अपराधियों की फायरिंग में घायल होने के बावजूद अंतिम सांस तक डटे रहे दारोगा आशीष

मुठभेड़ के दौरान गोली लगने के बावजूद वो डटे रहे और एक अपराधी को ढेर किया. मिशन सफल पूरा होता दिखाई दे रहा था तभी चार और गोलियां उनके सीने और पेट में समा गईं. बिहार पुलिस ने एक जांबाज दारोगा खो दिया.

News18 Bihar
Updated: October 14, 2018, 7:05 AM IST
अपराधियों की फायरिंग में घायल होने के बावजूद अंतिम सांस तक डटे रहे दारोगा आशीष
शहीद दारोगा आशीष कुमार
News18 Bihar
Updated: October 14, 2018, 7:05 AM IST
खगड़िया के परसाहा में तैनात दारोगा आशीष कुमार जब दिनेश मुनि गैंग के दियारा में छिपे होने की खबर मिलने पर देर रात एक बजे ट्रैक्टर से ही थाने से निकले तो ये ठान ली थी कि अपराध के एक अध्याय का आज अंत होगा. मुठभेड़ के दौरान गोली लगने के बावजूद वो डटे रहे और एक अपराधी को ढेर किया. मिशन सफल पूरा होता दिखाई दे रहा था तभी चार और गोलियां उनके सीने और पेट में समा गईं. बिहार पुलिस ने एक जांबाज दारोगा खो दिया.

शहीद दारोगा अशीष कुमार को अपनी वर्दी पर नाज था. 2009 में दारोगा की परीक्षा पास करने के बाद वो जहां भी गए उस थाना क्षेत्र में अपनी अलग पहचान कायम की. बेगूसराय में भी दो थाना क्षेत्रों में उन्होंने अपराधियों को नाको चने चबवाया था.

उनके साथ गए एक सिपाही को भी कमर के नीचे गोली लगी जिसका इलाज भागलपुर अस्पताल में चल रहा है.

जांबाज आशीष बेखौफ होकर अपराधियों से लोहा लेते थे. ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब आशीष को गोली लगी. पिछले साल जब वो मुफस्सिल थाना प्रभारी थे तब भी एक मुठभेड़ में उन्हें गोली लगी थी लेकिन वो बच गए.

आशीष कुमार न केवल जांबाज सिपाही थे बल्कि एक बेहद संवेदनशील व्यक्ति थे जो समाज के गरीब गुरबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा आगे आए. उनकी मां कैंसर की बीमारी से पीड़ित थीं. आशीष खुद उन्हें लेकर इलाज के लिए दिल्ली आया-जाया करते थे.

आशीष कुमार 2009 बैच के दारोगा थे. आशीष का घर सहरसा जिले के सरोमा थाना बलवाह ओपी में है. वो तीन भाइयों  में सबसे बड़े थे. उनका एक भाई सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में देश की सेवा कर रहा है. दूसरा भाई सिविल इंजीनियर है.

(दिग्विजय की रिपोर्ट)
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर