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मिसालः 22 देशों में रहे, मल्टी नेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ी और पहुंचे अपने गांव, अब लड़ेंगे पंचायत चुनाव

मिसालः 22 देशों में रहे, मल्टी नेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ी और पहुंचे अपने गांव, अब लड़ेंगे पंचायत चुनाव

किशनगंज से जिला परिषद का चुनाव लड़ने वाले युवा रूमीन

किशनगंज से जिला परिषद का चुनाव लड़ने वाले युवा रूमीन

Kishanganj Panchayat Chunav: विदेश की नौकरी छोड़कर किशनगंज लौटे रूमीन ने मैनेजमेंट की पढ़ाई का उपयोग कर इलाके के विकास के लिए एक छोटा सा उद्योग भी शुरू करवाया है, जिसमें अभी 40 महिलाओं को रोजगार मुहैया कराया गया है. वो उन्हें मार्केटिंग के भी गुर सिखा रहे हैं.

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    रिपोर्ट- आशीष सिन्हा

    किशनगंज. बिहार में जारी पंचायत चुनाव के दौरान अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं. कोई प्रत्याशी धन, बाहुबल और भोज के नाम पर वोटरों को लुभा रहा है तो कई प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जो अपनी काबिलियत, योग्यता और सेवा भावना को लेकर चुनावी समर में हैं. ऐसे ही एक प्रत्याशी हैं किशनगंज जिले के कोचाधामन प्रखण्ड के अलता के रहने वाले रूमीन. रूमीन लंदन सहित बाइस देशों में नौकरी करने के बाद अब बिहार के पंचायत चुनाव में अपना हाथ आजमाना चाहते हैं.

    कोचाधामन प्रखंड अंतर्गत किशनगंज जिला परिषद क्षेत्र संख्या 10 से नसरूमिनल्लाह उर्फ रूमीन इस बार चुनावी समर में हैं. इनको इलाके के 7 पंचायतों कमलपुर, कुट्टी, बगलबरी, मजगवा, तेघर्या, डेरामारि, पाटकोई के मतदाता अपना वोट देंगे. इस इलाके के लिए नॉमिनेशन 26 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होना है.

    रूमीन ने लंदन से की पढ़ाई

    अलता के रूमीन ने 22 वर्षो तक एक निजी इंडस्ट्री में वाईस प्रेसिडेंट जैसे उच्च पद पर नौकरी की. उन्होंने अपनी पढ़ाई भी लंदन के साउथ बैंक यूनिवर्सिटी से की. वहां के बाद नौकरी के सिलसिले में ही 22 देशो में रहे, लेकिन अब रूमीन ने किशनगंज जिले में इलाके की बदहाली, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार में व्याप्त पिछड़ापन को दूर करने के उद्देश्य से जिला परिषद का चुनाव लड़ने का मन बना लिया है.

    गांव के लिए ज्ञान के इस्तेमाल का इरादा

    रूमीन विदेश में की गई मैनेजमेंट की पढ़ाई के ज्ञान का उपयोग कर इलाके को विकसित करना चाहते हैं. इस क्रम में उन्होंने इलाके में एक छोटा उद्योग भी शुरू करवाया है जिसमें अभी 40 महिलाओं को रोजगार मुहैया कराया गया है. उन्हें मार्केटिंग की भी गुर सिखा रहे हैं. उनकी सोच है कि वो इसको बढ़ाकर पूरे सूबे में छोटे-छोटे उद्योग लगाएं जाएं, लेकिन इसमें कुछ अड़चनें आ रही हैं.

    राजनीति में हाथ आजमाने की कोशिश

    रूमीन चाहते हैं कि इन परेशानियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से दूर करने में मदद मिले और क्षेत्र का विकास किया जा सके. रूमीन के पिता भी पूर्व में मुखिया रह चुके हैं पर उनको उच्च शिक्षा की पढ़ाई-लिखाई के लिए विदेश भेज दिया. रूमीन जब भी दो-चार वर्षों में अपने गांव आते थे, तो इलाके की बदहाली को देख उसमें सुधार करने की इच्छा जागृत हुई. उन्होंने अपनी सोच को जमीन पर उतारने के लिया पंचायत स्तर की राजनीति में अपना हाथ आजमाने की कोशिश की.

    लोगों का समर्थन भी मिल रहा रूमीन को

    इस मामले को लेकर इलाके में चर्चा है और लोगों का समर्थन भी रूमीन को मिलता दिख रहा है. राजनीतिक पार्टियों की भी नजर इस क्षेत्र पर है. चुंकी इसी इलाके से सटे मोधो पंचायत के रहने वाले अख्तरुल ईमान ने असदुद्दीन औवैसी की पार्टी को हैदराबाद से यहां लाया और बिहार में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करते हुए एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष भी बने हैं, जिस कारण इलाके में पंचायत चुनाव भी दिलचस्प हो गया है.

    Tags: Bihar Panchayat Election, Kishanganj

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