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70 सालों से बिहार के इस शहर में बसा है 'मिनी नेपाल', लोग बोले- चीन के कारण नादानी कर रहा हमारा देश

बिहार के कटिहार में रहने वाले नेपाली समुदाय के लोग

बिहार के कटिहार में रहने वाले नेपाली समुदाय के लोग

बिहार के कटिहार में रहने वाले नेपाली युवा शंकर राय कहते हैं नेपाल को अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए नहीं तो भारत में रहने वाले नेपाली समुदाय के लोग ही उन लोगों के हरकत पर लगाम लगाने के लिए काफी है.

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कटिहार. "रोटी-बेटी" का रिश्ता रखने वाले भारत नेपाल (India-Nepal Dispute) के बीच इन दिनों संबंधों में कुछ खटास है. इस बीच बिहार के कटिहार (Katihar) में लगभग सौ घरों की आबादी बहुल नेपाली समुदाय के लोगों ने इस पूरे मामले को चीन की साजिश करार दिया है. गोरखा (Gorkha) कॉलोनी के लोगों का राय इस मामले पर इसलिए भी खास है क्योंकि यहां के लोग पुश्तैनी रूप से आज भी नेपाल से जुड़े हुए हैं, हालांकि पीढ़ी दर पीढ़ी कई ऐसे लोग भी हैं जो अब कभी नेपाल गए ही नहीं है, लेकिन रिश्तो की खटास से यह लोग भी बेहद परेशान हैं.

सेना समेत बिहार-झारखंड पुलिस में दे रहे हैं सेवा

भारतीय सेना, बिहार पुलिस और अन्य खासकर सुरक्षा क्षेत्र में जुड़े इस मोहल्ले के लोग कहते हैं कि नेपाल चीन के प्रभाव में आकर नादानी दिखा रहा है, जबकि नेपाल का सच्चा मित्र हमेशा से भारत ही रहा है. सुकुमार तमांग कहते हैं कि हर सुख दुख में भारत ही साथ निभाया है और आगे भी साथ निभाता रहेगा यह बात नेपाल को हर हाल में समझना चाहिए. बसंती लामा कहती हैं कि वह कभी नेपाल तो गए नहीं लेकिन अपने रिश्तेदार जो नेपाल में है उनसे बातचीत के आधार पर पता चलता है कि तनाव तो सरकारी स्तर पर हैं लेकिन वहां के लोगों का दिल भी भारत के लिए ही धड़कता है.

हरकतों से बाज आये नेपाल

नेपाली युवा शंकर राय कहते हैं नेपाल को अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए नहीं तो भारत में रहने वाले नेपाली समुदाय के लोग ही उन लोगों के हरकत पर लगाम लगाने के लिए काफी है. इस खटास को जल्द दूर करने में दोनों देशों की प्रधानमंत्री के साथ-साथ खासकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यहा के लोगों को बेहद उम्मीद है.

इसी कॉलोनी से थे शहीद तमांग

गोरखा कॉलोनी में लगभग सौ परिवार हैं जिस में 75 से 80 घर नेपाली समुदाय के लोग हैं. सेना और बिहार/बंगाल/झारखंड पुलिस के परिवार से ही 40 से 50 परिवार जुड़े हुए हैं. लगभग 15 परिवार के लोग आज भी सेना से जुड़े हुए हैं. खास बात यह है कि शहीद श्याम कुमार तमांग जो कि भारतीय सेना की तरफ से ऑपरेशन मेघदूत को अंजाम देते हुए शहीद हुए थे वो भी इसी मोहल्ले से थे.

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