भगवान भरोसे बिहार की शिक्षा व्यवस्था, शिक्षक नहीं जानते संडे और मंडे लिखना

बिहार के सरकारी विद्यालयों में कैसे-कैसे शिक्षकों पर बच्चों के भविष्य संवारने की जिम्मेवारी है, इसका आप अंदाजा नहीं लगा सकते हैं.

News18 Bihar
Updated: July 11, 2018, 7:26 PM IST
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Updated: July 11, 2018, 7:26 PM IST
बिहार के सरकारी विद्यालयों में कैसे-कैसे शिक्षकों पर बच्चों के भविष्य संवारने की जिम्मेवारी है, इसका आप अंदाजा नहीं लगा सकते हैं. न्यूज18 आपको ऐसे शिक्षकों के ज्ञान से वाकिफ कराएगा जिसे देखकर और सुनकर आप हैरान हो सकते हैं और आपका सरकारी विद्यालयों पर से भरोसा भी उठ जाएगा.

शिक्षा व्यवस्था की पड़ताल करने न्यूज18 की टीम पहुंची कटिहार जिले की मनिहारी अनुमंडल स्थिति हेमकुंज मध्य विद्यालय किशनपुर. इस विद्यालय में 438 बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए 12 शिक्षक और शिक्षकाएं हैं. रियलिटी टेस्ट के दौरान न्यूज18 की टीम का सामना शिक्षिका कुंदन कुमारी, पुष्पलता और कई शिक्षक शिक्षिका से हुई. इनमें से कुछ तो बच्चों को पढ़ाने लायक हैं, मगर यकीन मानिए कुछ का ज्ञान और योग्यता शायद कक्षा एक और दो के बच्चों से भी कम है.

शिक्षिका कुंदन कुमारी संडे, मंडे और जनवरी, फरवरी आदि को ब्लैक बोर्ड में जिस अंदाज में लिख रही है वह बिहार की शिक्षा व्यवस्था का शायद एक काला अध्याय हो. मैडम के लिए अंग्रेजी तो दूर हिंदी में भी इसे लिख पाना संभव नहीं हुआ.

कमोबेश इसी तरह की हालत शिक्षिका पुष्पलता का भी है. एक-दूसरे को रियलिटी टेस्ट में फंसता देख शिक्षिकाएं तबियत खराब या अलग-अलग बहानेबाजी करने लगती हैं.

यकीन मानिए ऐसे शिक्षकों से अगर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था सुधारने की उम्मीद सरकार कर रही है तो यह आप के साथ और आप के बच्चों के साथ बड़ा धोखा साबित हो सकता है.
(कटिहार से सुब्रत की रिपोर्ट)

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