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पढ़ें, कैसे पीएम के 'मेक इन इंडिया पॉलिसी' पर भारी पर सकते हैं मधेपुरा के किसान

मधेपुरा के ग्रीन फील्ड इलेक्ट्रिक रेल इंजन कारखाना निर्माण के लिए ग्लोबल टेंडर के बाद निर्माण की जिम्मेदारी फ्रांस की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी अलस्टोम को दे दी गई है. सरकार ने उसके साथ करार भी कर लिया है, लेकिन मधेपुरा में किसान जमीन के मुआवजे के लिए आज भी लड़ रहे हैं.

मधेपुरा के ग्रीन फील्ड इलेक्ट्रिक रेल इंजन कारखाना निर्माण के लिए ग्लोबल टेंडर के बाद निर्माण की जिम्मेदारी फ्रांस की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी अलस्टोम को दे दी गई है. सरकार ने उसके साथ करार भी कर लिया है, लेकिन मधेपुरा में किसान जमीन के मुआवजे के लिए आज भी लड़ रहे हैं.

मधेपुरा के ग्रीन फील्ड इलेक्ट्रिक रेल इंजन कारखाना निर्माण के लिए ग्लोबल टेंडर के बाद निर्माण की जिम्मेदारी फ्रांस की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी अलस्टोम को दे दी गई है. सरकार ने उसके साथ करार भी कर लिया है, लेकिन मधेपुरा में किसान जमीन के मुआवजे के लिए आज भी लड़ रहे हैं.

  • Dawn News
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मधेपुरा के ग्रीन फील्ड इलेक्ट्रिक रेल इंजन कारखाना निर्माण के लिए ग्लोबल टेंडर के बाद निर्माण की जिम्मेदारी फ्रांस की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी अलस्टोम को दे दी गई है. सरकार ने उसके साथ करार भी कर लिया है, लेकिन मधेपुरा में किसान जमीन के मुआवजे के लिए आज भी लड़ रहे हैं.

 

किसानों की इस मांग ने ऐसे समय में एक बार फिर से जोर पकड़ा है, जब मेक इन इंडिया पॉलिसी के तहत पीएम रेल मंत्रालय के माध्यम से बिहार को बड़ी सौगात दे चुके हैं. 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत वर्तमान बाजार दर पर चार गुणा मुआवजा, परिवार से एक नौकरी सहित पांच सूत्री मांग को लेकर किसान निर्माण स्थल पर धरना दे रहे हैं.

कारखाना के लिए जमीन देने वाले भूमिदाता और पेशे से अधिवक्ता निर्मल कुमार सिंह का कहना है कि सरकार जमीन के मसले को सुलझाए बगैर पहले बिडिंग और फिर कांट्रेक्ट कर ली है. जबकि जमीन का पता ही नहीं है.

उनका कहना है कि किसानों के सभी मांग नियम संगत है. रेलवे को इसे मान कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, नहीं तो आंदोलन उग्र भी हो सकता है. धरना को संबोधित करते हुए सीपीआई नेता प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि सरकार रेल इंजन कारखाना के लिए पहले 1107 एकड़ जमीन चिन्हित किया था.

अब बताया जा रहा है कि मात्र 300 एकड़ में कारखाना बनेगा. वो 300 एकड़ जमीन कौन सी है किसान इसे नहीं जान रहे हैं. शेष जमीन का रेलवे क्या करेगी इसकी भी जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि किसान रेल इंजन कारखाना का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन रेल मंत्रालय किसानों कि आशंका को दूर करे और 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत सुविधा और मुआवजा दे.

धरना कार्यक्रम को मधेपुरा सांसद पप्पू यादव ने भी मोबाईल से संबोधित किया. उन्होंने किसानों को बताया कि उनकी मांगों को रेल मंत्री और रेलवे के अधिकारियों के पास मजबूती से रखा गया है. सांसद स्वंय भी इन मांगों के प्रति संवेदनशील भी हैं. उन्होंने किसानो को विश्वास रखने कि बात कहते हुए कहा कि उनकी मांग जरुर पूरी होगी.

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