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'घर बनाने के लिए जमीन नहीं और अधिकारी कहते हैं कि शौचालय बनवाओ'

TURBASU | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: November 21, 2017, 6:34 PM IST

अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक सभी शौचालय को लेकर लोगों की सोच बदलने में लगे हैं. लोग अपनी सोच बदल भी रहे हैं. वहीं हजारों परिवार की मजबूरी भी है कि वे सरकार के इस अभियान में कैसे शामिल हो.

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मधेपुरा में शौचालय निर्माण का काम तेजी से चल रहा है. अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक सभी शौचालय को लेकर लोगों की सोच बदलने में लगे हैं. लोग अपनी सोच बदल भी रहे हैं. वहीं हजारों परिवार की मजबूरी भी है कि वे सरकार के इस अभियान में कैसे शामिल हो.

रहने को घर नहीं और सोने को बिस्तर नहीं, लेकिन साहब और नेता जी लोग आते हैं और कहते हैं शौचालय बनवाओ. कोई ये नहीं सोच रहा है कि कैसे बनवाएं और कहां बनवाएं. 70-80 साल का बुजुर्ग व्यक्ति हो या गबरू नौजवान यहां रह रहे प्रत्येक व्यक्ति के मन में आज यही सवाल उठ रहा है.

सिंहेश्वर प्रखंड का सुखासन पंचायत स्थित महादलित टोले में 50 से अधिक परिवार ऐसे हैं जो पीढ़ियों से सरकारी जमीन पर सड़क किनारे बसे हुए हैं. अभी तक इन्हें जमीन का पर्चा नहीं मिला है. लिहाजा ये सरकार के आवास और शौचालय योजना के लाभ से वंचित हो रह रहे हैं.

शौचालय को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव भी देखने को मिल रहा है. महिलाऐं खुलकर शौचालय निर्माण से हुए लाभ को बता रही हैं, कि कैसे उन्होंने शौचालय की जरुरत को समझा और कर्ज लेकर प्राथमिकता के आधार पर शौचालय बनवाया.

शौचालय निर्माण में उत्पन बाधा पर सिंहेश्वर प्रखंड के पूर्व प्रमुख ने सरकार की पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि लोगों के घर में शौचालय बनवाना ही है तो पहले उसे बसने के लिए जमीन की व्यवस्था कर देनी चाहिए. भूमिहीन गरीब महादलितों की समस्या पर जब प्रखंड विकास पदाधिकारी से बात की गई तो उन्होंने जमीन देने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ने की बात कही.

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First published: November 21, 2017, 6:33 PM IST
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