बिहार: क्या तारिक अनवर को अपना CM फेस बनाना चाहती है कांग्रेस? पढ़ें, इनसाइड स्टोरी
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बिहार: क्या तारिक अनवर को अपना CM फेस बनाना चाहती है कांग्रेस? पढ़ें, इनसाइड स्टोरी
कांग्रेस तारिक अनवर को बिहार की राजनीति में सक्रिय कर खुद को खड़ा करना चाहती है. (फाइल फोटो)

सीमांचल इलाके में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की बढ़ती ताकत के बीच कांग्रेस ने तारिक अनवर (Tariq Anwar) को मेन स्ट्रीम जहां मुस्लिम वोट बेंक को इंटैक्ट रखने की कोशिश की है, वहीं हिंदू समुदाय में भी उनकी पकड़ को बखूबी जानती है.

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पटना. कांग्रेस की ओर से 3000 दावेदारों में आखिरकार कांग्रेस ने विधान परिषद (Legislative Council) के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी और तारिक अनवर (Tariq Anwar) को उच्‍च सदन भेजने का फैसला किया. हालांकि बिहार के वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने के कारण उनका नाम वापस ले लिया गया और कार्यकारी अध्यक्ष समीर सिंह को अपना प्रत्याशी बना दिया. हालांकि तारिक अनवर को अचानक ही केंद्र की राजनीति से बिहार की पॉलिटिक्स में एंट्री करवाने की कांग्रेस की योजना से सभी हैरत में पड़ गए. जाहिर है बिहार के सियासी हलकों में कई मायने निकाले जा रहे हैं. दरअसल महागठबंधन (Grand Alliance) में मची खींचतान और कांग्रेस (Congress) को बिहार में खुद को स्थापित करने के लिए एक अवसर के तौर पर इसे देखा जा रहा है. माना तो जा रहा है कि कांग्रेस ने काफी सोच-समझकर ये फैसला किया कि तारिक अनवर का चेहरा आगे लाया जाए. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसका असर आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति पर साफ तौर पर देखा जाएगा.

इंदिरा गांधी के समय में तारिक की हुई थी कांग्रेस में एंट्री
दरअसल 1976 में इंदिरा गांधी ने बिहार यूथ बिग्रेड का अध्यक्ष रहे तारिक अनवर पार्टी का काफी भरोसेमंद चेहरा हैं. 1988 से 1989 तक वे बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे. 5 बार लोकसभा सदस्य रहे  तारिक अनवर ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर 1999 में कांग्रेस से बगावत कर शरद पवार के साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  (एनसीपी) का गठन किया था.  हालांकि21 वर्ष के बाद अक्टूबर 2018 में कांग्रेस में वापसी की.

NCP में होने के बाद भी कांग्रेस के करीबी रहे तारिक अनवर
एनसीपी में रहने के दौरान भी तारिक अनवर कांग्रेस के काफी करीब माने जाते रहे. यही वजह रही कि बीते लोकसभा चुनाव में उन्हें फिर कटिहार से एमपी का टिकट दिया गया. गैर विवादित छवि और सर्वसमाज में उनकी पकड़ होने के बावजूद 2019 के लोकसभा चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू के एक बयान ने उनकी संसद की राह रोक दी. हालांकि राज्यसभा में भी उन्हें भेजे जाने की बात उठी, लेकिन जानकारों की मानें तो तारिक अनवर कांग्रेस के लंबे गेमप्लान का हिस्सा हैं.



तारिक अनवर को लेकर कांग्रेस का ये है गेमप्लान !
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि भले ही वे विधान परिषद में एंट्री न ले पाए हों, लेकिन कांग्रेस के सूत्र ये बताते हैं कि आने वाले समय में उन्हें बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की बागडोर सौंपी जा सकती है. इसके बाद कांग्रेस उन्हें अपनी पार्टी की ओर से सीएम फेस भी घोषित कर सकती है. रवि उपाध्याय अपनी  बात को इस तर्क से स्थापित करते हैं कि महागठबंधन में तारिक अनवर जैसा कोई भी चेहरा फिलहाल नहीं दिख रहा है जिनपर सभी दलों को ऐतबार हो और वे गैरविवादित छवि के भी हों.

