तोते की मौत पर किया था श्राद्ध कर्म अब एक साल बाद हिंदू विधि-विधान से कराई बरसी
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तोते की मौत पर किया था श्राद्ध कर्म अब एक साल बाद हिंदू विधि-विधान से कराई बरसी
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कटिहार के रहने वाले मनोज और ललिता देवी को तोता से ऐसा लगाव हो गया था कि वो उसे बेटे जैसा ही मानने लगे.

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पशु प्रेम की कई तरह की कहानियां अब तक आपने पढ़ी और देखी होगी लेकिन आज हम एक ऐसे पशु प्रेम की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे देखने के बाद आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे. कटिहार के एक परिवार ने अपने घर में पालतू तोता के मौत के एक साल बाद पूरे हिंदू विधि-विधान से श्राद्ध कर्म कर पक्षी प्रेम की अनोखी मिसाल पेश की है.

'सुग्गा नहीं वो सग्गा था, तोता नहीं बेटा था वो'.  जी हां कटिहार के रहने वाले मनोज और ललिता देवी के घर में रहने वाले 'मिट्ठू' से घरवालों का कुछ ऐसा ही रिश्ता था. पिछले साल अचानक अपने से ही उड़ कर आए मिट्ठू तोता इस परिवार के साथ रहने लगा था. 7-8 महीना साथ रहने के बाद इस परिवार को तोता से ऐसा लगाव हो गया कि वो उसे बेटे जैसा ही मानने लगा. लेकिन पिछले साल ही 30 नवंबर को अचानक घर के पंखे से ही चोट लगने से मिटठू की मौत हो गई. बीते साल भी इस परिवार ने तमाम विधि-विधान के साथ श्राद्ध कर्म किया था.

इस साल भी बरसी के मौके पर तमाम रीति-रिवाज से कर्म कांडों को पूरा किया. कर्म कांड पूरा करवाने आये पंडित भी कहते हैं किसी परिवार के अपने पालतू पक्षी के लिए इतना प्यार एक अनूठा उदाहरण है. साथ ही ये भी कहते हैं कि आज तक उन्होंने एक पक्षी के लिए ऐसी विधि-विधान से कभी भी श्राद्ध कर्म बरसी संपन्न नहीं करवाया है. ये भी उनके लिए अपने आप में एक अनोखा उपलब्धि है.



अपने घर के पालतू पशु पक्षियों से स्नेह और प्यार का कई उदाहरण समाज के सामने आते रहते हैं, लेकिन कटिहार मिरचाईबाड़ी के गोश्वामी परिवार में अपने घर के पालतू तोता के मृत्यु के एक साल बाद भी जिस तरह से तोते की याद को अपनेपन के सहारे जोड़कर रखा है वो निश्चित रूप से सराहनीय है.
(कटिहार से सुब्रत गुहा की रिपोर्ट)

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