मामले में पूरे बिहार में अक्सर अव्वल रहने वाले कटिहार में साल 2015 में भी 63.30 प्रतिशत वोटिंग हुई थी.  जहां तक पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो 22 उम्मीदवारों ने कटिहार सीट से चुनाव लड़े थे. तब महागठबंधन में जदयू शामिल था. इसीलिए राजनीतिक समीकरण कुछ अलग थे और चुनावी नतीजे पर भी इसका असर दिखा दिया था. इस बार बीजेपी जीत के साथ चौका लगाने की तैयारी कर रही है.

अल्पसंख्यक वोर्ट निर्णायक
कटिहार जिले के सातों विधानसभा में अल्पसंख्यक वोट निर्णायक होते हैं. कटिहार नगर में भी अल्पसंख्यक वोट लगभग 20 से 22 प्रतिशत होने की दावा किया जाता है. एमवाई समीकरण के बावजूद यहां बनिया बहुल आबादी बहुत अधिक है, जिस कारण अधिकतर पार्टी इस जाति के उम्मीदवार को ही यह प्राथमिकता देते हैं और ऐसा करने के कारण ही लगातार तीन बार से बीजेपी इस सीट पर अपना कब्जा जमाए हुए हैं. 5 नवंबर 2015 को हुए चुनाव और 8 नवंबर को आए चुनावी नतीजे में कटिहार के भाजपा प्रत्याशी तार किशोर प्रसाद अपने निकटतम प्रतिद्वंदी जदयू के विजय सिंह को 14 894 मतों से मात दिया था, बीजेपी उम्मीदवार को 66048 और जदयू उम्मीदवार को 51154 वोट मिला था हार जीत का अंतर 9.76 प्रतिशत(14894 वोट)था.
ये हैं चुनावी मुद्दे


कटिहार नगर में जहां तक इस बार मुद्दे की बात है तो अब तक कटोरा नुमा इस शहर में जलजमाव, जल निकासी के पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाना, शहर में जाम और अतिक्रमण के बावजूद इसका स्थाई निदान न होना के साथ-साथ कभी औद्योगिक नगरी के रूप में पहचान रखने वाले कटिहार में एनजेएमसी द्वारा संचालित आर बी एच एम जूट मिल 4 सालों से बंद रहना प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं और राजद इन मुद्दों के सहारे अपनी संभावना टटोलने में लगा हुआ है कि भाजपा के गढ़ कहे जाने वाले कटिहार नगर सीट पर कैसे पुनः वापसी किया जाए.

मतदाताओं को आंकड़े
कटिहार नगर में कुल मतदाता 2 लाख 63 हजार 319 हैं. इसमें पुरुष मतादाता 1 लाख 38 हजार 508, महिला मतदाता 1,24,802 व 9 थर्ड जेंडर मतदाता हैं. जबकि पिछले चुनाव में कुल वोटर- 153474 थे. पिछले चुनाव में हार-जीत का अंतर-14894(9.76 प्रतिशत) था. पिछले चुनाव में बीजेपी के तारकिशोर प्रसाद जीते थे. दूसरे नंबर पर जदयू के बिजय सिंह दूसरे नंबर पर हैं.

कटिहार से कब-कब कौन-कौन जीता
2015: तार किशोर प्रसाद- बीजेपी
2010: तार किशोर प्रसाद- बीजेपी
2005: तार किशोर प्रसाद- बीजेपी
2000: डॉ. रामप्रकाश महतो- राजद
1995: जगबंधु अधिकारी बीजेपी
1990: रामप्रकाश महतो- जनता दल
1985: सत्यनारायण प्रसाद- कांग्रेस
1980: सीताराम चमरिया- कांग्रेस
1977: जगबंधु अधिकारी जनता पार्टी
1972: राज किशोर सिंह- कांग्रेस
1969: सत्यनारायण विश्वास- कांग्रेस
1967: जगबंधु अधिकारी- जनसंघ
1962: सुखदेव नारायण सिंह -कांग्रेस
1957: सुखदेव नारायण सिंह -कांग्रेस
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