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बीएन मंडल विश्वविद्यालय की पहल, पाण्डुलिपियों के संरक्षण के लिए खुलेगा सेंटर

News18 Bihar
Updated: September 7, 2018, 11:50 PM IST
बीएन मंडल विश्वविद्यालय की पहल, पाण्डुलिपियों के संरक्षण के लिए खुलेगा सेंटर
फोटो साभार- bnmu.ac.in

मधेपुरा स्थित बीएन मंडल विश्वविद्यालय मिथिला और कोसी के इतिहास को संरक्षित करने की योजना बना रहा है.

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  • Last Updated: September 7, 2018, 11:50 PM IST
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मधेपुरा स्थित बीएन मंडल विश्वविद्यालय में पहली बार पाण्डुलिपि विज्ञान और लिपि विज्ञान पर 21 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. यह आयोजन राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन दिल्ली के सहयोग से आयोजित हुआ. कार्यशाला के माध्यम से शोधार्थियों को विभिन्न लिपियों की जानकारी दी गई. इसमें वैसे भी लिपि शामिल हैं जो अब लुप्त प्राय हैं.

बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति एके राय ने कहा कि कोसी का इलाका विद्वानों से भरा है. यहां पर पाण्डुलिपि के होने की काफी संभावना है. कोसी का इलाका बाढ़ प्रभावित होने के कारण पाण्डुलिपि के नष्ट होने की भी संभावना बनी रहती है. उन्होंने पाण्डुलिपि के संरक्षण के लिए बीएन मंडल विश्वविद्यालय मेन्युस्क्रिप्ट रिसोर्स सेंटर खोले जाने की बात कही.

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शोधार्थियों की मानें तो कार्यशाला से प्राप्त प्रशिक्षण के आधार पर वे प्राचीन शिलालेख, ताम्र पात्र आदि पाण्डुलिपि को पढ़ सकते हैं. उनका विश्वास है कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से कोसी और मिथिला के इतिहास में कई नयी जानकारी सामने आएंगी.

2003 में भारत सरकार ने पाण्डुलिपियों को संरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन की स्थापना की. मिशन के निदेशक प्रतापानन्द झा ने बताया कि पाण्डुलिपि के संरक्षण के लिए बीएन मंडल विश्वविद्यालय में चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा.

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बहरहाल, भारत में करीब एक करोड़ से अधिक पाण्डुलिपि उपलब्ध है. इसमें से 43 लाख को राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन के द्वारा सूचीबद्ध कर लिया गया है. 2020 तक बांकि को भी सूचीबद्ध करने की योजना है. पाण्डुलिपि सभ्यता के विकास का दस्तावेज है जिसके संरक्षण से हमारी ज्ञान परंपरा को विस्तार मिलेगा. यदि मधेपुरा में मेन्युस्क्रिप्ट रिसोर्स सेंटर बनाया जाता है तो कोसी और मिथिला के इतिहास को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा.
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(मधेपुरा से तुरबसु की रिपोर्ट)

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First published: September 7, 2018, 6:28 PM IST
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