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Lockdowm: दो रोटी की चाह में दिनभर हाईवे पर कोरोना दानवीरों का इंतजार करते हैं ये मासूम
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News18 Bihar
Updated: April 9, 2020, 8:26 PM IST
Lockdowm: दो रोटी की चाह में दिनभर हाईवे पर कोरोना दानवीरों का इंतजार करते हैं ये मासूम
अब तो गोविंदा और रिया के लिए हाईवे जाकर दान करने के लिए निकले लोगों का इंतजार रोज का काम हो गया है.

पटना (Patna) के ट्रांसपोर्ट नगर में रहने वाले गोविंदा और रिया के पिता लॉकडाउन (Lockdown) के चलते पंजाब (Panjab) के लुधियाना में फंसे हुए हैं, वह चाह कर भी वहां से अपने परिवार की मदद नहीं कर पा रहे हैं.

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पटना. दिहाड़ी मजदूरी कर अपनी पत्‍नी और चार बच्‍चों का पेट पालने वाले शिव कुमार (Shiv Kumar) के लिए पटना (Patna) में रहना मुश्किल हो चला था. बेहतर मजदूरी की आस में उसने करीब दस महीने पहले अपना रुख पंजाब के लुधियाना शहर की तरफ कर लिया. किस्‍मत ने धोड़ा साथ दिया और शिव कुमार को एक कारखाने में बेहतर तनख्‍वाह में काम भी मिल गया. इधर, बिहार (Bihar) के पटना में रहने वाली उसकी पत्‍नी चंपा देवी को भी एक स्‍कूल में मेड का काम मिल गया. शिवकुमार को लगने लगा था कि अब उसके बच्‍चों की जिंदगी से भूखे पेट सोने के दिन चले गए है. अब वह और उसकी पत्‍नी मिलकर कम से कम अपने बच्‍चों को पेट तो भर ही लेंगे.

शिव कुमार को यह नहीं मालूम था कि उसके परिवार में यह अच्‍छे दिन छोटी सी सौगात लेकर आने वाले एक मेहमान की तरह है. एक दिन मेहमान भी चला जाता है और सौगात भी खत्‍म हो जाता है. कुछ ऐसा ही शिव कुमार के साथ हुआ. देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन घोषित हो गया. शिव कुमार जब तक सोच समझ पाता, तब तक आवागमन के साधन भी बंद कर दिए गए. लॉकडाउन के चलते वह फैक्‍टरी पहले ही बंद हो गई थी, जिसमें वह काम करता था. उधर, पटना में भी चंपा देवी का स्‍कूल बंद हो गया. दोनों के पास जो पैसे बचे थे, वे शुरूआत के कुछ ही दिनों में पेट भरने के काम आए.

चंपा और उसके बच्‍चों की हालत ऐसी हो गई कि कुछ दिन एक ही टाइम खाना मिला, वह भी इतना कि उससे आंतो की अकड़न शांत हो, पेट में भूख की मरोड़ जस की तस बनी रहे. इसी बीच, चंपा के छोटे बेटे गोविंदा को उसके साथी ने बताया कि हाईवे गुजरने वाली गाड़ियां खाना देकर जाती है. गोविंदा के पेट में भूख की आग इतनी तेज थी कि वह अपने छोटी बहन रिया को साथ लेकर हाईवे की तरफ चल पड़ा. हाईवे पहुंचने के बाद वह टकटकी लगाकर वहां से गुजरने वाले वाहनों को देखता रहा. तभी वहां से गुजर रही गाड़ी थोड़ी दूर जाकर रुकी. गाविंदा और उसकी छोटी बहन रिया दौड़कर उस गाड़ी के पास पहुंचे. गाड़ी में सवार एक शख्‍स ने खाने के दो पैकेट दे दिए.



गोविंदा बेहद मासूमी से बोला- साहब दो पैकेट और मिलेगा, भेरे छोटे भाई बहन भी बहुत भूखें है. गाड़ी में मौजूद साहब को दोनों पर तरस आ गया और उसने दो की जगह तीन पैकेट निकाल कर गोविंदा को दे दिए. खाने के पैकेट पाकर गोविंदा ऐसे प्रफुल्लित हो गया, जैसे उसे उसकी मनचाही मुराद मिल गई हो. वैसे सच भी है, भूखे के लिए खाने से बड़ी मुराद क्‍या होगी. खैर, खाने की इन पैकेट को लेकर गोविंदा और रिया घर पहुंच गए और कई दिनों बाद गोविंदा उसके परिवार को खाना खाकर कुछ संतोष हुआ था. अब तो गोविंदा और रिया के लिए हाईवे जाकर दान करने के लिए निकले लोगों का इंतजार रोज का काम हो गया. गनीमत रही कि बीते दिनों एक सहृदय व्‍यक्ति ने इनकी मजबूरी समझी और इनके परिवार को कुछ दिनों के खाने और राशन की व्‍यवस्‍था की.




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First published: April 9, 2020, 8:19 PM IST
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