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Loksabha Election 2019: 'यादव लैंड' में क्या इस बार भी चलेगी सियासत की उल्टी आंधी?

News18 Bihar
Updated: April 23, 2019, 6:52 AM IST
Loksabha Election 2019: 'यादव लैंड' में क्या इस बार भी चलेगी सियासत की उल्टी आंधी?
फाइल फोटो

मधेपुरा से पहली बार लोकसभा में नुमाइंदगी करने का गौरव दिग्गज समाजवादी नेता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और मंडल आयोग के अध्यक्ष रहे बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल को हासिल है. वो संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर यहां से चुनाव जीते थे.

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देश में मंडलवादी राजनीति की प्रयोग भूमि और 'यादव लैंड' के नाम से मशहूर मधेपुरा (Madhepura) लोकसभा क्षेत्र समाजवादी पृष्ठभूमि के नेताओं के लिए उर्वर रहा है. बीपी मंडल से लेकर शरद यादव, लालू प्रसाद यादव, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बारी-बारी से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है. यहां सत्ता विरोधी सियासत की आंधी चलती रही है. यहां कभी नेहरू की आंधी में यहां से किराय मुसहर जीते तो 2014 में मोदी की सूनामी में भी पप्पू यादव जीते.

इस बार भी यहां का मुख्य मुकाबला तीन यादवों के बीच है. महागठबंधन की ओर से आरजेडी के शरद यादव, एनडीए की ओर से जेडीयू के टिकर पर दिनेश चंद्र यादव और वर्तमान सांसद और जन अधिकारी पार्टी के प्रत्याशी पप्पू यादव के बीच तिकोना संघर्ष बन पड़ा है.

सियासी संघर्ष से इतर हम यहां के राजनीतिक इतिहास, संस्कृति, समस्याओं के बारे में जानने का प्रयास करते हैं.  1 मई 1981 को मधेपुरा जिला का गठन किया गया. जबकि 1967 में मधेपुरा लोकसभा सीट अस्तित्व में आया. यहां विधानसभा की 6 सीटें हैं. मधेपुरा जिले का सोनवर्षा, आलमनगर, बिहारीगंज, मधेपुरा तो सहरसा जिले का सहरसा और महिषी विधानसभा क्षेत्र आता है.

समाजवादी राजनीति की प्रयोगभूमि

यहां से पहली बार लोकसभा में नुमाइंदगी करने का गौरव दिग्गज समाजवादी नेता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और मंडल आयोग के अध्यक्ष रहे बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल को हासिल है. वो संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर यहां से चुनाव जीते थे.

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समाजवादी नेता BN मंडल और BP मंडल की जन्मस्थली. लालू यादव और शरद यादव की कर्मस्थली मधेपुरा में आज की तारीख में सबसे ज्यादा बुरा हाल छात्र और नौजवानों का है. चुनाव में सबसे ज्यादा उत्साह दिखाने वाला यह वर्ग आज खुद को छला महसूस कर रहा है.
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विकास से महरूम मधेपुरा
छात्रों की शिकायत है कि कॉलेज में शिक्षकों की कमी है. विश्वविद्यालय का सत्र समय पर नहीं चल रहा है. महिलाओं को खराब लॉ एंड ऑर्डर से शिकायत है. हिमालय से आने वाली नदियां बाढ़ से हर साल तबाही मचाती हैं. बाढ़ से बच गए तो सिंचाई के अभाव में फसलों का मर जाना आम है.

भूपेन्द्र नारायण मंडल, बीपी मंडल, लालू यादव, शरद यादव, पप्पू यादव जैसे दिग्गजों की कर्मभूमि होने के बाद भी मधेपुरा विकास के मामले में पिछड़ा हुआ है. मधेपुरा की गिनती बिहार के पिछड़े जिले के रूप में होती है.

मधेपुरा की सड़कें खस्ताहाल
यहां समस्याओं का अंबार है. NH-106 सालों से जर्जर है. इस सड़क पर चलना मुश्किल है. NH- 106, 107 और बायपास की हालत भी बदतर है. दो महीने पहले पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एपी शाही ने इसको लेकर बिहार सरकार को फटकार भी लगाई थी.

मधेपुरा की बदहाल सड़कें


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यहां की जमीन ज्यादा उर्वर नहीं है. किसानी कमजोर होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली ज्यादातर आबादी गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बरस करती है. यहां के मेहनतकश लोग रोजगार के लिए पलायन को मजबूर हैं.

रोम पोप का, मधेपुरा गोप का
'रोम है पोप का. मधेपुरा है गोप का'. इसका सीधा मतलब ये है कि मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में यादव जाति के वोटर सबसे ज्यादा हैं. परिसीमन के बाद आंकड़े थोड़े बदले हैं. पर यदि वोटर के आधार पर जाति की बात की जाए तो मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में अब भी यादव जाति के वोटर सबसे ज्यादा हैं.

मधेपुरा का प्रसिद्ध सिंहेश्वर स्थान


यही कारण है मंडलवादी राजनीति की प्रयोग भूमि मधेपुरा में 1967 में अब तक यादव जाति के उम्मीदवार चुनाव जीतते आ रहे हैं. आइए मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र के जातीय गणित पर एक नजर डालते हैं.

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यादव -   3,30,000
मुस्लिम-  1,80,000
ब्राह्मण-   1,70,000
राजपूत-  1,10,000
कायस्थ-  10,000
भूमिहार-   5,000
मुसहर-   1,08,000
दलित-    1,10,000
कुर्मी-     65,000
कोयरी-   60,000
धानुक-   60,000
वैश्य/पचपनियां-4,05,000

( नोट- ये सरकारी आंकड़े नहीं हैं. निजी एजेंसियों-संस्थाओं के रिसर्च पर आधारित हैं.)

सियासत की उल्टी हवा
पिछले लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जनता दल यूनाइटेड के शरद यादव को पचास हजार मतों के अंतर से पराजित किया था. तीसरे नंबर पर BJP के विजय सिंह कुशवाहा रहे थे.

हालांकि 2019 की स्थिति बिल्कुल अलग है. RJD की टिकट से जीते पप्पू यादव ने अपनी अलग पार्टी बना ली है. जबकि दूसरे नंबर पर रहे शरद यादव ने भी JDU से अलग होकर पार्टी से नाराज नेताओं को लेकर अपनी पार्टी बनायी है.

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दांव पर पप्पू यादव की प्रतिष्ठा
यादव लैंड से जीते दिग्गज यादव नेता केन्द्र और राज्य सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे. रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने रेल इंजन कारखाना और स्लीपर कारखाना की आधारशिला रखी. 10 साल के लंबे इंतजार के बाद मोदी सरकार के दौरान विद्युत रेल इंजन कारखाना तो शुरू हो गया है. लेकिन स्पीपर कारखाना शुरू नहीं हो सका है.

मधेपुरा का रेल इंजन कारखाना


क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी सांसद पप्पू यादव की थी. राष्ट्रीय और राज्य से जुड़े मुद्दों पर दिल्ली से लेकर पटना तक झंडा उठाकर आंदोलन करने वाले पप्पू यादव से स्थानीय लोगों की शिकायतें हैं. मधेपुरा की जनता सांसद का पूरा हिसाब रखे हुए हैं. जाहिर है इस बार यहां का चुनाव काफी रोचक होगा.

(रिपोर्ट- बृजम पांडे के साथ तुरबसु)

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First published: February 20, 2019, 5:55 PM IST
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