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बिहार पंचायत चुनाव में गोलमाल! विधानसभा इलेक्शन में घोटाले के आरोपी वेंडर को फिर मिला टेंडर, अबकी बार 4 की मोमबत्ती 9 में

बिहार पंचायत चुनाव में गोलमाल! विधानसभा इलेक्शन में घोटाले के आरोपी वेंडर को फिर मिला टेंडर, अबकी बार 4 की मोमबत्ती 9 में

बिहार पंचायत चुनाव में एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है.

बिहार पंचायत चुनाव में एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है.

Bihar Election Scam: मधेपुरा जिले में विधानसभा चुनाव के दौरान घोटाले के आरोपी वेंडर को पंचायत चुनाव का टेंडर मिला है. प्रशासन की नाक के नीचे वेंडर ने अनियमितता बरतते हुये बड़ा घोटाला किया है. लेकिन, प्रशासन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. जानिए पूरा मामला.

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मधेपुरा. बिहार के मधेपुरा जिले से विधानसभा चुनाव के बाद अब पंचायत चुनाव (Bihar Panchayat Election) में भी एक बड़े घोटाले की खबर सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि एक बार फिर चुनाव सामग्रियों की सप्लाई में अधिकारियों और वेंडरों की मिली भगत से करोड़ों का हेरफेर हुआ है. पिछली बार न्यूज 18 ने बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के दौरान हुये गोलमाल का खुलासा किया था. इस बार फिर न्यूज 18 बिहार पंचायत चुनाव में करोड़ों के खेल को उजागर करने जा रहा है. दरअसल इस बार भी मधेपुरा (Madhepura) जिले में विधानसभा चुनाव में घोटाले के आरोपी वेंडर को पंचायत चुनाव का टेंडर मिला है. वहीं प्रशासन की नाक के नीचे वेंडरों ने अनियमितता बरतते हुये बड़ा घोटाला किया है. लेकिन, प्रशासन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. मिली जानकारी के अनुसार पंचायत चुनाव में इस्तेमाल करने वाले सामानों का टेंडर (Tender) एक घोटाले के आरोपी वेंडर (Accused Vendor) को दिया गया, जिसने इस बार फिर सामग्रियों को बढ़ी कीमतों पर सप्लाई किया है. साथ ही सामान के क्वान्टिटी और क्वालिटी के साथ-साथ भी छेड़छाड़ की गयी है. बताया जाता है कि इस बार वेंडर ने 4 रुपये वाली मोमबत्ती का रेट 9 रुपये रखा है, वहीं 60 एमएल वाली गोंद की जगह 20 एमएल वाला बॉक्स भेजा है. हालांकि रेट 60 एमएल वाला ही रखा गया है. वहीं जुट की थैली के बदले दिया नन ओवेन फेब्रिक थैले की सप्लाई कर दी गयी है.


बता दें, पिछली बार विधानसभा चुनाव में 10 करोड़ के घोटाले के आरोपी ने इस बार कोटेशन मेन रेट पिछली बार से तो कम कर दिये लेकिन इस बार सामग्री की गुणवत्ता के अनुसार हर सामान का रेट लगभग दोगुना रखा है. ऐसे में इस बार भी 4 से 5 करोड़ के घोटाले की खबर सामने आ रही है.


रेट किया कम लेकिन सप्लाई में गड़बड़ी 
बताया जाता है कि मीडिया में खबर आने के बाद विधानसभा चुनाव की तुलना में पंचायत चुनाव के बीच आपूर्ति किए जाने वाले सामान की कीमत में 40 से 50% तक की कमी आयी है. लेकिन, चौंकिए मत ! यह चुनाव में सामान की आपूर्ति के लिए होने वाले टेंडर का खेल है. दरअसल विधानसभा चुनाव नवंबर 2020 में हुआ था. अभी पंचायत चुनाव चल रहा है. इस एक साल में टेंडर में शामिल सामानों के दाम 40 से 50 प्रतिशत तक घट गई है. हालांकि जो सामान सप्लाई किया जा रहा है वो टेंडर के नमूनों के अनुसार नहीं है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है प्रशासनिक अधिकारी और सप्लायर के बीच गठजोड़ के आधार पर चुनावों के दौरान कितने बड़े पैमाने पर सरकारी राशि का गोलमाल होता रहा है.


पीठासीन अधिकारी को खरीदना पड़ा गोंद
बता दें, इस बार बूथों पर टेंडर के मुताबिक सबसे कम 60 एमएल का गोंद सप्लाई करना था, 20 एमएल वाला गोंद भेज दिया. बताया जाता है कि चुनाव के वक्त अधिकांश बूथों पर पीठासीन पदाधिकारी को या तो गोंद खरीदना पड़ा या गांव वालों से मांग कर मैनेज करना पड़ा. वहीं जुट के थैले के बदले नन ओवेन फेब्रिक का थैला दिया गया. जबकि बड़ी मोमबत्ती की जगह छोटी मोमबत्ती सप्लाई की गयी. इसी तरह लगभग अधिकांश सामान टेंडर के अनुसार नहीं भेजे गए हैं.


न्यूज 18 पर खबर चलने के बाद RTI
चुनाव में जारी गड़बड़ी को लेकर न्यूज़ 18 पर खबर चलने के बाद कई राजनितिक और सामजिक कार्यकर्ता हरकत में आए और इस मामले में आरटीआई भी डाला. लेकिन, उसमें भी जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा गोल-मोल और अपूर्ण जानकारी ही दी गयी. आरटीआई कार्यकर्ता महेंद्र यादव और सीपीआई प्रमोद प्रभाकर ने सरकार से इस संबंध में जानकारी मांगी लेकिन उन्हें कोई ठोस सूचना नहीं मिल पायी.


खुलकर बोलने से बच रहे हैं अधिकारी
वहीं, इस सम्बन्ध में जिले के अधिकारी कैमरे पर कुछ भी बोलने से बचते दिख रहे हैं. आरोप तो यह भी लग रहा है कि चुनाव के टेंडर और कार्य आवंटन में भी बड़े पैमाने पर अनियमितता की गयी है. आखिरकार घोटाले के आरोपी जिस वेंडर को ब्लैकलिस्ट करना चाहिए उसे ही दोबारा टेंडर दे दिया गया. हालांकि, सप्लाई में गड़बड़ी के सवाल पर जिला के सूचना एवं जन संपर्क पदाधिकारी ने कहा कि सप्लाय में गड़बड़ी करने वाले स्पलायारों का भुगतान आपूर्ति की गयी सामानों की गुणवत्ता और संख्या जांच कर ही की जाएगी.

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विधानसभा चुनाव में भी हुआ था घोटाला 

पिछली बार जांच में जो बातें सामने आई थी, उसके मुताबिक विधानसभा चुनाव में 10 से 15 करोड़ का फर्जीवाड़ा हुआ था. फर्जी बिल के आधार पर सरकार और प्रशासन को करोड़ों रुपये का चूना लगाने का प्रयास किया गया था. इस घपले में पूर्व के कई वरीय अधिकारियों की भी संलिप्तता की आशंका जताई गयी थी. नए डीएम की जांच में इन सारे घोटालों का खुलासा हुआ था. घोटाले की बानगी ऐसी है कि 2 रुपये की मोमबत्ती 29 रुपये में ख़रीदी गई और 50 का झाड़ू 98 रुपये में लिया गया. कई सामान के लिए तो कीमत से ज्‍यादा भाड़े में ही खर्च कर दी गई थी.

Tags: Bihar News, Bihar Panchayat Chunaw, Bihar Panchayat Election, Bihar panchayat elections, Madhepura news

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