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BJP चाहती है सीमांचल में चले AIMIM की चलती: कांग्रेस

News18 Bihar
Updated: October 26, 2019, 11:42 AM IST
BJP चाहती है सीमांचल में चले AIMIM की चलती: कांग्रेस
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने उपचुनाव में मिली जीत के बाद बिहार में अपना खाता खोला है. (फाइल फोटो)

बिहार (Bihar) के किशनगंज (Kishanganj) में हुई AIMIM की जीत सीमांचल में इस पार्टी के राजनीतिक भविष्य की बात बन गई है. ये बात भी चर्चा में है कि क्या एमआईएमआईएम कांग्रेस, जदयू और राजद के विकल्प के रूप में मुस्लिम बहुल सीमांचल में अपनी जगह बना लेगी.

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किशनगंज. बिहार (Bihar) के किशनगंज (Kishanganj) में हुई AIMIM की जीत सीमांचल में इस पार्टी के राजनीतिक भविष्य की बात बन गई है. ये बात भी चर्चा में है कि क्या एमआईएमआईएम कांग्रेस, जदयू और राजद के विकल्प के रूप में मुस्लिम बहुल सीमांचल में अपनी जगह बना लेगी. सीमांचल में अबतक पकड़ रखने वाली कांग्रेस और जीत के बाद एमआईएमआईएम के आज की तारीख के दावे अपनी अपनी जगह पर बड़े दिलचस्प से हो गए हैं. कांग्रेस ने तो अब ये भी कह दिया है कि धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण हो जाए इसलिए बीजेपी ही चाहती है कि सीमांचल में AIMIM की चलती चल जाए.

एमआईएमआईएम का बिहार में पहला विधायक बनना सिर्फ किशनगंज का स्थानीय मामला नही है बल्कि यह पार्टी के सीमांचल में सियासी भविष्य के एक खास कदम के रूप में देखा जा रहा है. इस दल के सीमांचल में एंट्री और हिस्ट्री के कुछ खास बातें यूं हैं...

-हैदराबाद के ओवैसी बंधुओं की पार्टी को किशनगंज में खड़ा किया अख्तरुल ईमान ने.

-अख्तरुल ईमान राजद के विधायक थे और फिर जदयू में शामिल हुए.

-2015 के विधानसभा चुनाव में एमआईएमआईएम ने सीमांचल में सियासत की बजाप्ता शुरुआत की.

-2015 के विधानसभा चुनाव में किशनगंज जिले के दो, पूर्णिया जिले के दो और अररिया-कटिहार जिले के एक एक विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार दिए.

-2019 में लोकसभा चुनाव किशनगंज से लड़ा और अपनी वोट बैंक बढा ली.
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-एमआईएमआईएम की पॉलिसी में मुस्लिम के साथ दलित वोटरों को भी साथ रखना है.

-दलित और आदिवासी संगठनों के साथ एमआईएमआईएम ने पिछले सालों संपर्क बनाए.

मुस्लिम वोटरों को अपनी ओर खींचने के फिराक में पार्टी
एमआईएमआईएम सीमांचल को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने और धारा 371 के तहत सीमांचल में रिजनल डेवलपमेंट काउंसिल बनाने की मांग रखती है. अब सीमांचल के मुस्लिम वोटरों को पूरी तरह अपनी ओर खींचने के फिराक में है. राजद, जदयू, कांग्रेस और बीजेपी की तरह ही इसे धर्मनिरपेक्ष दल नहीं मानते और इसे बाहरी बताते रहे हैं. किशनगंज में एंट्री के बाद हमने एमआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान से खास बातें की जिससे यह साफ हो गया कि पार्टी आने वाले वक्त में खुद को सीमांचल की बड़ी पार्टी बनाने की राह पर काम कर रही है.

कांग्रेस बता रही बीजेपी की साजिश
इधर किशनगंज और सीमांचल में पारंपरिक पकड़ रखने वाले कांग्रेस और उसके नेता एमआईएमआईएम की जीत को महज संयोग का मामला बता रहे हैं पर इनकी कसक अपने किस्म की है और इनके नेता यह भी कहने से नहीं चूकते कि बीजेपी-एमआईएमआईएम की पॉलटिक्स को बढ़ा रही है और वह सीधे धार्मिक आधार पर राजनीतिक ध्रुवीकरण चाहती है. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वीके ठाकुर फिलहाल एमआईएमआईएम की जीत को बीजेपी की साजिश मान रहे हैं.

ओवैसी की पार्टी ने बदले इलाके के समीकरण
किशनगंज में एमआईएमआईएम की जीत ने सीमांचल की सियासत को नए अंदाज में देखने की हालत बना दी है. फिलहाल इस बात को लेकर चर्चे जारी हैं. नेताओं की चिंता बढ रही है पर आने वाले दिनों में होगा क्या, यह बात किसी को नहीं पता. फिर भी इस खास आगाज के अंजाम को लेकर सबके अपने-अपने हिसाब किताब और बात विचार बनने जारी हैं.

(राजेंद्र पाठक की रिपोर्ट)

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First published: October 26, 2019, 11:42 AM IST
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