बिहार चुनाव: सीमांचल में ओवैसी ने मचा रखी है सियासी हलचल! जानें किसे फायदा और किसे हो रहा नुकसान?

असदुद्दीन ओवैसी ने सीएए और एनआरसी को लेकर आरजेडी और जेडीयू पर हमला बोला है.
असदुद्दीन ओवैसी ने सीएए और एनआरसी को लेकर आरजेडी और जेडीयू पर हमला बोला है.

बिहार चुनाव के अंतिम जंग में असदुद्दीन ओवैसी (Asduddin Owaisi) की पार्टी आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ( AIMIM ) सीमांचल और कोसी क्षेत्र में दो दर्जन सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 6, 2020, 6:45 AM IST
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पटना. बिहार चुनाव (Bihar Election) के आखिरी चरण में सभी दलों की नजर सीमांचल पर टिकी है. खासकर सीमांचल के मुस्लिम वोटरों पर सभी ने अपनी निगाहें टिका रखी हैं. सभी राजनीतिक दल के बड़े नेता इस समय इसी इलाकेमें कैंप कर रहे हैं. भाजपा इस इलाके में बांग्लादेशियों के अवैध घुसपैठ का मुद्दा उठा रही और हर सभा में घुसपैठियों को भगाने की बात कह रही है. वहीं, सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने यह कहकर कन्फ्यूजन में डाल दिया है कि कोई इन्हें नहीं भगा सकता है क्योंकि ये देश के नागरिक हैं. जाहिर है जहां एनडीए (NDA) में कन्फ्यूजन की स्थिति है वहीं,  मुस्लिम बहुल इलाके में असदुद्दीन ओवैसी (Asduddin Owaisi) बड़े फैक्टर बनकर उभरे हैं. दरअसल उन्होंने फिर से सीएए और एनआरसी का मुद्दा उठाया है और उनकी सभाओं में भारी भीड़ भी जमा हो रही है. महागठबधंन के घटक दल सीमांचल और कोसी पर अपना दावा करते हुए कहते हैं कि बीजेपी ने ओवैसी को अपनी बी टीम बना कर सीमांचल भेजा है, लेकिन फर्क नहीं पड़ेगा.

राजनीतिक दलों के दावों से इतर जमीनी हालात कैसे हैं? आखिर क्या कहता है सीमांचल का सियासी समीकरण? दरअसल बिहार चुनाव के अंतिम जंग में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम (आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) ने विपक्षी महागठबंधन के खेमे में हलचल मचा रखी है. सीमांचल और कोसी क्षेत्र में दो दर्जन सीटों पर एआइएमआइएम चुनाव लड़ रही है. मुस्लिम बहुल इलाकों में ओवैसी मुसलमान वोटरों को अपनी ओर खींचने के लिए आक्रमकता के साथ सारे पैतरे अपनाए हैं.

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि ओवैसी फैक्टर चुनाव में बड़ा प्रभाव डालने पर महागठबंधन को नुकसान हो सकता है क्योंकि ओवैसी ने सोच-समझकर मुस्लिम, यादव और अनुसूचित जाति के उम्मीदवार उतारे हैं जो महागठबंधन के वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश है. बता दें कि असदुददीन ओवैसी ने 24 में से 6 सीटों से दलितों, ओबीसी और आदिवासियों को टिकट दिये हैं.



वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि ओवैसी ने बड़ी होशियारी से  यादव, दलित और मुस्लिम मतदाताओं में सेंध लगाने की रणनीति अपनाई है. दरअसल मुस्लिम और यादव मतदाता राजद के परंपरागत वोट बैंक माने जाते हैं. ग्रैंड यूनाइटेड सेक्यूलर फ्रंट में शामिल ओवैसी ने मायावती की बसपा, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा और देवेंद्र यादव की समाजवादी जनता दल से वोटरों पर भी भरोसा जताया है.
अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ जिस तरह से घुसपैठ का मुद्दा उठा रहे हैं और इस पर  असदुद्दीन ओवैसी ने प्रचार में जिस तरह से एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दे को उछाला है इससे सीमांचल के मुस्लिम मतदाताओं में वह अपनी पैठ बढ़ाते दिख रहे हैं. बीते उपचुनाव में किशनगंज से विधानसभा सीट जीत कर अपनी इलाके में वे राजनीतिक घुसपैठ तो कर ही चुके हैं. ऐसे में मुस्लिम वोटों का ओवैसी की तरफ शिफ्ट होना एनडीए को फायदा पहुंचा सकता है.



सीमांचल की 19 सीटों पर मुसलमान मतदाता जहां निर्णायक होते हैं वहीं कोसी के 18 सीटों पर भी मुस्लिम वोटर चुनाव परिणाम को प्रभावित करते हैं. राजनीति के जानकारों का मानना है कि ओवैसी और देवेंद्र यादव के साथ आने के बाद तय है कि यादव और मुस्लिम वोट बैंक का बिखराव होगा, जो महागठबंधन के लिए नुकसानदेह साबित होगा. ऐसे भी ओवैसी की प्रचार शैली आक्रामक और ध्रुवीकरण पैदा करने वाली रही है, ऐसे में ओवैसी का प्रभाव बिहार के अन्य क्षेत्रों में भी पड़े तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी.
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