लाइव टीवी

सीएम ने मना किया तो बीपी मंडल विपक्ष के बेंच से सरकार के खिलाफ बोलने लगे

News18 Bihar
Updated: August 25, 2018, 2:00 PM IST
सीएम ने मना किया तो बीपी मंडल विपक्ष के बेंच से सरकार के खिलाफ बोलने लगे
बी पी मंडल ( न्यूज 18 फोटो)

सामाजिक न्याय का सिद्धांत भारत के संविधान के प्रस्तावना में निहित है. इसे संविधान के अनुच्छेद 340 में दिया गया है. क्योंकि आरक्षण कोई गरीबी मिटाओ का कार्यक्रम नहीं है.

  • Share this:
(प्रोफेसर श्यामल किशोर यादव) 

मंडल आयोग की अनुशंसा पर पूरे देश में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है. आज आर्थिक आधार पर लोग आरक्षण की बात करते हैं. उन्हें यह समझ नहीं आता है कि संविधान के प्रावधान के अलग देश नहीं चल सकता है. सामाजिक न्याय का सिद्धांत भारत के संविधान के प्रस्तावना में निहित है. इसे संविधान के अनुच्छेद 340 में दिया गया है. क्योंकि आरक्षण कोई गरीबी मिटाओ का कार्यक्रम नहीं है.

ये भी पढ़ें-  जयंती विशेष : बीपी मंडल- सामाजिक न्याय के पुरोधा या जातीय राजनीति के जनक ?

बीपी मंडल एक समाजिक वैज्ञानिक थे. उन्होंने भारतीय समाज का अध्ययन किया और उस समाज को बदलने के लिए मंडल आयोग की अनुसंशा दी. बीपी मंडल पौरुष के प्रतीक थे. तब महामहिम राज्यपाल महोदय नित्यानंद कानूनगो ने जब महाधिवक्ता से सलाह मांगी कि मंडल जी विधानमंडल के सदस्य नहीं है तो क्या वे मुख्यमंत्री बन सकते हैं ? तो महाधिवक्ता ने सलाह दी कि नहीं बन सकते है, तो इस पर मंडल जी ने कहा-" so long the people of bihar is with me, no power on earth can prevent me form becoming the chief minister of bihar" और मंडल जी 1 फरवरी 1968 को बिहार के मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ली.

ये भी पढ़ें- बीपी मंडल जयंती : आरक्षण लागू होने के बाद भी वंचितों को नहीं मिला पूरा हक

बीपी मंडल जी लोकतंत्र के हिमायती थे, 1965 में सहरसा जिला के पामा में सवर्णों और पुलिस द्वारा किए गए नृशंस व्यवहार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मंडल जी को ट्रेजरी बेंच में रहते हुए सरकार के खिलाफ बोलने से रोका तो वे तुरंत विरोधी दल के बेंच पर जाकर सरकार के विरोध में बोलना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि जनता हमें बोलने के लिए भेजती है न कि सरकार के पक्ष में बोलने के लिए. इसी घटना के बाद ही उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कर दिया.

राष्ट्रप्रेम सर्वोपरी
Loading...

बीपी मंडल जी काफी मर्माहत थे की मिथिला विश्वविद्यालय में एक ही जाति के लोग आदेशपाल से कुलपति तक के पद पर काबिज थे. उन्होंने विधानमंडल में बोलते हुए इस पर चर्चा करते हुए कहा- एक दिन के लिए भी मेरी सरकार फिर बनी तो मैं मिथिला विश्वविद्यालय नाम की कोई चिड़िया रहने नहीं दूंगा. एक माननीय सदस्य ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मंडल मिथिला हम लोगों की माता की माता है, कृपया कर मिथिला के प्रति ऐसा तृष्कृत वक्तव्य न दें तो अच्छा होगा. मंडल जी की प्रतिक्रिया थी - मिथिला हमलोगों की विमाता हो सकती है, माता तो कभी नहीं. हमलोगों की एक ही माता है वह है भारत माता. मंडल का यह वक्तव्य उनके राष्ट्र के प्रति प्रेम को दर्शाता है.

ये भी पढ़ें- मंडल आयोग से चर्चा में आए बीपी मंडल को भारत रत्न देने की मांग

आरक्षण को लेकर उनके विचार, मंडल आयोग के प्रतिवेदन में उन्होंने अभिव्यक्त किया है - "समानता केवल समान लोगों के बीच होती है और असमानता को समान के बराबर रखना असमानता को स्थिरता प्रदान करना है." इसका अर्थ यह है कि सामाजिक बराबरी की स्थापना तक आरक्षण पिछड़ों का हक है. इस अधिकार में किसी तरह का हस्तक्षेप उनके विशेष अवसर के सिद्धांत का हनन है. यह आधुनिक युग में समरस समाज की स्थापना में बाधक है.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मधेपुरा से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 25, 2018, 11:16 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...