बिहार में जनाधार तलाश करती ओवैसी की पार्टी के लिए कितनी संभावनाएं?

किशनगंज लोकसभा सीट से AIMIM ने पिछले चुनाव से अपनी राजनीतिक शुरुआत की थी .तब पार्टी के उम्मीदवार थे अख्तरुल इमान जो AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. तब पार्टी ने काफी कोशिश की थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली थी.

News18 Bihar
Updated: March 16, 2019, 4:48 PM IST
बिहार में जनाधार तलाश करती ओवैसी की पार्टी के लिए कितनी संभावनाएं?
असदुद्दीन औवैसी, अख्तरुल ईमान व अन्य
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Updated: March 16, 2019, 4:48 PM IST
किशनगंज में सभी राजनीतिक दलों के साथ साथ ओवैसी बंधुओं की पार्टी ऑल इंडिया मज्लिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लेमीन यानि AIMIM ने अपनी पकड़ बनाने की पूरी तैयारी कर रखी है. पिछले लोकसभा चुनाव से ही ओवैसी की पार्टी किशनगंज और सीमांचल के हिस्सों में सक्रिय है. इस साल के चुनाव में भी यहां से AIMIM  अपना राजनीतिक भाग्य आजमाएगी.

बता दें कि किशनगंज लोकसभा सीट से AIMIM  ने पिछले चुनाव से अपनी राजनीतिक शुरुआत की है .तब पार्टी के उम्मीदवार थे अख्तरुल इमान जो AIMIM  के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. तब पार्टी ने काफी कोशिश की थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली थी.

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बीते विधानसभा चुनाव में पार्टी ने किशनगंज और पूर्णिया के के कई क्षेत्रों से अपने उम्मीदवार खड़े किए थे.  पर इलाके के अन्य राजनीतिक दलों के सामने बहुत ज्यादा कुछ कर या दिखा नहीं सके.

हालांकि अख्तरुल ईमान लगातार सीमांचल में वे सक्रिय रहे और जनाधार मजबूत करने में लगे रहे. अख्तरुल ईमान अब ऑल इंडिया मज्लिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लेमीन (एआईएमआईएम) के प्रदेश अध्यक्ष के बतौर अपने दल को सीमांचल में मजबूत बनाने में जुटे हैं.

दरअसल किशनगंज और पूर्णिया में कांग्रेस, राजद और जदयू के पास अल्पसंख्यक वोट अपने-अपने कारणों से हैं.  इस कारण से किशनगंज और पूरे सीमांचल में इन दोनों के वोट को AIMIM  द्वारा शिफ्ट कर लिया जाना एक बड़ी चुनौती है.

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तीनों ही दलों के स्थानीय नेता AIMIM  को सांप्रदायिक पार्टी कहते हैं और महागठबंधन के साथ बड़े दल के रूप में मौजूद कांग्रेस और एनडीए के प्रमुख दल जदयू दोनों सीमांचल या किशनगंज में इस पार्टी के भविष्य को शुरू से नकार रहे हैं.

बहरहाल  ओवैसी बंधुओं की पार्टी सीमांचल में और किशनगंज में अपनी जमीन बनाने में जरूर लगी हुई है लेकिन आगे क्या होता है यह किसी को नहीं पता.

रिपोर्ट- आशीष सिन्हा

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