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लोकसभा चुनाव 2019: मधुबनी के मैदान में तिकोना संघर्ष, फातमी के हटने से बदला समीकरण

फाइल फोटो

फाइल फोटो

राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो मधुबनी सीट पिछले दो चुनावों से बीजेपी के पास है. इस बार बीजेपी यहां तीसरी बार वापसी के लिए मैदान में है.

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बिहार में पांचवें चरण में मधुबनी सीट 6 मई को मतदान है. कुल 17 उम्मीदवारों में एनडीए और महागठबंधन के प्रत्याशियों के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही थी. लेकिन शकील अहमद ने निर्दलीय चुनावी मैदान में कूद कर मुकाबले का त्रिकोणीय बना दिया है. शकील अहमद ने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी है. वहीं अली अशरफ अली फातमी के मैदान से हट जाने से एनडीए और महागठबंधन, दोनों के लिए मुश्किलें सामने आ गई हैं.

राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो मधुबनी सीट पिछले दो चुनावों से बीजेपी के पास है. इस बार बीजेपी यहां तीसरी बार वापसी के लिए मैदान में है. 2014 में हुकुम देव नारायण ने आरजेडी के अब्दुल बारी सिद्दीकी को मात्र 2.39 प्रतिशत वोटों के अंतर से हराया था.

मधुबनी सीट से सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड हुक्मदेव के नाम है. हुकुमदेव नारायण यादव 2014 में मोदी लहर के बीच पांचवीं बार संसद पहुंचे थे. 1989 में सीतामढ़ी सीट से जनता दल के टिकट पर भी जीत दर्ज की थी.

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हुकुमदेव राज्यसभा सदस्य भी रहे हैं. उन्हें 2014 के उत्कृष्ट सांसद के पुरस्कार से भी नवाजा गया था. हुकुमदेव ने 1999 में मधुबनी सीट पर बीजेपी का खाता खुलवाया था.

शकील अहमद और हुकुमदेव के बीच 1998, 1999 और 2004 में सीधा मुकाबला हुआ जिसमें दो बार जीत शकील और एक बार हुकुमदेव के हाथ लगी है.

सीपीआई भी इस सीट से तीन बार जीती है और तीन बार रनर भी रही है.  1989 में भोगेंद्र झा ने सीपीआई को पहली जीत दिलाई. 1991 में भोगेंद्र झा दूसरी बार संसद पहुंचे.

1996 में सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़ रहे चतुरानन मिश्रा ने बीजेपी के हुकुमदेव नारायण यादव को शिकस्त दी थी. 1977 से 1984 तक हुए तीन चुनावों में पार्टी यहां रनर रही थी.

बिहार के मधुबनी का रेलवे स्टेशन मिथिला पेंटिंग से सजाया गया है


इस बार बीजेपी ने चार बार सांसद रह चुके हुकुम देव नारायण के बेटे अशोक यादव को टिकट दिया है. उनका मुकाबला महागठबंधन प्रत्याशी बद्री पूर्वे से है. बद्री पुर्बे दरभंगा के कारोबारी हैं और विकासशील इंसान पार्टी के उम्मीदवार हैं.

मधुबनी सीट पर ब्राह्मणों की जनसंख्या  करीब 2 लाख 35 हजार है. यादव  करीब 2 लाख 70 हजार, मुस्लिम करीब 2 लाख 15 हजार, अति पिछड़ा  करीब 6 लाख 10 हजार, दलित  करीब 2 लाख, कोइरी  करीब 1 लाख 10 हजार है.

मधुबनी संसदीय सीट से तीन प्रमुख प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. इनमें बीजेपी से अशोक यादव, वीआईपी से बद्री पूर्वे और निर्दलीय डॉ शकील अहमद के नाम शामिल हैं. हालांकि एक वक्त लगा था कि आरजेडी के पूर्व सांसद अली अशरफ फातमी भी मैदान में होंगे, लेकिन शकील अहमद के निर्दलीय मैदान में आने से वे चुनाव से हट गए हैं.

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फातमी के नामांकन वापस लेने से मधुबनी का चुनावी दंगल काफी रोमांचक बन गया है. उनके मैदान से हटते ही एनडीए और महागठबंधन के प्रत्याशियों का गणित उल्टा पड़ गया है.

दोनों दलों के प्रत्याशी मुस्लिम वोटों के बिखराव को अपनी जीत समझ रहे थे, लेकिन मैदान से मो. फातमी के हट जाने के बाद समीकरण बदल गए हैं. हालांकि अभी भी बहुत कन्फ्यूजन है.

मधुबनी सीट पर महागठबंधन के मूल वोटर मुस्लिम और यादव अभी भी तय नहीं कर पाए हैं कि वह शकील अहमद को वोट करेंगे या बद्री पूर्वे को. जाहिर है ऐसे में माय फैक्टर में बिखराव की भी आशंका है.

इन सबके बीच वैश्य और ब्राह्मण मतदाताओं पर भी काफी दारोमदार है.   यही वजह है कि सभी प्रत्याशी उन्हें अपने पाले में करने का प्रयास कर रहे हैं.

बहरहाल एनडीए प्रत्याशी डॉ. अशोक यादव के सामने पिता की विरासत को बचाने की जिम्मेदारी है, वहीं, महागठबंधन प्रत्याशी नई कहानी लिखने जद्दोजहद कर रहे हैं. जबकि डॉ शकील अपना दम खम दिखाने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं.

