लोकसभा चुनाव: किशनगंज में त्रिकोणीय मुकाबला, मुस्लिम गोलबंदी पर सबकी नजर

इस लोकसभा के लोगों का मिजाज अन्य लोकसभा क्षेत्रों से बिल्कुल अलग है. यहां चुनाव से एक दिन पहले मुस्लिम वोटों की गोलबंदी होती है.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: April 18, 2019, 2:23 PM IST
लोकसभा चुनाव: किशनगंज में त्रिकोणीय मुकाबला, मुस्लिम गोलबंदी पर सबकी नजर
महमूद अशरफ-डॉ जावेद-अख्तरुल ईमान
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: April 18, 2019, 2:23 PM IST
पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे किशनगंज लोकसभा सीट का चुनावी संघर्ष भी इस बार दिलचस्प बन पड़ा है. कांग्रेस के लिए जहां यह सीट बचाने की चुनौती है तो वहीं जेडीयू सरकार के विकास के दावे की परीक्षा है, वहीं एमआईएम प्रत्याशी भी अपनी पैठ बनाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं.

वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर, सैयद शहाबुद्दीन जैसे दिग्गजों ने यहां से चुनाव लड़ा, जीते और संसद तक पहुंचे. मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण यहां के मुस्लिम ही प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करते हैं.

इस लोकसभा के लोगो का मिजाज अन्य लोकसभा क्षेत्रों से बिल्कुल अलग है. यहां चुनाव से एक दिन पहले मुस्लिम वोटों की गोलबंदी होती है. जिस तरफ इशारा हो गया समझिए उसी प्रत्याशी की जीत हो गई.

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एक खास तथ्य यह है कि इस लोकसभा क्षेत्र में पूर्व में हुए अधिकांश चुनाव में केंद्र की सत्ता के विपरीत ही प्रत्याशी को जीत मिली है.

MJ Akbar
एमजे अकबर (File Photo)


किशनगंज में 1952 से अब तक 16 बार लोकसभा चुनाव हुए इसमें कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी रही जिसने दो बार जीत की हैट्रिक लगाई है.वर्ष1952 से 1957, 1962 और 1980, 1984, 1989 में कांग्रेस ने लगातार जीत हासिल की. वहीं 1991 और 1996 में लगातार दो बार जनता दल को जीत का मौका मिला.

सीमांचल के गांधी के नाम से पुकारे जाने वाले मो. तस्लीमुद्दीन को तीन बार सांसद बनने का सौभाग्य मिला. तस्लीमुद्दीन को दो बार आरजेडी से तो एक बार जनता दल के टिकट पर जीते. 1996 में जनता दल और 1998 एवं 2004 में आरजेडी के सांसद बने.

Taslimuddin
मोहम्मद तस्लीमुद्दीन (File Photo)


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किशनगंज से गैर कांग्रेसी उम्मीदवारों में वर्ष 1967 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से लखन लाल कपूर, वर्ष 1977 में जनता पार्टी से हलीमुद्दीन अहमद सांसद बने थे.

इस बार यहां से कुल 14 प्रत्याशी मैदान में हैं. जानकारों के अनुसार त्रिकोणीय मुकाबले के आसार लग रहे हैं. जेडीयू  से सैयद महमूद अशरफ, कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. मो. जावेद और एमआईएम प्रत्याशी अख्तरुल ईमान के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है.

किशनगंज सीट से प्रत्याशी
सैयद महमूद अशरफ: जदयू
डॉ. मो. जावेद: कांग्रेस
अख्तरुल ईमान: एमआईएम
इंद्रदेव पासवान: बसपा
जावेद अख्तर: तृणमूल कांग्रेस
अलीमुद्दीन अंसारी: आम आदमी पार्टी
प्रदीप कुमार सिंह: शिव सेना
राजेन्द्र पासवान: बहुजन मुक्ति पार्टी
शुकल मुर्मू: झामुमो
राजेश दूबे: निर्दलीय
अजीमुद्दीन: निर्दलीय
असद आलम: निर्दलीय
छोटेलाल महतो: निर्दलीय
हसेरुल: निर्दलीय

जेडीयू के महमूद अशरफ दूसरी बार लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं. पहली बार उन्होंने 2009 में इसी पार्टी से चुनाव लड़ा था. वहीं कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. मो. जावेद पहली बार लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमा रहे हैं. हालांकि इससे पूर्व वे चार बार विधायक रह चुके हैं. जबकि एमआईएम प्रत्याशी अख्तरुल ईमान दूसरी बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

16.50 लाख मतदाताओं में  70 प्रतिशत मुस्लिम हैं. ऐसे में सारा समीकरण मुस्लिम वोटरों के रुख पर ही निर्भर रहता है. इसके साथ ही एक फैक्ट ये है कि करीब तीन लाख वोटर सूरजापुरी मुस्लि  बिरादरी से आते हैं.

दरअसल किशनगंज के सूरजापुरी मुस्लिमों का अतीत महाभारत काल, बौद्ध और पाल काल से है. इलाके में सूर्यवंशियों का शासन होने के कारण इस इलाके को सुरजापुर भी कहा जाता है. ऐसे में यहां के मूल बाशिंदे सूरजापुरी बिरादरी से आते हैं.

ऐसे में इनकी संख्या भी चुनावी गणित को प्रभावित करती है. कांग्रेस का गढ़ मानी जानेवाली इस सीट पर वर्ष 2009 व 2014 के चुनाव में स्थानीय सूरजापुरी बिरादरी से आनेवाले मौलाना असरारुल हक कासमी ने ही कांग्रेस से जीत का ताज पहना था. हालांकि इस बार का कांग्रेस भी नहीं कह सकती कि मुकाबला आसान है.

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