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18 साल से नंगे पांव घूम रहा है राम भक्त, अब अयोध्या जाकर पहनेगा चप्पल, जानें पूरा मामला

News18 Bihar
Updated: November 13, 2019, 10:41 AM IST
18 साल से नंगे पांव घूम रहा है राम भक्त, अब अयोध्या जाकर पहनेगा चप्पल, जानें पूरा मामला
नंगे पांव चलते हुए देबू दा

देबू दा ने बताया कि वर्ष 2001 में इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त (साफ) नहीं हो जाता है, तब तक वो चप्पल नहीं पहनेंगे. सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशियां जताते हुए देवदास ने कहा कि उनका प्रण अब पूरा हो गया है.

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  • Last Updated: November 13, 2019, 10:41 AM IST
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किशनगंज. अयोध्या (Ayodhya) में विवादित रामजन्म भूमि- बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद बिहार (Bihar) के किशनगंज (Kishanganj) के एक राम भक्त की खुशियों का ठिकाना नहीं है. अब ये राम भक्त चप्पल और जूते पहन सकता है. दरअसल, इस शख्स ने प्रण किया था कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर (Ram Temple) का निर्माण नहीं हो जाता तब तक वो नंगे पांव रहेगा. अब राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने पर यह शख्स 18 साल बाद अपने पैरों में चप्पल पहनेगा.

बच्चों को व्यायाम सिखाते हुए देबू दा


दरअसल, हम बात कर रहे हैं किशनगंज जिले के रोलबाग मोहल्ला निवासी देवदास उर्फ देबू दा के बारे में. 38 वर्षीय देबू दा ने 18 साल पहले प्रतिज्ञा ली थी कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वो नंगे पांव रहेंगे. अब राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद देबू दा अयोध्या में जाकर सप्पल पहनेंगे. अभी तक वो नगे पांव ही रह रहे हैं. उन्हें कहीं जाना भी होता है तो वो नंगे पांव ही जाते हैं.

बच्चों को योग सिखाते हुए देबू दा


वर्ष 2001 में लिया था संकल्प
देबू दा ने बताया कि वर्ष 2001 में इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त (साफ) नहीं हो जाता है, तब तक वो चप्पल नहीं पहनेंगे. सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशियां जताते हुए देवदास ने कहा कि उनका प्रण अब पूरा हो गया है. उन्होंने कहा कि अब वो किसी भी दिन अयोध्या जाकर रामलला का दर्शन करेंगे और वहीं अपने पांव में चप्पल पहनेंगे.

आरएसएस की शाखा में बच्चों के साथ देबू दा

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देबू दा को समाज सेवा का है जुनून
देबू दा राम भक्त के साथ-साथ समाजसेवी भी हैं. पूरे इलाके में लोग उन्हें आदर करते हैं. एक शब्द में कहें तो उन्हें समाज सेवा का जुनून है. वो रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ स्वयं भी रक्तदान करते हैं. समाज में जिस परिवार से उन्हें शादी-विवाह और जन्मदिन के अवसर पर न्योता मिलता है, उस परिवार के सदस्यों द्वारा कम से कम पांच पौधारोपण करवाने का प्रयास करते हैं. अब तक वो 1800 से अधिक लोगों के दाह-संस्कार में शामिल हो चुके हैं. आज भी वो अनाथ आश्रम में बच्चों को योग- व्यायाम सिखाते हैं. साथ ही गानों के माध्यम से उन्हें प्रोत्साहित भी करते हैं.

(रिपोर्ट- आशीष सिन्हा)

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First published: November 13, 2019, 9:23 AM IST
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