बाढ़ की तबाही को रोकने की तैयारी देखने 'फ्लड फील्ड' में उतरे नीतीश कुमार, कमला नदी पर बनेगा बराज
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बाढ़ की तबाही को रोकने की तैयारी देखने 'फ्लड फील्ड' में उतरे नीतीश कुमार, कमला नदी पर बनेगा बराज
मधुबनी में बाढ़ से बचावा के लिए की गई तैयारियों का जायजा लेते नीतीश कुमार

जानकारों के मुताबिक कमला वियर को बैराज में परिवर्तित करने से इस इलाके में सिंचाई की क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी, जिससे न सिर्फ मधुबनी बल्कि दरभंगा जिले के किसानों को भी फायदा होगा.

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मधुबनी. सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) बुधवार को उत्तरी बिहार को बाढ़ से बचाने के लिए किए गए इंतजामों का जायजाा लेने खुद फ्लड फील्ड (Flood Field) में उतरे. मधुबनी में सीएम ने कमला नदी के तटबंधों पर किए जा रहे सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया. मधुबनी के जयनगर पहुंचे सीएम यहां करीब 25 मिनट रुके. इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जल संसाधन मंत्री संजय झा समेत तमाम आला अधिकारियों के साथ कमला तटबंध (Kamla Dam) के अलग-अलग हिस्सों में जाकर बहुत ही बारीकी से सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया.

मंत्री और विभाग से मांगा प्रस्ताव

कमला तटबंध का मुआयना करने के दौरान सीएम ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को कई निर्देश भी दिए. मुख्यमंत्री ने जयनगर में भारत-नेपाल सीमा के नजदीक कमला नदी के तटबंधों के साथ ही कमला वियर का भी निरीक्षण किया. इस दौरान सीएम ने भारतीय सीमा क्षेत्रों में तटबंधों को और अधिक ऊंचा करने के निर्देश दिए साथ ही जल संसाधन मंत्री संजय झा और उनके विभाग से जुड़े आला अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद सीएम ने कमला वियर को बैराज में परिवर्तित करने के लिए जल संसाधन विभाग से प्रस्ताव भी मांगा. जानकारों के मुताबिक कमला वियर को बैराज में परिवर्तित करने से इस इलाके में सिंचाई की क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी, जिससे न सिर्फ मधुबनी बल्कि दरभंगा जिले के किसानों को भी फायदा होगा.



बिहार में आयरन शीट पायलिंग तकनीक से पहली बार हो रहा बांध निर्माण
जयनगर के बाद सीएम का काफिला झंझारपुर प्रखंड के नरूआर गांव भी पहुंचा. मुख्यमंत्री ने यहां भी बांध की मरम्मतीकरण कार्यों का निरीक्षण किया. पिछले साल कमला नदी में आई बाढ़ में नरूआर गांव के पास बांध टूटने से गांव में भारी तबाही मची थी. बहरहाल पिछले कई सालों में बाढ़ से हुई तबाही को स्थायी तौर पर रोकने के मकसद से कमला नदी के तटबंधों की मरम्मतीकरण में इस बार नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. नरूआर गांव में तटबंधों के टूटने के कारणों को जानने और मरम्मत के काम को बेहतर तरीके से करने के लिए आईआईटी रूड़की से तकनीकी सेवाएं ली गयी हैं. आईआईटी से मिली रिपोर्ट की समीक्षा के बाद आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ब्रीच क्लोजर का कार्य कराया जा रहा है. इस कार्य में आयरन शीट पायलिंग और जियो बैग पिचिंग तकनीक का उपयोग बिहार में पहली बार हो रहा है. जानकारों के मुताबिक इस नई तकनीक से बने बांध में पानी के तेज दबाव को सहने की अधिक क्षमता होती है.

एक तीर से सीएम ने साधे कई निशाने

सीएम के मधुबनी पहुंचने पर एनडीए कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह देखा गया. हालांकि सीएम ने यहां किसी सभा को संबोधित नहीं किया लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं का सीएम ने हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया. कोरोना के चलते लंबे समय बाद पटना से बाहर निकले सीएम नीतीश कुमार ने अपने पहले दौरे के लिए मधुबनी को चुनकर मिथिलांचल के लोगों को ये संकेत भी दिया है कि-मधुबनी और यहां की समस्यायों को लेकर राज्य सरकार काफी गंभीर है. गौरतलब है कि-पिछले कई दशकों से बाढ़ और सुखाड़ की तबाही झेलने को अभिशप्त मिथिलांचलवासी अब इस समस्या का स्थायी निदान चाहते है. अब देखना है कि कमला तंटबंध पर नई तकनीक से किए जा रहे सुरक्षा इंतजाम मधुबनी में बाढ़ की तबाही रोकने में कितना असरदार होता है.
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