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सीमांचल में सरस्वती विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की जरूरत : मोहन भागवत

आरएसएस सरसंघ चालक मोहन भागवत ने राष्ट्रहित में बिहार के सीमांचल में सरस्वती विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई है. मंगलवार को मोहन भागवत ने किशनगंज में सरस्वती विद्या मंदिर के एक नए और बड़े भवन के लोकार्पण समारोह को सम्बोधित करने के दौरान ये बातें कहीं.
आरएसएस सरसंघ चालक मोहन भागवत ने राष्ट्रहित में बिहार के सीमांचल में सरस्वती विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई है. मंगलवार को मोहन भागवत ने किशनगंज में सरस्वती विद्या मंदिर के एक नए और बड़े भवन के लोकार्पण समारोह को सम्बोधित करने के दौरान ये बातें कहीं.

आरएसएस सरसंघ चालक मोहन भागवत ने राष्ट्रहित में बिहार के सीमांचल में सरस्वती विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई है. मंगलवार को मोहन भागवत ने किशनगंज में सरस्वती विद्या मंदिर के एक नए और बड़े भवन के लोकार्पण समारोह को सम्बोधित करने के दौरान ये बातें कहीं.

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आरएसएस सरसंघ चालक मोहन भागवत ने राष्ट्रहित में बिहार के सीमांचल में सरस्वती विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई है. मंगलवार को मोहन भागवत ने किशनगंज में सरस्वती विद्या मंदिर के एक नए और बड़े भवन के लोकार्पण समारोह को सम्बोधित करने के दौरान ये बातें कहीं.

मोहन भागवत ने कहा कि सीमांचल में सरस्वती विद्यालयों की शिक्षा प्रणाली पर काम करना देश और धर्म का काम है.

उन्होंने मौजूदा कमाऊ और कामचलाऊ शिक्षा व्यवस्था की आलोचना करते हुए अच्छे नागरिक बनाने की आवश्यकता बताई और कहा कि शिक्षा पेट भरने की चीज नहीं होती. उनके मुताबिक जो सुविधा दिल्ली में हो वही सीमांत क्षेत्रों में भी होनी चाहिए.



आरएसएस प्रमुख ने इस मौके पर कहा कि उनके किशनगंज आने को लेकर बड़े चर्चे चले पर वे सिर्फ यहाँ अपनत्व के दायरे को बढ़ाने आये हैं.
उन्होंने ने अपने वक्तव्य में ये भी कहा कि दुनिया में आज तारीख का सबसे बड़ा द्वंद्व विकास बनाम पर्यावरण का है क्यूंकि यदि विकास हो तो पर्यावरण प्रभावित होगा और अगर ऐसा न किया जाय तो विकास अवरुद्ध होगा,जो मानव समाज के सबसे बडे उलझन के रूप में अब सामने है.

 

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