बिहार: इस वजह से मारी जा रहीं संरक्षित डॉल्फिनें, नहीं हो रही तस्करों पर कोई कार्रवाई

सुपौल के कोसी इलाके में राष्ट्रीय जलीय जीव के रूप में संरक्षित गांगेय डॉल्फिन (सोंस) का शिकार जोर-शोर से चल रहा है. यह स्थिति तब है जब डॉल्फिन के शिकार को अपराध की श्रेणी में रखा गया है. इसके शिकार करने वाले को 3 से 7 साल की सजा और 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.

News18 Bihar
Updated: July 18, 2019, 3:43 PM IST
बिहार: इस वजह से मारी जा रहीं संरक्षित डॉल्फिनें, नहीं हो रही तस्करों पर कोई कार्रवाई
तेल निकालने के लिए संरक्षित जीव डॉल्फिन का शिकार कर रहे तस्कर (तस्वीर मधेपुरा-सुपौल कोसी इलाके की )
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Updated: July 18, 2019, 3:43 PM IST
बिहार के 12 जिलों में बाढ़ के हालात हैं. गंगा और कोसी के जलस्तर में वृद्धि के साथ ही इसका फैलाव कई इलाकों में हो गया है. इसी के साथ जलीय जीवों का तस्करी करने वाले गिरोह की नजर अब गैंगेटिक डॉल्फिन पर पड़ गई है. इसका धड़ल्ले से शिकार किया जा रहा है और खुलेआम इससे तेल निकालने का काम भी हो रहा है. इस बात की पुष्टि तब हुई जब बुधवार को प्रशासनिक अधिकारी निरीक्षण कर रहे थे.

डॉल्फिन से तेल निकालने की कोशिश
मामला सदर प्रखंड की बलवा पंचायत का है. यहां के पिपरा में मारी गई दो डॉल्फिन में से एक से तेल निकाला जा रहा था. तभी प्रशासनिक अधिकारी पहुंच गए, लेकिन उन्होंने तेल निकाल रहे मछुआरों को पकड़ने की कोशिश नहीं की और न ही कोई कार्रवाई की. इतना जरूर हुआ कि लटकाई गई दो डॉल्फिन को दोबारा पानी में छोड़ दिया गया.

संरक्षित जीव है डॉल्फिन

बता दें कि सुपौल के कोसी इलाके में राष्ट्रीय जलीय जीव के रूप में संरक्षित गांगेय डॉल्फिन (सोंस) का शिकार जोर-शोर से चल रहा है. यह स्थिति तब है जब डॉल्फिन के शिकार को अपराध की श्रेणी में रखा गया है.  इसके शिकार करने वाले को 3 से 7 साल की सजा और 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. तमाम नियमों के बाद भी डॉल्फिन पर संकट है.

अपराध की श्रेणी में आता है डॉल्फिन का शिकार 


डॉल्फिन के तेल का इस्तेमाल दवा बनाने में
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गौरतलब है कि डॉल्फिन के तेल का इस्तेमाल कई तरह की दवा बनाने में होती है जिस वजह से इसका अवैध शिकार किया जाता है. गंगा के बाद कोसी नदी में काफी संख्या में यह डॉल्फिन पायी जाती है. हाल ही में हुए सर्वेक्षण में सहरसा के इलाके में 72 और सुपौल जिले में 60 डॉल्फिन पाई गयी थी.

सरकार को भेजा गया सर्वे का प्रस्ताव
इससे उत्साहित होकर वन विभाग ने साल में तीन बार सर्वे करने का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा है. गौरतलब है कि डॉल्फिन को 5 अक्टूबर 2009 को डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है. वर्ष 1996 में ही इसे टर्नेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने विलुप्तप्राय जीव घोषित किया है और यह संरक्षित श्रेणी में आता है.

रिपोर्ट- तुरबसु
First published: July 18, 2019, 3:43 PM IST
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