मधुबनी के भैरवा धाम में प्रसिद्ध उगना महादेव मंदिर


आइए हम इन उम्मीदवारों के संक्षिप्त प्रोफाइल पर नजर डालते हैं.

डॉ अशोक यादव, बीजेपी प्रत्याशी, मधुबनी

दिल्ली विश्वविद्यालय में साल 1992 में छात्र राजनीति में आए. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अलावा बीजेपी के युवा विंग में कई पदों पर रहते हुए पार्टी की मजबूती के लिए काम किया.

वर्ष 1995 से मधुबनी लोकसभा क्षेत्र के केवटी विधानसभा में सामाजिक और राजनीतिक काम करते रहे.

केवटी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर 3 बार विधायक चुने गए.  वर्ष 2005 के फरवरी, 2005 के अक्टूबर और 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में केवटी से विधायक चुने गए.

वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के उम्मीदवार से चुनाव हार गए.

बद्री पूर्वे,प्रत्याशी,विकासशील इंसान पार्टी,मधुबनी

बद्री पूर्वे पेशे से इंजीनियर हैं, छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़े रहे हैं.

मूलरूप से व्यवसायी हैं. चाचा कामेश्वर पूर्वे राजनीति से जुड़े हुए थे.

ई. पूर्वे दरभंगा नगर निगम से पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं.

विकासशील इंसान पार्टी में आने से पहले राष्ट्रीय जनता दल में विभिन्न पदों पर पार्टी का काम देखते रहे हैं.
चुनावी राजनीति में पहली बार उतरे हैं.

डॉ शकील अहमद,निर्दलीय प्रत्याशी,मधुबनी लोकसभा

डॉ शकील अहमद कांग्रेस के बड़े नेता रहे हैं.

मधुबनी के बिस्फी विधानसभा से साल 1985 ,1990 और 2000 में विधायक चुने गए.

वर्ष 2000 में राबड़ी मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री रहे.

वर्ष 1998 और 2004 में मधुबनी लोकसभा सीट से सांसद चुने गए.

मनमोहन सिंह सरकार में संचार ,आईटी और गृह राज्य मंत्री के पद पर रहे.

 

आंकड़ों में मधुबनी लोकसभा सीट

कुल वोटर -1792380

पुरुष वोटर - 945972

महिला वोटर - 846408

पहली बार वोट करने वाले 18 से 19 आयु वाले युवा मतदाता - 18892

दिव्यांग वोटर - करीब 23 हजार

मधुबनी में मतदान केंद्र - 1837

संवेदनशील मतदान केंद्र - 108

अति संवेदनशील मतदान केंद्र - 54

मधुबनी लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा क्षेत्र हैं

मधुबनी लोकसभा क्षेत्र के तहत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- हरलाखी, बेनीपट्टी, बिस्फी, मधुबनी, केवटी और जाले.  2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इनमें से तीन सीटें आरजेडी, एक बीजेपी, एक कांग्रेस और एक सीट पर आरएलएसपी  ने जीत दर्ज की थी.

1.हरलाखी - (वोटर - 275655), विधायक-आरएलएसपी (बागी गुट)
2.बेनीपट्टी- (वोटर -286866), विधायक-कांग्रेस
3.बिस्फी - (वोटर - 316328), विधायक-आरजेडी
4.मधुबनी - ( वोटर - 332502), विधायक -आरजेडी
5.केवटी- ( वोटर 282663), विधायक-आरजेडी
6.जाले - (वोटर - 298366), विधायक- बीजेपी

मधुबनी संसदीय सीट पर एक नजर

साल                                                     जीते                                                हारे

1952 (दरभंगा पूर्व सीट)               अनिरुद्ध सिन्हा(कांग्रेस)                  लक्ष्मण झा(एसपी)

1957                                          अनिरुद्ध सिन्हा(कांग्रेस)                 सूर्य नारायण सिंह(पीएसपी)

1962                                          योगेंद्र झा(पीएसपी)                        अनिरुद्ध सिन्हा(कांग्रेस)

1967                                          शिव चंद्र झा(एसएसपी)                  वाय झा (कांग्रेस)

1971                                         जगन्नाथ मिश्रा(कांग्रेस)                    विनायक प्रसाद यादव(एसएसपी)

1977                                          हुक्मदेव नारायण यादव(बीएलडी)   भोगेंद्र झा(सीपीआई)

1980                                         शफीकउल्लाह अंसारी(कांग्रेस आई)   भोगेंद्र झा(सीपीआई)

1984                                         अब्दुल हनन(कांग्रेस)      भोगेंद्र झा (सीपीआई)

1989                                          भोगेंद्र झा(सीपीआई)      अब्दुल हनन(कांग्रेस)

1991                                          भोगेंद्र झा(सीपीआई)      जगन्नाथ मिश्रा (कांग्रेस)

1996                                          चतुरानन मिश्रा(सीपीआई)   हुक्मदेव नारायण यादव(बीजेपी)

1998                                        शकील अहमद(कांग्रेस)    हुकुमदेव नारायण यादव(बीजेपी)

1999                                        हुकुमदेव नारायण यादव(बीजेपी)    शकील अहमद(कांग्रेस)

2004                                         शकील अहमद(कांग्रेस)    हुकुमदेव नारायण यादव(बीजेपी)

2009                                        हुकुमदेव नारायण यादव(बीजेपी)   अब्दुल बारी सिद्दीकी(आरजेडी)

2014                                         हुकुमदेव नारायण यादव(बीजेपी)     अब्दुल बारी सिद्दीकी(आरजेडी)

इनपुट- अमित रंजन

 

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