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जयंती विशेष : बीपी मंडल- सामाजिक न्याय के पुरोधा या जातीय राजनीति के जनक ?

TURBASU | News18 Bihar
Updated: August 25, 2018, 2:54 PM IST
जयंती विशेष : बीपी मंडल- सामाजिक न्याय के पुरोधा या जातीय राजनीति के जनक ?
बी पी मंडल ( फाइल फोटो)

बीपी मंडल ने अपनी रिपोर्ट को तैयार करने के लिए पूरे देश का भ्रमण किया. उन्होंने देश की तीन हजार सात सौ 43 अन्य पिछड़ी जातियों की पहचान की और उन्हें समाज के मुख्य धारा में लाने के लिए अपनी सिफारिशें दी.

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देश शनिवार को मंडल आयोग के जनक बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल की सौंवी जयंती मना रहा है. बीपी मंडल की रिपोर्ट ने 90 के दशक के बाद भारत की राजनीति को बदल कर रख दिया था. द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनकी रिपोर्ट ने लागू होने के साथ देश में भूचाल-सा ला दिया. रिपोर्ट के पक्ष और विपक्ष में पूरा देश बंटा गया. हर तरफ आन्दोलन करते हुए छात्र नौजवान सड़क पर थे. राजनीतिक रूप से कोई राजनीतिक दल इस रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों का विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया.

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क्या यह सिर्फ राजनीतिक दलों की वोट बैंक की बात थी या देश की जरूरत ? बीपी मंडल क्या थे- सामाजिक न्याय के पुरोधा या जातीय राजनीति के जनक?  25 अगस्त 2018 से पूरे देश का पिछड़ा समाज अपने इस महानायक का जन्मशताब्दी मना रहा है.

मंडल विचार के संपादक और शिक्षाविद् प्रो. श्यामल किशोर यादव बताते हैं कि जाति व्यवस्था भारतीय समाज की वह हकीकत रही है जो हमें कई स्तरों में बांटती है. इस स्तर को खत्म करने के लिए समान अवसर के सिद्धांत पर मंडल आयोग ने रिपोर्ट दी. समाज का जिस वर्ग ने सदियों से हमारी जाति व्यवस्था और परंपराओं के कारण अपने सामाजिक विकास के अवसर को खो दिया था, आजाद भारत में उन्हें वह अवसर प्रदान कराना हमारे नीति निर्माताओं के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती थी. तभी तो पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया. फिर किसी एकलव्य को अपना अंगूठा न देना पड़े और किसी शंबुक का गर्दन न कटे, मंडल आयोग की यही चाहत थी, लेकिन इस सिफारिश को लागू करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री बीपी सिंह को भी अपनी कुर्सी गवांनी पड़ी.

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बीपी मंडल के बारे में प्रोफेसर श्यामल किशोर बताते हैं कि बीपी मंडल ने अपनी रिपोर्ट को तैयार करने के लिए पूरे देश का भ्रमण किया. उन्होंने देश की तीन हजार सात सौ 43 अन्य पिछड़ी जातियों की पहचान की और उन्हें समाज के मुख्य धारा में लाने  के लिए अपनी सिफारिशें दी.

मंडल आयोग की सिफारिशों को सौंपते बीपी मंडल

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लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रह चुके बीएन मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.(डॉ.) आर. के. यादव 'रवि' बताते हैं कि बीपी मंडल ने क्षेत्र के आधार पर जातियों का सामाजिक और शैक्षणिक स्तर का अध्यन किया जिसके आधार पर इन जातियों को पिछड़े और अगड़े वर्ग में रखा गया. यह प्रावधान सिर्फ कुछ जातियों के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए था जो हमारी क्षेत्रीय विविधता और परंपराओं के कारण आधुनिक समाज में पिछड़े रह गए. उन्होंने जो आरक्षण या कहें विशेष अवसर का सिद्धांत दिया वह हमेशा के लिए नहीं है. वह तो अवसर में भागेदारी सुनिश्चित करने के लिए है. उन्होंने भारतीय समाज का वैज्ञानिक अध्ययन किया जिस वजह से उनकी सिफारिशों को आज तक चुनौती नहीं दी जा सकी है.

बीपी मंडल के पुत्र जदयू नेता और पूर्व विधायक मनीन्द्र कुमार मंडल की मानें तो उन्होंने जो रिपोर्ट तैयार किया वह पिछड़ों का ग्रन्थ हैं. उन्होंने समाज के वंचित वर्ग के उत्थान और उसे मुख्य धारा में लाने के लिए जो सिफारिशें की उसका 50 प्रतिशत भी सरकार तीन दशक बाद भी लागू नहीं कर पाई है. आज भी मंडल का सामाजिक न्याय का सपना अधूरा है.

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First published: August 25, 2018, 10:26 AM IST
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