मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए तपस्या में लीन है काजोल

Subrata Guha | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: September 13, 2017, 1:25 PM IST

शिक्षा और ज्ञान के लिए तपस्या की परम्परा हमारे देश में प्राचीन काल से ही चली आ रही है. कटिहार के काजोल इस आधुनिकता के दौर में भी मैट्रिक परीक्षा में बेहतर अंक लाने के लिए बारसोई बेलवा मील सरस्वती स्थान में तीन दिनों से तपस्या में लीन है.

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शिक्षा और ज्ञान के लिए तपस्या की परम्परा हमारे देश में प्राचीन काल से ही चली आ रही है. कटिहार के काजोल इस आधुनिकता के दौर में भी मैट्रिक परीक्षा में बेहतर अंक लाने के लिए बारसोई बेलवा मील सरस्वती स्थान में तीन दिनों से तपस्या में लीन है.

इस मंदिर की मान्यता है की महाकवि कालीदास जी ज्ञान अर्जन के लिए इसी मंदिर में तपस्या की थी. कटिहार के इस मंदिर को लोग मन्नते पूरी करने वाला मंदिर मानते हैं.

बिहार और बंगाल से सटा यह है बारसोई बेलवा पंचायत जहां बेलवा सरस्वती गांव इन दिनों एक बार फिर से चर्चा में आ गया है. दरअसल इस गांव के मील सरस्वती मंदिर के बारे में यह मान्यता है की महाकवि कालीदास जब अपने ससुराल बंगाल के मालदह जिला स्थित हरिश्चंद्रपुर बाड़ी से अपने पत्नी द्वारा मूर्खता के कारण प्रताड़ित हुए थे तब वे करीब 10 किलोमीटर दूर जंगल में बसे इस मंदिर में आकर मां सरस्वती की उपासना कर उज्जैन चले गए थे.

जहां उन्हें महाकवि के रूप में प्रसिद्धी मिली थी. करीब 2000 साल पुराने इस मंदिर में आज भी पाषाण काल की कई मुर्तिया मंदिर में विरजमान है.

अल्पस्ख्यक बहुल इस इलाके में स्थानीय लोगो के द्वारा मंदिर का कायाकल्प तो हुआ पर इस बार चर्चा का विषय कक्षा 9 की छात्रा काजल द्वारा मैट्रिक में बेहतर नंबर लाने के लिए तीन दिनों से तपस्या में लीन होना है. आजमनगर जलकी के रहने वाले काजल उत्तम राय की पुत्री है जो इसे आस्था से जोड़कर देख रही है.

जबकि मंदिर के सचिव दिवाकर मंदिर के प्राचीन इतिहास से अवगत करा रहे है. बिहार सरकार के पूर्व मंत्री शिक्षा के लिए तप में लीन इस बेटी की सुधि लेने के लिए मंदिर तक जा पहुंचे और बिहार सरकार से इस मंदिर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की मांग कर रहे हैं.

जबकि बारसोई अनुमंडलाधिकारी सुचना पर मंदिर में पहुंच कर इसे निजी आस्था से जुडी हुई बाते बताते हुए लड़की के स्वास्थ्य एव सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था करने की बात की.
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शिक्षा और ज्ञान के लिए मां सरस्वती को तपस्या के माध्यम से रिझाने की काजल की यह कोशिश बेसक निजी आस्था से जुड़ा विषय है लेकिन अगर इसके सहारे महाकवि कालीदास से जुडी हुई इस इतिहासिक स्थान को बिहार के पर्यटन के पटल पर स्थान मिले तो वाकई इस बेटी की तपस्या पुरे जिले के लिए एक अलग उपलब्धि का विषय हो सकता है.

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First published: September 13, 2017, 12:52 PM IST
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