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बिहार: बांग्लादेश के शिविर से फरार 10 रोहिंग्या राजधानी एक्सप्रेस से पकड़े गए

बिहार के किशनगंज से गिरफ्तार किए गए रोहिंग्या मुसलमान
बिहार के किशनगंज से गिरफ्तार किए गए रोहिंग्या मुसलमान

Rohingya Muslim: बिहार के किशनगंज से सटे स्टेशन पर हुईं यह गिरफ्तारियां, टिकटों और पहचान की जांच के दौरान धरे गए रोहिंग्याओं में 3 पुरुष, 2 महिलाओं के साथ 5 बच्चे शामिल. भारत में रहते हैं 40,000 हजार रोहिंग्या.

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किशनगंज. बांग्लादेश के एक शिविर से फरार 10 रोहिंग्या मुसलमानों को किशनगंज से सटे पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर 02501 अगरतला-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस से गिरफ्तार किया गया है. बुधवार को यह गिरफ्तारियां आरपीएफ और जीआरपी की टीम ने टिकटों और पहचान पत्रों की जांच के दौरान कीं. यह सभी चकमा देने के चक्कर में थे, लेकिन ट्रेन अधीक्षक की तत्परता से यह लोग पकड़े गए. बता दें कि पिछले तीन सालों में भारत में अवैध रूप से रह रहे या आवाजाही कर रहे रोहिंग्या मुसलमान किशनगंज, यूपी के आगरा, त्रिपुरा के अगरतला के अलावा कई राज्यों में बड़ी संख्या में पकड़े जाते रहे हैं.

एफएफ रेल्वे के सीपीआरओ शुभानन चंद्रा के मुताबिक ये सभी लोग बांग्लादेश के कोक्स बाजार स्थित कुटुपालंग शिविर से फरार हुए थे. यह गिरफ्तारियां तब हुईं, जब 02501 अगरतला-नई दिल्ली राजधानी स्पेशल ट्रेन में ड्यूटी पर तैनात ट्रेन अधीक्षक गुवाहाटी स्टेशन पर ट्रेन में सवार होने के बाद टिकटो की जांच में जुटे थे. यात्रियों के टिकटों की जांच और पहचान के दौरान उन्हें ट्रेन के बी-7 कोच में सफर कर रहे कुछ यात्रियों पर संदेह हुआ. अधीक्षक ने इन संदिग्धों की पुलिस द्वारा पूरी जांच के लिए एक मेमो जारी किया. इसी मेमो के आधार पर न्यू जलपाईगुड़ी की टीम ने बुधवार अपरान्ह 1.40 बजे राजधानी एक्सप्रेस के स्टेशन पहुंचने पर जांच की. जांच के दौरान 3 पुरुष, 2 महिलाओं के साथ 5 बच्चे संदेहास्पद नागरिक के रूप में यात्रा करते पाये गए. जांच के दौरान संदिग्धों ने बताया कि वो लोग रोहिंग्या समुदाय से संबंधित हैं और 11 जनवरी को अगरतला स्टेशन ट्रेन में सवार हुए थे. 10 जनवरी को बांग्लादेश के कोमिल्ला से भारत के सोनामुरा में प्रवेश किया था और एजेंट की मदद से ट्रेन में सवार हुए थे. पूछताछ के बाद गिरफ्तार सभी रोहिंग्या को जीआरपी न्यू जलपाईगुड़ी के हवाले कर दिया गया.

पहले भी हो चुके हैं कई रोहिंग्या गिरफ्तार
बता दें कि बिहार के किशनगंज में ही बीते साल नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में ऐसे ही 14 रोहिंग्या मुसलमानों को राजधानी एक्सप्रेस से गिरफ्तार किया गया था. यह भी बांग्लादेश के उसी रिफ्यूजी कैंप से भागे हुए थे और भागकर दिल्ली जा रहे थे. कल बुधवार को पकड़े गए 10 रोहिंग्या भी उसे कैंप से फरार हुए थे. पूर्वोतर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री चंद्रा के मुताबिक इन गिरफ्तारियों में भारतीय रेल की टोल फ्री सुरक्षा हेल्प लाइन नंबर 182 काफी प्रभावशाली साबित हुई है. अक्टूबर 2020 में भी कुछ रोहिंग्या मुसलमानों की आगरा में गिरफ्तारियां हुईं थी. भागकर आए रोहिंग्या अक्सर दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में रोजगार की तलाश करने आते हैं. इसी प्रकार त्रिपुरा में भी जुलाई 2019 में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास से 2 रोहिंग्या मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया था.
म्यांमार से खदेड़े गए हैं यह रोहिंग्या


उल्लेखनीय है कि बौद्ध धर्म के अनुयायियों के बाहुल्य वाले देश म्यांमार ने 1982 से ही रोहिंग्या मुसलमानों की नागरिकता छीन ली थी. बीते साल म्यांमार के राज्य रखाइन में बड़े पैमाने पर हुए संघर्ष में म्यांमार में बड़े पैमाने पर रोहिंग्याओं के साथ हिंसा हुई , तबसे वहां खतरनाक और डरावनी तस्वीरों के तौर पर रोहिग्याओं में पलायन देखा गया. म्यामांर इन्हें बांग्लादेशी संस्कृति का मानता है. म्यांमार की हिंसा के बाद से ही रोहिंग्या सुमद्री रास्ते, बांग्लादेश की सीमा और भारत-म्यांमार की सीमा से घुसपैठ कर यहां पहुंचे हैं.

भारत में 40 हजार रोहिंग्या
2017 में रोहिंग्याओं की भारत में घुसपैठ के बाद बहुत बवाल मचा था. भारत में करीब 40, 000 रोहिंग्या हैं, इनमें से 10 हजार तो जम्मू कश्मीर में डेरा डाले हैं, बाकी दिल्ली, आगरा, अगरतला, कोलकाता समेत बंगाल, बिहार और असम के कई स्थानों पर डेरा डाले हैं. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 12 से 16 हजार रोहिंग्या भारत में शरणार्थी है. सरकार इन्हें कानून, व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए देश से निकालना चाहती है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था रोक
इस मामले में तमाम प्रदर्शनों और याचिकाओं के बाद अक्टूबर 2017 में सुप्रीमकोर्ट ने रोंहिग्यों को देश से नहीं निकालने के लिए कहा था. सुप्रीमकोर्ट की टिप्पणी थी कि 'मानवीय मूल्य हमारे संविधान का आधार है. साथ ही देश की सुरक्षा, आर्थिक हितों की रक्षा भी जरूरी है.'

वहीं केन्द्र सरकार की ओर सुप्रीमकोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा गया था, कि कुछ रोहिंग्या रिफ्यूजी के पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से कनेक्शन हैं. उन्हें किसी भी कीमत पर भारत में रहने की इजाजत नहीं देनी चाहिए. वो हमारे देश के लिए खतरा हो सकते हैं. केन्द्र ने यह भी कहा था कि रोहिंग्या रिफ्यूजी को देश में रह रहे नागरिक जैसी कोई सुविधा देना गैर-कानूनी है.
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