बिहार की राजनीति के केंद्र में आना चाहती है कांग्रेस
बकौल रवि उपाध्याय हाल 23 जून को कांग्रेस की अगुवाई में महागठबंधन दलों की वर्चुअल मीटिंग हुई और महागठबंधन को इंटैक्ट रखे जाने को लेकर सहमति जताई गई. माना जाता है कि राजद के खिलाफ बागी रुख अख्तियार करने वाले जीतन राम मांझी को भी तारिक अनवर के चेहरे से कोई ऐतराज नहीं होगा. मांझी की महागठबंधन में समन्वय समिति बनाने की मांग को भी एक तरह से कांग्रेस ने समर्थन दिया है.

महागठबंधन की तिकड़ी को भी तारिक पर नहीं होगा ऐतराज
रवि उपाध्याय कहते हैं कि उपेंद्र कुशवाहा तो पहले से ही कांग्रेस के नेतृत्व की बात कहते रहे हैं. दरअसल कुशवाहा ने एनडीए छोड़ जब महागठबंधन ज्वाइन किया था तो उसने कांग्रेस की राह ही पकड़ी थी न कि राजद की. वहीं मांझी, कुशवाहा और विकाशसील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी की तिकड़ी कांग्रेस के साथ अधिक सहज महसूस करती है. हाल में ये वर्चुअल मीटिंग के दौरान भी साफ हुआ कि अगर केंद्र में कांग्रेस हो तो इन छोटे दलों में तालमेल बिठाने में आसानी होगी.

तारिक अनवर के रूप में कांग्रेस के पास है दमदार चेहरा
वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा भी कहते हैं कि कांग्रेस में तारिक अनवर के नाम पर कोई असहमति होगी, ऐसा नहीं होगा. चूंकि तारिक अनवर का बैकग्राउंड ही कांग्रेस से जुड़ता है और वे सोनिया और राहुल के विश्वासपात्रों में भी शामिल हैं. कटिहार में राहुल गांधी ने तारिक अनवर के लिए जनसभा को भी संबोधित किया है. यही वजह है कि कांग्रेस अगर उनका नाम सामने लाएगी तो अपेक्षाकृत कम अनुभवी तेजस्वी यादव को भी कोई ऐतराज शायद न हो.

कांग्रेस के लंबे गेमप्लान का हिस्सा हैं तारिक अनवर
अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि सीमांचल इलाके में असदुद्दीन ओवैसी की बढ़ती ताकत के बीच कांग्रेस की तारिक अनवर को मेन स्ट्रीम लाने की रणनीति से जहां मुस्लिम वोट बेंक को इंटैक्ट रहेगा, वहीं हिंदू समुदाय में भी उनकी पकड़ का लाभ पार्टी को मिलेगा. खास तौर पर कांग्रेस से विमुख हुआ सवर्ण तबका भी तारिक अनवर की छवि को देखते हुए फिर से कांग्रेस की ओर रुख करे.

अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस चाहती है कि तारिक अनवर  की बेदाग छवि के सहारे बिहार में हाशिये पर चली गई कांग्रेस महागठबंधन में लीड रोल में एक बार फिर आए. जाहिर है कांग्रेस की इस लंबे गेमप्लान के तहत तारिक अनवर उनके लिए सीएम फेस का सबसे दमदार चेहरा साबित हो सकते हैं. हालांकि सबकुछ आरजेडी के रुख पर भी निर्भर करेगा कि क्या वह कांग्रेस की इस रणनीति के साथ चलने को तैयार होती है या नहीं.

 
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