Supaul Assembly Seat: साल 1990 से है बिजेंद्र प्रसाद यादव का सीट पर कब्जा, इस बार क्‍या होंगे समीकरण?

बिजेंद्र प्रसाद यादव (फाइल फोटो)
बिजेंद्र प्रसाद यादव (फाइल फोटो)

साल 2015 में 52 प्रत्याशी चुनावी मैदान में भाग्य आजमाने उतरे थे. जिसमें यहां से जनता दल के प्रत्याशी बिजेंद्र प्रसाद यादव (Bijendra Prasad Yadav) ने जीत दर्ज की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 10:57 AM IST
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सुपौल. बिहार में इन दिनों विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) की तैयारियां जोरों पर हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि चुनाव आयोग आने वाले कुछ दिनों में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है. ऐसे में सभी दल इससे पहले ही कमर कस चुके हैं. वहीं इस बार के चुनाव में सुपौल विधानसभा पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं. दरअसल यहां बिजेंद्र प्रसाद यादव साल 1990 से सीट पर कब्जा जमाए हैं. ऐसे में ना सिर्फ विपक्षी दल बल्कि जनता के लिए भी इस सीट पर चुनाव ख़ास होने वाला है. गौरतलब है कि यह निर्वाचन क्षेत्र 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया था.

बता दें कि साल 2015 के चुनाव में सुपौल विधानसभा क्षेत्र में 61.10 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें निर्मली विधान सभा क्षेत्र में 60.10, पिपरा 60.90 सुपौल 61.50, त्रिवेणीगंज में 61.20 और छातापुर विधान सभा क्षेत्र में 61.80 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. वहीं जिले के भवानीपुर व खूंट गांव के लोगों ने सड़क, पुल, बिजली आदि समस्याओं को लेकर मतदान का बहिष्कार कर दिया था, जबकि अन्य बूथों पर वोटरों ने काफी बढ़-चढ़ कर मताधिकार का प्रयोग किया था.

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2015 में 52 प्रत्याशी थे चुनावी मैदान में...

साल 2015 में 52 प्रत्याशी चुनावी मैदान में भाग्य आजमाने उतरे थे. जिसमें यहां से जनता दल के प्रत्याशी बिजेंद्र प्रसाद यादव ने जीत दर्ज की थी. बता दें कि बिजेंद्र इस सीट से साल 1990 से लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार के चुनाव में 22 लाख से ज्यादा की आबादी वाले सुपौल विधानसभा क्षेत्र में एनडीए और महागठबंधन के अलावा निर्दलीय प्रत्‍याशियों की भूमिका भी अहम हो सकती है. ऐसे में विपक्षी दलों की पूरी कोशिश रहेगी कि बिजेंद्र सिंह के इस रिकॉर्ड को तोड़ा जाए वहीं बिजेंद्र सिंह के लिए भी यह सीट बचाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होगा.
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