शिक्षक दिवस विशेष: पुलिस सर्विस से रिमूव हुए फिर भी श्याम सर ने नहीं छोड़ा हौसला, शिक्षा के सारथी बन बच्चों के सपनों को दे रहे नयी उड़ान
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शिक्षक दिवस विशेष: पुलिस सर्विस से रिमूव हुए फिर भी श्याम सर ने नहीं छोड़ा हौसला, शिक्षा के सारथी बन बच्चों के सपनों को दे रहे नयी उड़ान
कटिहार में महादलित बच्चों के बीच शिक्षका की लौ जलाता शिक्षक.

श्याम सर के पास पढ़ने वाले बच्चे आज अक्षर ज्ञान से वाकिफ होकर जीवन में नई उड़ान भरने का सपना (Dreem) देख रहे हैं. श्याम सर के पास पढ़ाई कर रहा ओम डॉक्टर बनना चाहता है तो विशाखा पुलिस की नौकरी में जाना चाहती है.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 5, 2020, 10:05 AM IST
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कटिहार. मुश्किल परिस्थिति में भी हार न मानने का जज्बा और हर पल कुछ नया करने के साथ समाज सेवा (Social Service) की भावना किसी भी शख्स को आम से खास बना देता है. कटिहार (Katihar) में एक ऐसे ही व्यक्ति हैं श्याम पासवान. वे न सिर्फ शिक्षा के सारथी बन कर आर्थिक तंगी के शिकार झुग्गी बस्तियों में रहने वाले बच्चों के बीच शिक्षा की लौ जला रहे हैं बल्कि अपनी जिंदगी की चुनौतियों को भी चुनौती दे रहे हैं. दरअसल श्याम का जीवन बीते दिनों उधेड़बुन में बीत रहा था क्योंकि साल 2015 में श्याम का चयन पुलिस विभाग (Police Department) के लिए हुआ था. वह पटना पुलिस लाइन में ट्रेनिंग ले रहे थे. इसी दौरान वर्ष 2018 में पुलिस लाइन में एक विवाद हुआ जिसमें न चाहते हुए भी उसका हिस्सा बन गए. एक महिला सिपाही की मौत के बाद उपजे विवाद से लगभग 200 सौ महिला-पुरुष ट्रेनी सिपाही को रिमूव फ्रॉम सर्विस कर दिया गया जिसमें श्याम भी शामिल थे.

हालांकि मामला फिलहाल कोर्ट में है, लेकिन सर्विस से रिमूव होने के बाद श्याम कटिहार में  अपने घर लौट कर आ गए. पहले से ही समाज सेवा से जुड़े रहने वाले इस युवक कठिन दौर के बावजूद खुद को संभाले रखा और समाज के प्रति अपने कर्तव्य को समझते हुए अपने ही मोहल्ले में खुले आसमान के नीचे आर्थिक तंगी के शिकार घर के बच्चों को पढ़ाने लगे.

श्याम कहते हैं इन बच्चों और उनके परिजनों के पास शिक्षा के लिए जरूरी मौलिक सुविधा भी नहीं है. बावजूद इसके सामाज के कुछ लोगों की मदद से कॉपी-कलम के साथ-साथ अन्य जरूरत पूरा करते हुए लगभग 1 साल से पेड़ के नीचे यह क्लास निरंतर जारी है.



श्याम के पास पढ़ने वाले बच्चे आज अक्षर ज्ञान से वाकिफ होकर जीवन में नई उड़ान भरने का सपना देख रहे हैं. श्याम सर के पास पढ़ाई कर रहा ओम डॉक्टर बनना चाहता है तो विशाखा पुलिस की नौकरी में जाना चाहती है. लगभग 40 छात्र- छात्राओं को पेड़ के नीचे शिक्षा के मंदिर से महादलित समुदाय के बच्चों को जोड़ने से इस इलाके में माहौल ही बदल गया है.
बच्चों के अभिभावक रेशम देवी कहती हैं कि वह खुद से काम कर किसी तरह घर चलाते हैं, ऐसे में बच्चों की पढ़ाना बेहद कठिन था, लेकिन मोहल्ले के ही इस लड़के की ने तो अब माहौल ही बदल दिया. अब उन्हें उम्मीद है कि आगे उनके बच्चे भी पढ़ाई करेंगे और समाज में कुछ स्थान बनाएंगे.
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